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बिजली के बढ़े टैरिफ को अप्रैल से लागू करने पर क्यों न लगा दें रोक: हाईकोर्ट

Thu, 14 Dec 2017 09:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 14 Dec 2017 09:26 AM IST
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Court issues notice to Punjab government, PSERC and PSPCL
पंजाब सरकार, पीएसईआरसी और पीएसपीसीएल को नोटिस - फोटो : File Photo
पंजाब सरकार द्वारा 23 अक्तूबर को राज्य में बिजली की दरों में की गई 9.33 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी और इसे पिछली अप्रैल से लागू करने को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार, पीएसईआरसी और पीएसपीसीएल को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न इन आदेशों पर रोक लगा दी जाए।
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लुधियाना और मंडी गोबिंदगढ़ के 12 उद्योगपतियों द्वारा सीनियर एडवोकेट पुनीत जिंदल और एडवोकेट नेहा आनंद महाजन के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए बिजली टैरिफ बढ़ाने और इसे पिछली तिथि से लागू करने को चुनौती दी गई है।
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हाईकोर्ट को बताया गया कि इस तरह से दरें बढ़ाते समय इससे दरें बढ़ाने की नोटिफिकेशन के दिन के बाद से लागू किया जाता है। लेकिन इस मामले में सरकार सहित पीएसईआरसी और पीएसपीसीएल ने 1 अप्रैल (सात माह पहले) से ही लागू कर दिया। साथ ही यह भी निर्देश दे दिए गए कि यह बढ़ी हुई दरें अक्तूूबर 2017 से जून 2018 तक  उपभोक्ताओं के बिलों में किश्तों में वसूली जाएंगी। 
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 दायर याचिका पर बहस के दौरान सीनियर एडवोकेट पुनीत जिंदल ने हाईकोर्ट को बताया कि पिछली तारीख से दरें लागू किया जाना पूरी तरह से गैर-क़ानूनी है। सरकार का कोई फैसला उस फैसले को लिए जाने के दिन के बाद से भविष्य के लिए लागू होता है। तय है कि अप्रैल माह से लेकर अब तक जो लोग बिजली का बिल अदा कर चुके थे अब उन्हें अप्रैल माह से लागू नई दरों को अगले वर्ष जून माह तक किश्तों में भरना पड़ेगा जो कि पूरी तरह से गलत है। 


रेगुलेशन से ‘प्रेफेरेबली’ शब्द हटाने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सरकार के इस फैसले से उन लोगों को तो कोई परेशानी नहीं होगी जिनका बिल कम आता है लेकिन इस फैसले से उद्योग प्रभावित होंगे  क्योंकि उनका बिल भी अधिक होता है और और उन्हें अब अप्रैल माह से बकाया भी भरना पड़ेगा। हाईकोर्ट को बताया गया की सरकार ने बड़ी ही चालाकी से रेगुलेशन-52 (3 ) के प्रेफेरेबली शब्द से खिलवाड़ किया है। जिसमें कहा गया है कि दरें पिछली तारीख से चाहे तो बढ़ाई जा सकती है, लिहाजा याचिकाकर्ताओं ने रेगुलेशन से इस प्रेफेरेबली शब्द को हटाने की भी हाईकोर्ट से मांग की है।  
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