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हरियाणाः राजस्व, पुलिस, शिक्षा, बिजली महकमे के अफसर ज्यादा भ्रष्ट, रिपोर्ट में खुलासा

Fri, 09 Nov 2018 03:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 09 Nov 2018 03:34 PM IST
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Corrupt Officers in All Government Departments of Haryana
Bribe, corruption
हरियाणा सरकार भ्रष्टाचार में संलिप्त अफसरों पर सख्त है। भ्रष्टाचार में फंसे इन अफसरों के खिलाफ अब आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। इस मामले में हरियाणा राज्य चौकसी ब्यूरो ने राज्य सरकार को सिफारिश भेज दी है। उधर, पिछले चार सालों में जिन विभागों के अफसरों को अदालत से भ्रष्टाचार मामले में सजा सुनाई गई है, उनमें सबसे ज्यादा राजस्व, पुलिस, शिक्षा व बिजली विभाग से संबंधित है। आंकड़ों पर नजर डालें तो हरियाणा राज्य चौकसी ब्यूरो ने 26 अक्तूबर, 2014 से अक्टूबर 18, 2018 की अवधि के दौरान 542 मामले दर्ज किए गए।  इस अवधि के दौरान 338 जांचों को अंतिम रूप दिया गया है। इन जांचों के आधार पर, 62 राजपत्रित अधिकारियों, 58 गैर राजपत्रित अधिकारी व 74 कर्मचारी और 119 जांचों में अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए 54 आपराधिक मामलों की सिफारिश की गई है। जबकि 18 जांचों में आपराधिक और विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई।
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इस अवधि के दौरान अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ जांच मामलों सहित 530 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इस अवधि के दौरान, ब्यूरो ने 426 छापे मारे। इनमें रिश्वत लेते हुए 40 राजपत्रित अधिकारी, 411 गैर राजपत्रित अधिकारी और 57 अन्य व्यक्तियों को रंगे हाथों पकड़ा गया। भ्रष्टाचार अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13 के तहत आपराधिक मामलों को ब्यूरो के पुलिस स्टेशनों में उनके खिलाफ पंजीकृत किया गया है। इस अवधि में एक्सईन स्तर के अधिकारियों की अध्यक्षता में ब्यूरो के तकनीकी शाखा ने पूरे राज्य में 362 आंकलन किए। इन चेकिंग के आधार पर, ब्यूरो ने 14.45 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली के साथ विभिन्न विभागों के 552 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।  इसी अवधि में अदालतों द्वारा 139 मामलों का निर्णय लिया गया है, जिसमें 152 अधिकारी व कर्मचारियों और 47 अन्य निजी व्यक्तियों को ब्यूरो द्वारा दायर मामलों में भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम, 1988 के विभिन्न वर्गों के  तहत दोषी पाया गया है।
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उधर, जिन लोगों की सजा सुनाई गई उनमें राजस्व विभाग के 30 अधिकारी, पुलिस विभाग के 28, शिक्षा विभाग के 16, बिजली विभाग के 14, सहकारिता विभाग के 10, स्वास्थ्य विभाग के आठ, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के सात, जनस्वास्थ्य विभाग के पांच, परिवहन और सिंचाई विभाग के चार-चार, पशुपालन एवं डेयरी, हुड्डा और कृषि विभाग के तीन-तीन, पंचायती राज, श्रम, वक्फ बोर्ड, खजाना, उत्पाद शुल्क और कराधान और उद्योग विभागों के दो-दो और खाद्य और नागरिक आपूर्ति, सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग, खेल और युवा मामलों, विकास और पंचायत और न्याय प्रशासन का एक -एक है। दोषी व्यक्तियों की सबसे ज्यादा संख्या राजस्व, पुलिस, शिक्षा और बिजली विभागों से संबंधित है। इन मामलों में, अदालतों द्वारा पांच साल तक जेल की सजा सुनाई गई है।
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