मोहाली से चंपारण लौटे 1304 लोग , पटियाला और अमृतसर से 1200-1200 मजदूर मुजफ्फरपुर व यूपी रवाना
- लुधियाना, पटियाला, अमृतसर और जालंधर से लगातार प्रवासियों का पलायन जारी
- स्क्रीनिंग के बाद स्टेशन पर लोगों को खाना और बिस्कुट आदि मुहैया करवाया गया
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कर्फ्यू के कारण मोहाली जिले में फंसे लोगों को उनके गृह राज्यों में प्रशासन की ओर से मुफ्त में भेजा जा रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से बसों और ट्रेनों का इंतजाम किया गया है। बुधवार को एक स्पेशल श्रमिक ट्रेन 1304 लोगों को लेकर बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया के लिए रवाना हुई। इनमें 764 लोग मोहाली और अन्य 540 लोग डेराबस्सी में रह रहे थे। इस स्पेशल ट्रेन को मोहाली रेलवे स्टेशन से दोपहर एक बजे रवाना किया गया।
जानकारी के मुताबिक भले ही बुधवार को हल्की बारिश के कारण मौसम खराब था लेकिन इसके बावजूद भी जिला प्रशासन की तरफ से प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्य में भेजने के लिए पूरे इंतजाम किए गए। डेराबस्सी और मोहाली से ट्रेन में जाने वाले लोगों की स्वास्थ्य जांच के लिए सुबह स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद स्पेशल बसों में बैठाकर सभी को मोहाली के रेलवे स्टेशन पर पहुंचाया गया। स्टेशन पर पहुंचते ही श्रमिकों को कोरोना से बचने की जरूरी जानकारी दी गई।
इसके साथ ही उन्हें खाना-पानी और बिस्कुट मुहैया करवाए गए। इस दौरान घरों को जा रहे श्रमिकों के चेहरों पर खुशी दिखाई दे रही थी। सभी ने प्रशासन का धन्यवाद किया और इतना ही नहीं कुछ ने स्टेशन पर खड़े मोहाली प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों को सैल्यूट कर धन्यवाद किया। वहीं, श्रमिकों को उनके घर भेजते समय मोहाली जिला प्रशासन के अधिकारियों के चेहरों पर भी रौनक थी।
बसों को किया गया सैनिटाइज
जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि श्रमिकों को रेलवे स्टेशन पर लेकर जाने से पहले उनकी स्क्रीनिंग की जाती है। इसके बाद जिन बसों में बैठकार श्रमिकों को रेलेव स्टेशन छोड़ा जाता है, उन बसों को पहले सैनिटाइज किया जाता है। इसके बाद श्रमिकों को रेलवे स्टेशन पर छोड़ने के बाद दोबारा बसों को सैनिटाइज किया जाता है। इसके अलावा अधिकारियों को भी पूरी तरह अपने हाथ सैनिटाइज करने और मास्क पहनने की सलाह दी गई है।
पटियाला: 12 सौ मजदूर मुजफ्फरपुर रवाना
बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले 12 सौ श्रमिकों को लेकर बुधवार सुबह स्पेशल ट्रेन पटियाला रेलवे स्टेशन से रवाना हुई। सभी मजदूर को खाना और पानी की बोतल दी गईं। मेयर संजीव शर्मा बिट्टू ने बताया कि छह ट्रेनों और 25 बसों के माध्यम से जिला प्रशासन की ओर से केंद्र की मदद से 13 मई तक करीब आठ हजार से अधिक लोगों को उनके घर तक पहुंचाने का प्रबंध किया जा चुका है।
आगे बताया कि जिला प्रशासन की वेबसाइट पर जिले भर से करीब 35 हजार श्रमिकों ने अपने गृह जिलों या राज्यों को जाने के लिए आवेदन किया था। इसी आवेदन के आधार पर मजदूरों को तय तारीख पर रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर बुलाया गया। यहां पहुंचने पर सभी श्रमिकों की मेडिकल स्क्रीनिंग के बाद उनका रिकार्ड तैयार किया गया। जांच रिकार्ड को उनके गृह राज्यों और जिलों को भेजा गया। ताकि किसी प्रकार की मुश्किल आने पर संबंधित श्रमिक को तलाशना आसान हो।
अमृतसर से भी उत्तर प्रदेश गए प्रवासी मजदूर
अमृतसर रेलवे स्टेशन से 1200 प्रवासी मजदूरों को लेकर एक विशेष ट्रेन उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर को रवाना हुई। पंजाब सरकार ने घर लौट रहे मजदूरों को रेल टिकट और भोजन व पानी भी उपलब्ध करवाया। अब तक सात गाड़ियों में सात हजार से अधिक प्रवासी मजदूरों को भेजा जा चुका है।
सरहिंद से 930 प्रवासियों को लेकर श्रमिक एक्सप्रेस मणिपुर रवाना
सरहिंद रेलवे स्टेशन से बुधवार की शाम को श्रमिक एक्सप्रेस रेलगाड़ी 930 प्रवासियों को लेकर मणिपुर को रवाना हुई। पंजाब सरकार ने इन प्रवासियों को भेजने में करीब 11 लाख रुपये खर्च रही है। डिप्टी कमिशनर अमृत कौर गिल ने बताया कि तय प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रेशन उपरांत मेडिकल स्क्रीनिंग के बाद प्रवासियों को भेजा गया है। डीसी ने बताया कि पंजाब के18 जिलों और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और पंचकूला ( हरियाणा) से मणिपुर जाने वाले व्यक्तियों को विशेष बसों द्वारा सरहिंद रेलवे स्टेशन लाया गया, जहां से यह यात्री अपने पैतृक राज्यों के लिए रवाना हुए।
जीरकपुर के 216 प्रवासी मजदूर चंपारण भेजे
प्रवासी मजदूरों को उनके प्रदेशों में भेजने का काम जोर-शोर से चल रहा है। इसके तहत बुधवार को एसडीएम डेराबस्सी ने बिहार के चंपारण के लिए मजदूर भिजवाए। जीरकपुर के मैक्डोनल चौक पर बने राधा स्वामी सत्संग भवन से 12 बसों से इन्हें मोहाली के रेलवे स्टेशन पर भेजा गया जहां से वह अपने प्रदेश के लिए रवाना हुए। बसों में बैठने से पहले बसों को सैनिटाइज किया गया व सामाजिक दूरी का ध्यान रखा गया। जीरकपुर से 216 मजदूरों को 6 बसों में रेलवे स्टेशन भेजा गया। सेहत विभाग द्वारा की गई स्क्रीनिंग में सभी मजदूरों की रिपोर्ट सही पाई गई।
एसडीएम डेराबस्सी कुलदीप सिंह बावा ने बताया की करीब डेढ़ महीने के लॉकडाउन के चलते सभी काम बंद पड़े थे जिसके चलते प्रवासी मजदूरों के लिए रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया था। रोजाना 400 से 500 प्रवासी मजदूरों को घर भेजा जा रहा है। इसके अलावा दूसरे राज्यों से बात भी की जा रही है ताकि वह अपने-अपने राज्य के मजदूरों को वहां पहुंचने पर संभाल सकें। इस मौके पर उनके साथ तहसीलदार नवप्रीत सिंह शेरगिल, नायब तहसीलदार वरिंदर धुत व अन्य कर्मचारी मौजूद थे।