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हाईकोर्ट का बोझ होगा कम, अब जल्द निपटेंगे कंपनी केस

Wed, 17 May 2017 10:19 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 17 May 2017 10:19 AM IST
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court case will finalised soon
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
अब अदालतों में विचाराधीन कंपनी एक्ट के केस ज्यादा देर तक नहीं लटकेंगे और हाईकोर्ट का बोझ भी काफी कम होगा। क्योंकि केंद्रीय कारोबार मंत्रालय ने अब पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के लिए क्षेत्रीय स्तर पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) चंडीगढ़ में ही स्थापित किया है। उधर, हाईकोर्ट में भी कंपनी एक्ट से संबंधित जो केस है, उन्हें भी इसी ट्रिब्यूनल में ट्रांसफर किया जा रहा है।
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अभी अदालतों में करना पड़ता है लंबा इंतजार
अभी कंपनी एक्ट के कई केस विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। बहुत से याची ऐसे हैं, जिनके  विभिन्न कंपनियों के खिलाफ आर्थिक मसलों को लेकर अदालत में केस चल रहे हैं। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में भी इस तरह के केसों की काफी भरमार है, जिस वजह से याचियों को इन केसों के निपटान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, लेकिन अब एनसीएलटी में इन केसों को जल्द निपटाया जाएगा।
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एनसीएलटी इस तरह करेगी काम, अपील सीधे सुप्रीम कोर्ट

court case will finalised soon
जल्द निपटेंगे केस - फोटो : demo pics
कंपनी केसों के निपटान के लिए चंडीगढ़ में गठित एनसीएलटी में डबल बेंच तक होगी। इसमें न्यायाधीश या तो रिटायर्ड सीनियर ब्यूरोक्रेट्स होंगे या फिर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज। शासकीय प्रशासक डीके सिंह ने बताया कि कंपनी एक्ट से संबंधित अधिकतर केस याची व कंपनी के बीच आर्थिक मामलों के होते हैं।

एनसीएलटी में ऐसे केस आने के बाद बेंच चौदह दिन के भीतर इंसोलवेंसी एवं बैंकरप्सी कोड से रजिस्टर्ड ‘इंसोलवेंसी प्रोफेशनल’ तैनात करेगा। ये सीए, सीएस, कोस्ट अकाउंटेंट, एलएलबी या एलएलएम हो सकते हैं। ये प्रोफेशनल छह माह में संबंधित केस के निपटान में अपनी रिपेार्ट देंगे। केस पेचीदा हो तो तीन माह का अतिरिक्त समय भी मिलेगा।

इस दौरान कंपनी यदि दोषी पाई जाएगी तो यही प्रोफेशनल कंपनी को वाइंड-अप करने की सिफारिश करेंगे। इस दौरान यदि कंपनी या याची असंतुष्ट है तो वह दिल्ली स्थित एसीएलटी में अपील करेंगे और वहां से सीधी अपील सुप्रीम कोर्ट में होगी। बीच में हाईकोर्ट की भूमिका नहीं रहेगी। दिसंबर 2016 सेहाईकोर्ट के सभी कंपनी एक्ट संबंधी केसों को एनसीएलटी में ही ट्रांसफर किया जा रहा है।
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