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गुड़िया मर्डर केस: पांच आरोपियों ने वापस ली जमानत याचिका, सीबीआई कोर्ट में होनी थी सुनवाई
Mon, 04 May 2020 04:27 PM IST
खुशबू गोयल
मोनिका नागर, चंडीगढ़
मोनिका नागर, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 04 May 2020 04:27 PM IST
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गुड़िया मर्डर केस के आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में पांच आरोपियों ने अपनी जमानत याचिका वापस ले ली है। आरोपियों ने याचिका में कोई मजबूत ग्राउंड न होने के कारण वापस ली है। बीते शनिवार को चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट में पांच आरोपियों कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, हेड कांस्टेबल सूरत सिंह, मोहन लाल, रफीक अली और कांस्टेबल रंजीत ने जमानत याचिका दायर की थी।
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पांचों आरोपियों ने याचिका में कोरोना महामारी का हवाला दिया था, जिसके आधार पर जमानत मिलना मुश्किल था। क्योंकि सभी आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज है। इसमें 7 साल से ज्यादा सजा का प्रावधान है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार केवल 7 साल से कम सजा वाले आरोपी को ही कोरोना के कारण जमानत दी जा सकती है, इसलिए आरोपियों ने जमानत याचिका वापस ले ली। इससे पहले इस मामले में आरोपी आईजी जहूर जैदी की भी जमानत याचिका को सीबीआई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
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यह है मामला
शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई के एक स्कूल की छात्रा 4 जुलाई 2017 को लापता हो गई थी। दो दिन बाद उसकी जंगल से लाश मिली थी। एसआईटी ने स्थानीय युवक समेत पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया। इनमें सूरज नाम का एक नेपाली युवक भी था, जिसकी कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को मौत हो गई थी। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिस के टॉर्चर से ही सूरज की मौत हुई थी।
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इस केस में सीबीआई ने आईजी जहूर एच जैदी, एसपी डीडब्ल्यू नेगी, ठयोग डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद, हेड कांस्टेबल सूरत सिंह, मोहन लाल, रफीक अली और कांस्टेबल रंजीत को आरोपी बनाया। इन आरोपियों के खिलाफ शिमला की सीबीआई कोर्ट में केस चल रहा था लेकिन वहां इनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ, जिस वजह से सुप्रीम कोर्ट ने केस को चंडीगढ़ ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।