फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Coronavirus, Lockdown, Curfew, Reasons Behind Increasing Numbers of Patients in Punjab

कोरोनाः पंजाब को तीन गलतियां पड़ीं भारी, नांदेड़ भेजी गई वॉल्वो बसों ने बिगाड़ा खेला, जानिए कैसे

Fri, 01 May 2020 11:59 AM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल/वरिंदर राणा, जालंधर/लुधियाना
सुरिंदर पाल/वरिंदर राणा, जालंधर/लुधियाना Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 01 May 2020 11:59 AM IST
विज्ञापन
Coronavirus, Lockdown, Curfew, Reasons Behind Increasing Numbers of Patients in Punjab
अमरिंदर सिंह
पंजाब सरकार की लापरवाही से प्रदेश में कोरोना का ग्राफ तेजी से बढ़ गया है। सारा खेल नांदेड गई वॉल्वो बसों ने बिगाड़ा और फिर तीन गलतियां पड़ी भारीं। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, करीब 700 श्रद्धालु श्री हजूर साहिब से निजी वाहनों पर खुद यहां पहुंच गए। इन्हें न तो सीमा पर रोका गया और न ही उन्हें क्वारंटीन किया गया।
विज्ञापन


सरकार को इन श्रद्धालुओं के आने की भनक तक नहीं लगी। इतना ही नहीं, इन श्रद्धालुओं का गांव पहुंचने पर लोगों ने स्वागत भी किया। इस नतीजा यह निकला कि पंजाब के कई ऐसे जिलों में यह महामारी पैर पसारने लगी है, जहां इस पर काबू पा लिया गया था। अब सरकार इन श्रद्धालुओं को खोज खोजकर क्वारंटीन कर रही है।
विज्ञापन


ये तीन गलतियां पड़ीं भारी
पहली गलती तो श्री हजूर साहिब में हुई, जहां पर फंसे हुए श्रद्धालुओं की सिर्फ स्क्रीनिंग की, उनका कोरोना टेस्ट नहीं किया गया। लगभग 3700 लोगों को वापस लाने के लिए पंजाब सरकार ने 80 बसें नांदेड़ भेजी थी। लेकिन हकीकत यह है कि 26 अप्रैल से पहले काफी लोग निजी वाहनों को लेकर पंजाब निकल चुके थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


दूसरी गलती नाकों पर हुई। पंजाब में बेशक कर्फ्यू लगा था लेकिन फिर इन श्रद्धालुओं के इन निजी वाहनों को एंट्री दे दी गई। तीसरी गलती यह हुई कि पंजाब सरकार द्वारा भेजी बसों से वापस आए श्रद्धालुओं को कई जिलों में सीधा घर भेज दिया गया।

गलतियों का यह हुआ नतीजा
सरकार की इस लापरवाही का नतीजा यह निकला कि लुधियाना, कपूरथला, नवांशहर, अमृतसर, पठानकोट में दोबारा कोरोना के मरीज आ गए। नवांशहर कोरोना मुक्त हो चुका था लेकिन अब वहां पर 23 मरीज हो गए हैं। इसी तरह से मालवा के कई जिलों में कोरोना ने दस्तक नहीं दी थी, लेकिन अब मालवा के मानसा, फरीकोट, फिरोजपुर, मुक्तसर, संगरूर, बठिंडा, फतेहगढ़ साहब, मोगा, बरनाला में कोरोना के मरीज मिल गए हैं। वहीं माझा का गुरदासपुर, तरनतारन, अमृतसर में भी कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। सरकार अब बस लकीर पीटने का काम कर रही है।

नियमों को ताक पर रख सरकार ने भेजी वॉल्वो बसें

राजनीति में क्रेडिट लेने की होड़ कई बार आम लोगों पर भारी पड़ जाती है, इसका उदाहरण पंजाब में बीते चार दिन से कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या से साफ लगाया जा सकता है। श्री हजूर साहिब और राजस्थान के कोटा से छात्रों को लाने के लिए पंजाब सरकार की दरियादिली दिखाते वॉल्वो बसों का इस्तेमाल किया। उनका यही फैसला अब भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। सेहत विभाग की गाइड लाइंस के अनुसार कोरोना पीड़ित किसी व्यक्ति को एसी की सुविधा नहीं दी जानी चाहिए। क्योंकि इससे संक्रमण उस एरिया में तेजी से फैलता है।

गौर हो कि श्री हजूर साहिब में लॉक डाउन के चलते फंसे पंजाब के श्रद्धालुओं को लाने के लिए बीते कुछ समय से क्रेडिट वार चल रहा था। बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल श्रद्धालुओं को लाने में लगी थी। वह केंद्र सरकार से श्रद्धालुओं को लाने के लिए परमिशन का दबाव बना रही थी। आखिरकार यह फैसला हो गया कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं और कोटा में फंसे छात्रों को ला सकती है। यहां पर भी क्रेडिट लेने के चक्कर में पंजाब सरकार ने श्रद्धालु और छात्रों को लाने के लिए सिर्फ वॉल्वो बसों का चयन किया।

कोरोना को लेकर जारी गाइडलाइंस के मुताबिक जहां कोरोना संदिग्ध या कोरोना पीड़ित व्यक्ति को रखा जाए वहां पर एसी की सुविधा नहीं दी जा सकती। एयरकंडीशनर कमरे की हवा को बार बार सर्कुलेट करता रहता है। ऐसे में अगर कोई अन्य व्यक्ति वहां पर होगा, वह भी इसकी चपेट में आ सकता है। इन्हीं गाइड लाइंस के चलते कोरोना पीड़ित या फिर संदिग्ध के लिए बनाए गए सेंटर में एसी की सुविधा नहीं दी गई है।

पंजाब सरकार की नालायकी के कारण के कारण प्रदेश में पॉजिटिव केसों की संख्या बढ़ी है। मैंने पहले ही प्रदेश सरकार को आगाह किया था कि हजूर साहिब से आने वाले श्रद्धालुओं की जांच जरूर हो। सरकार ने सिर्फ स्क्रीनिंग कर उन्हें घर भेज दिया। सेहत मंत्री बलवीर सिद्धू भी इस बात को मान चुके है। जहां तक वॉल्वो बस भेजने का सवाल है राज्य सरकार को एसओपी को ध्यान में रखना चाहिए था।
- हरसिमरत कौर बादल, सांसद

वॉल्वो बसों में नहीं बरती गई एतिहयात

पंजाब सरकार द्वारा 26 अप्रैल को श्री हजूर साहब भेजी गई 80 बसें वॉल्वो थी, जिस कारण सारा बवाल हो गया। वॉल्वो बस एयरकंडीशन होती हैं और हवा अंदर ही सर्कुलेट होती है, जो कोरोना के फैलने का मुख्य कारण बनी। इतना ही नहीं, बाहर का तापमान 35 डिग्री था और बसों को 25 डिग्री से नीचे तापमान लाया गया।

अधिकारियों को खुली खिड़की वाली बसें भेजनी चाहिए थी ताकि बाहरी हवा सर्कुलेट हो। सूत्रों के मुताबिक, पंजाब सरकार के ट्रांसपोर्ट अधिकारियों ने आम बसें ही भेजने की योजना बनाई थी लेकिन इसी बीच केंद्रीय मंत्री हरसिमरत का बयान आ गया कि पंजाब से वॉल्वो बसें भेजी जाएंगी। उनका पक्ष था कि यात्री वॉल्वों बसें में आराम से आएंगे और पंजाब के अधिकारियों ने तत्काल वॉल्वो की तैयारी कर ली लेकिन प्रोटोकॉल को भूल गए।

बसें एयरटाइट थी और यात्री अंदर ही अंदर एक दूसरे के संपर्क में आते गए। जिस कारण कोरोना फैल गया। हालांकि पंजाब ट्रांसपोर्ट के पनबस और पीआरटीसी के पास काफी बसें हैं, जिनकी कंडीशन व सीट अच्छी है लेकिन उनमें एयरकंडीशन नहीं है लेकिन वॉल्वो का चक्कर खतरा बन गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed