मोहाली: पूर्व डीजीपी सैनी की अग्रिम जमानत याचिका पर बहस पूरी, फैसला कल
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29 साल पुराने आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के अगवा होने के मामले में केस दर्ज होने के बाद मुश्किल में चल रहे पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को शनिवार मोहाली जिला अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। दरअसल, गत शुक्रवार को उनके ऊपर अपहरण का केस दर्ज होने के बाद उन्होंने अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दी थी।
उनकी कोर्ट में बहस पूरी हो गई, जबकि अदालत की तरफ से सोमवार तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। इससे पहले पूर्व डीजीपी सैनी की ओर से सीनियर एडवोकेट सतनाम सिंह कलेर को केस लड़ना था। लेकिन किन्हीं कारणों से उनकी ओर से मना करने के बाद उनकी जगह अदालत में हाईकोर्ट के वकील एपीएस दियोल और एसएचस धनोआ पेश हुए। जिन्होंने करीब तीन घंटे तक पूर्व डीजीपी सैनी पर दर्ज किए गए केस की पैरवी की। हालांकि उन्होंने साफ किया है यह केस राजनीति से प्रेरित है और यह केस बनता ही नहीं है।
मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार को एडिशनल सेशन जज की अदालत में पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की तरफ से दायर की गई याचिका पर सुनवाई करीब 3 घंटे चली। इस दौरान सैनी के वकीलों ने कहा कि यह केस गलत तरीके से दायर किया गया है, जो कि कहीं स्टैंड नहीं करता है। इस केस को पहले ही सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है।
वहीं दोबारा केस दर्ज करने में करीब 10 साल से ज्यादा समय लग गया है, जिससे यह साफ होता है कि यह एक साजिश है। इसके अलावा एक मैगजीन में छपे इंटरव्यू के आधार पर केस को दर्ज किया गया है। जबकि बलवंत सिंह मुल्तानी के परिवार की तरफ से पेश हुए वकील ने दलील में कहा है कि जब केस चल रहा था, उस समय सुमेध सिंह सैनी हमेशा उच्च पद पर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने यह केस दर्ज नहीं होने दिया। वहीं दूसरी ओर पुलिस की तरफ से रिकॉर्ड पेश किया गया।
सरकारी वकील ने कहा है कि पुलिस ने अभी तक केस क्यों नहीं दर्ज किया था, इस मामले की जांच की जाएगी। जो भी जांच में सामने आएगा उसे अदालत में पेश किया जाएगा। हालांकि इससे पहले गत शुक्रवार को सुमेध सिंह सैनी के वकील ने कहा था कि पुलिस ने गलत तरीके से केस दर्ज किया है। जिन पर केस दर्ज किया गया है उनमें से कुछ की तो मौत तक हो चुकी है। इसके अलावा उन्होंने केस दर्ज करने में देरी के साथ कई मुद्दे उठाए थे। शनिवार को इस मामले पर बहस पूरी गई। वहीं, अब सोमवार को अदालत की तरफ से अग्रिम जमानत पर फैसला सुनाया जाएगा।
ऐसे चला पूरा केस
मिली जानकारी के मुताबिक पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी पर एक आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के अपहरण संबंधी 29 साल पुराने मामले में मोहाली के मटौर थाने केस दर्ज हुआ है। यह घटना वर्ष 1991 की है, जब सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी थे। उन पर एक आतंकी हमला हुआ था। इसमें सैनी का तो बचाव हो गया था लेकिन उनकी सुरक्षा में तैनात 4 जवानों की मौत हो गई थी। फिर आरोप लगा कि चंडीगढ़ की पुलिस ने सैनी के इशारे पर मोहाली से बलवंत सिंह को जबरन उठा लिया था।
इसके बाद वह कभी घर नहीं लौटा। बलवंत सिंह मुल्तानी के भाई पलविंदर सिंह मुल्तानी और उनके परिवार ने इस मामले में काफी लंबी जंग लड़ी। आखिरकार पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के दिशा-निर्देश पर एक प्राथमिक जांच की गई। इसके बाद सीबीआई की ओर से दो जुलाई 2008 को मामला दर्ज किया गया था।
शिकायतकर्ता ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को इस आधार पर रद्द कर दिया कि हाईकोर्ट बेंच के पास केस का निपटारा करने के लिए अधिकार क्षेत्र की कमी है। शिकायतकर्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने परिवार को नए सिरे से कार्रवाई की आजादी दी थी।
2014 में पूर्व डीजीपी सैनी के साथी रहे एक पूर्व अधिकारी ने मैगजीन को इंटरव्यू दिया था। इसमें उन्होंने बलवंत सिंह मुल्तानी का जिक्र किया था कि किस प्रकार उसे यातनाएं दी गई थी। इसके आधार पर परिवार ने अपनी जंग तेज की और नतीजतन अब यह केस दर्ज हुआ है।