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भावुक पल: बंटवारे में बिछड़े चचेरे भाई-बहन 76 साल बाद मिले, पढ़ें- मोहम्मद इस्माइल और सुरिंदर कौर की कहानी

Tue, 24 Oct 2023 09:26 AM IST
ajay kumar अमर उजाला/एजेंसी, नई दिल्ली/जालंधर
अमर उजाला/एजेंसी, नई दिल्ली/जालंधर Published by: ajay kumar Updated Tue, 24 Oct 2023 09:26 AM IST
सार

एक पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल ने इस्माइल की कहानी सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी, जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया के एक सरदार मिशन सिंह ने उनसे संपर्क किया और उन्हें भारत में लापता परिवार के सदस्यों के बारे में बताया था।

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Cousins separated during India and Pakistan partition meet in Kartarpur after 76 years
मोहम्मद इस्माइल और सुरिंदर कौर। - फोटो : एजेंसी

विस्तार

भारत के बंटवारे के समय 76 साल पहले अलग हुए चचेरे भाई-बहन रविवार को करतारपुर गलियारे में मिलकर भावुक हो उठे। पाकिस्तान के एक अधिकारी ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से ही ऐसा संभव हो पाया। मोहम्मद इस्माइल और उनकी बहन सुरिंदर कौर की उम्र इस समय करीब 80 वर्ष है। वे दोनों रविवार को पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब में माथा टेकने पहुंचे थे। इस दौरान उनका मिलन हो पाया।

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इवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) के एक अधिकारी ने बताया कि करतारपुर साहिब के प्रशासन ने चचेरे भाई-बहन को पुनर्मिलन की सुविधा प्रदान की और उन्हें मिठाई व लंगर भी वितरित किया। इस्माइल लाहौर से लगभग 200 किलोमीटर दूर पाकिस्तान के साहीवाल जिले से हैं और सुरिंदर कौर भारत के जालंधर में रहती हैं। इस्माइल और सुरिंदर कौर के परिवार विभाजन से पहले जालंधर जिले के शाहकोट में रह रहे थे।

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सोशल मीडिया के माध्यम से मिले

एक पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल ने इस्माइल की कहानी सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी, जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया के एक सरदार मिशन सिंह ने उनसे संपर्क किया और उन्हें भारत में लापता परिवार के सदस्यों के बारे में बताया। मिशन सिंह ने इस्माइल को सुरिंदर कौर का टेलीफोन नंबर दिया, जिसके बाद दोनों भाई-बहन ने बात की और करतारपुर कॉरिडोर के माध्यम से गुरुद्वारा दरबार साहिब में मिलना तय किया।

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उल्लेखनीय है कि गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब में श्री गुरु नानक देव जी ने अपना अंतिम समय बिताया था। यहां दुनियाभर में रह रहे सिख माथा टेकने पहुंचते हैं। यह गुरुद्वारा भारत और पाकिस्तान के बीच बने चार किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के माध्यम से गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा साहिब से जुड़ा है। श्रद्धालु बिना वीजा इस कॉरिडोर से आ जा सकते हैं। हालांकि, उन्हें पासपोर्ट दिखाना अनिवार्य है। 

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