{"_id":"c31a06f6311162e9acc8141d6cbe0868","slug":"court-acquits-ex-chief-engineer-acuited-in-fraud-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"सबूतों के अभाव ने बरी कर दिया गया इस इंजीनियर को","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सबूतों के अभाव ने बरी कर दिया गया इस इंजीनियर को
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 26 Nov 2013 08:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्व चीफ इंजीनियर के के जैरथ को 13 साल पुराने भ्रष्टाचार मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रीति साहनी की अदालत ने सबूतों के अभाव से बरी कर दिया।
जैरथ पर अपने सहयोगियों को 16 जनवरी 1995 से 21 जनवरी 1997 के बीच दिल्ली सरकारी टूर के लिए गाड़ियां सेंक्शन करने का आरोप था अदालत ने पूर्व चीफ इंजीनियर के खिलाफ 01 अप्रैल 2005 को आरोप तय किए थे। मामले की सुनवाई के दौरान 21 लोगों ने अपने बयान अदालत में दर्ज करवाएं थे।
गवाहों ने बयान दिए थे कि गाड़ियों को तत्कालीन चीफ इंजीनियर ने सेंक्शन किया था और उनका इस्तेमाल सिर्फ सरकारी काम के लिए किया गया था। गाड़ियां का इस्तेमाल व्यक्तिगत काम के लिए नहीं किया गया।
विज्ञापन
ड्राइवर ने बयानों में कहा था कि मामले की जानकारी तत्कालीन प्रशासक के सलाहकार प्रदीप मेहरा को भी दी गई थी। पूर्व चीफ इंजीनियर के वकील तरमिंदर सिंह ने अदालत में बताया कि जैरथ के खिलाफ एक साजिश के तहत मामला बनाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व चीफ इंजीनियर को तत्कालीन गृह सचिव अनुराधा गुप्ता के इशारे पर ही उन्हें फंसाया गया था।
यह था मामला
तत्कालीन चीफ इंजीनियर ने जनवरी 1995 से लेकर 1997 तक दिल्ली में होने वाली सरकारी बैठकों में जाने वाले सहयोगियों के लिए सरकारी गाड़ी सेंक्शन की थी।
जैरथ ने अदालत में बयान दिए कि तत्कालीन होम सेक्रेटरी अनुराधा गुप्ता ने एक किसी व्यक्ति से झूठी शिकायत लिखवाकर जांच कराई थी। 8 जुलाई 2000 को विजिलेंस ने जैरथ के खिलाफ मामला दर्ज किया था। विजिलेंस ने जांच में पाया कि बिना अनुमति के गाड़ियां दिल्ली ले जाने से सरकार को 38,736 रुपये का नुकसान हुआ था, लेकिन इसका सुबूत नहीं मिला।
विजिलेंस के मुताबिक जैरथ गाड़ियों की अनुमति नहीं दे सकते थे। जैरथ आठ केसों में से चार में बरी हो चुके हैं। एक मामला प्रशासन ने खुद ही वापस ले लिया था जबकि तीन मामलों में अभी ट्रायल चल रहा है।
विज्ञापन
जैरथ पर अपने सहयोगियों को 16 जनवरी 1995 से 21 जनवरी 1997 के बीच दिल्ली सरकारी टूर के लिए गाड़ियां सेंक्शन करने का आरोप था अदालत ने पूर्व चीफ इंजीनियर के खिलाफ 01 अप्रैल 2005 को आरोप तय किए थे। मामले की सुनवाई के दौरान 21 लोगों ने अपने बयान अदालत में दर्ज करवाएं थे।
विज्ञापन
गवाहों ने बयान दिए थे कि गाड़ियों को तत्कालीन चीफ इंजीनियर ने सेंक्शन किया था और उनका इस्तेमाल सिर्फ सरकारी काम के लिए किया गया था। गाड़ियां का इस्तेमाल व्यक्तिगत काम के लिए नहीं किया गया।
विज्ञापन
ड्राइवर ने बयानों में कहा था कि मामले की जानकारी तत्कालीन प्रशासक के सलाहकार प्रदीप मेहरा को भी दी गई थी। पूर्व चीफ इंजीनियर के वकील तरमिंदर सिंह ने अदालत में बताया कि जैरथ के खिलाफ एक साजिश के तहत मामला बनाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व चीफ इंजीनियर को तत्कालीन गृह सचिव अनुराधा गुप्ता के इशारे पर ही उन्हें फंसाया गया था।
यह था मामला
तत्कालीन चीफ इंजीनियर ने जनवरी 1995 से लेकर 1997 तक दिल्ली में होने वाली सरकारी बैठकों में जाने वाले सहयोगियों के लिए सरकारी गाड़ी सेंक्शन की थी।
जैरथ ने अदालत में बयान दिए कि तत्कालीन होम सेक्रेटरी अनुराधा गुप्ता ने एक किसी व्यक्ति से झूठी शिकायत लिखवाकर जांच कराई थी। 8 जुलाई 2000 को विजिलेंस ने जैरथ के खिलाफ मामला दर्ज किया था। विजिलेंस ने जांच में पाया कि बिना अनुमति के गाड़ियां दिल्ली ले जाने से सरकार को 38,736 रुपये का नुकसान हुआ था, लेकिन इसका सुबूत नहीं मिला।
विजिलेंस के मुताबिक जैरथ गाड़ियों की अनुमति नहीं दे सकते थे। जैरथ आठ केसों में से चार में बरी हो चुके हैं। एक मामला प्रशासन ने खुद ही वापस ले लिया था जबकि तीन मामलों में अभी ट्रायल चल रहा है।