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बड़ा फैसलाः लिबड़ा मोटर्स की 10 बसों की कुर्की के आदेश
अमित शर्मा/अमर उजाला, मोहाली
Updated Wed, 20 May 2015 11:41 AM IST
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चार साल पुराने एक्सीडेंट के मामले में 53 लाख का मुआवजा न देने पर जिला अदालत ने लिबड़ा मोर्ट्स सरहिंद की दस बसों की कुर्की के आदेश दिए हैं। यह फैसला अतिरिक्त सेशन जज दिलबाग सिंह जौहल की अदालत ने सुनाया।
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जानकारी के मुताबिक अदालत में सेक्टर-70 निवासी कंप्यूटर इंजीनियर हरप्रीत सिंह के परिवार वालों ने मुआवजे के लिए केस दायर किया था। उन्होंने बताया था कि 29 नवंबर 2011 को हरप्रीत सिंह स्कूटर पर जा रहे थे। इस दौरान लिबड़ा मोर्ट्स की बस बस स्टैंड की ओर से आ रही थी।
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ड्राइवर बस को काफी गलत तरीके से चला रहा था। हरप्रीत जब पीसीएल चौक और स्पाइस चौक के बीच में पहुंचे तो इस दौरान बस ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे के बाद हरप्रीत गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें मल्टीपल इंजरी आई थी।
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पुलिस ने हरप्रीत को सेक्टर-71 स्थित आईवी अस्पताल में भर्ती करवाया था जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनका फेज-6 स्थित सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद थाना फेज-1 पुलिस ने सेक्टर-22बी निवासी जसमीत सिंह के बयान केस दर्ज किया था।
जिला अदालत ने परिवार वालों को 46,15,020 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही लिबड़ा मोर्ट्स को पूरी रकम पर छह प्रतिशत ब्याज देने को भी कहा। ब्याज मिलाकर भुगतान 53,08343 बनता था। लेकिन, बस मालिकों ने मृतक के परिवार को उक्त राशि का भुगतान नहीं किया था।
ये बसें होंगी कुर्क
पीबी-23-एच-6617
पीबी-23-एफ-6117
पीबी-23-जी-5717
पीबी-23-एच-6717
पीबी-23-ए-9817
पीबी-12-सी-1761
पीबी-23-सी-2517
पीबी-23-डी-7369
पीबी-23-ई-8467
पीबी-23-9917
महीने की 50 हजार आमदनी थी
अदालत में दायर याचिका में मृतक की पत्नी ने बताया कि हरप्रीत ने बीएससी कंप्यूटर इंजीनियरिंग की हुई थी। साथ ही उनका अपना कंप्यूटर का बिजनेस था। महीने की मासिक आमदनी 50 हजार रुपये थी। उसी से ही सारे परिवार का गुजारा चल रहा था।
नहीं था हादसे वाली बस का इंश्योरेंस
जिस बस से हरप्रीत का एक्सीडेंट हुआ था, उसकी इंश्योरेंस भी किसी भी कंपनी से नहीं हुई थी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने लिबड़ा मोटर्स और ड्राइवर नरिंदर सिंह को पार्टी बनाया था।
इन लोगों ने दायर की थी याचिका
हरप्रीत की पत्नी सरबजीत कौर, बेटे मनप्रीत सिंह (13) और अर्शदीप सिंह (9), मां बलबीर कौर, पिता सुरिंदर सिंह ने याचिका दायर की थी।