आर्थिक मदद मिलती तो आज जिंदा होता रमनदीप
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वह पढ़ना चाहता था लेकिन बदकिस्मती यह थी कि वह गरीब परिवार से था। एक माह स्कूल की फीस नहीं दे पाया। फिर गर्मी की छुट्टियां हो गईं। स्कूल फिर से खुला तो क्लास इंचार्ज ने दो माह की फीस 80 रुपये जमा कराने के लिए कहा।
माता-पिता फीस के पैसे नहीं दे पा रहे थे। उसे स्कूल छूटने का डर सताने लगा। तनाव मासूम पर बुरी तरह हावी हुआ और आखिरकार फीस के आगे जिंदगी सस्ती हो गई। उसने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
यह कहानी है पंजाब के गुरदासपुर के नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले रमनदीप की। रमनदीप को अगर आर्थिक मदद मिल जाती तो आज वह भी अन्य सहपाठियों के साथ कक्षा में सुनहरे भविष्य की बुनियाद तैयार कर रहा होता।
पढ़ना चाहता था रमनदीप लेकिन मजबूर था
काहनुवान पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले गांव धाबे निवासी महंगा राम का बेटा रमनदीप सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जागोवाल बेट में पढ़ता था। उसके पिता महंगा राम मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं।
लेकिन उनकी कमाई इतनी नहीं है कि रमनदीप की पढ़ाई का खर्च उठा सकें। रमनदीप पढ़ना चाहता था और लगातार फीस के लिए जिद करता था।
उसकी लगन देखकर माता-पिता जल्द फीस देने की बात कह टाल देते लेकिन शायद इस बार उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह देरी उन्हें बेटे से हमेशा के लिए दूर कर देगी।
स्कूल फीस देने में असमर्थ रमनदीप के पिता
रमनदीप के पिता ने बताया कि स्कूल फीस के रूप में 80 रुपये देने में वह असमर्थ थे। उन्होंने रमनदीप से जल्द ही फीस देने की बात कही थी लेकिन उसे स्कूल छूटने का डर सताने लगा था। वह गुमसुम सा रहने लगा।
इसी तनाव के चलते वह वीरवार को स्कूल भी नहीं गया। सुबह महंगा राम काम पर चले गए और रमनदीप की मां मायके गई हुई थी। रमनदीप घर पर अकेला था। दोपहर को जब उसके पिता लौटे तो पता चला कि उसने फंदा लगाकर जान दे दी है।
थाना काहनुवान के एसएचओ कश्मीर सिंह ने बताया कि रमनदीप के पिता जल्द फीस भरने की बात कहते थे लेकिन बहुत देर हो गई। तनाव के चलते उसने जान दे दी।