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कीर्तिमानः रेल कोच फैक्ट्री ने बनाया मोबाइल वेंटिलेटर ‘जीवन’, 10 हजार रुपये से भी कम है कीमत
Mon, 06 Apr 2020 01:55 PM IST
खुशबू गोयल
संवाद न्यूज एजेंसी, कपूरथला
संवाद न्यूज एजेंसी, कपूरथला
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 06 Apr 2020 01:55 PM IST
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मोबाइल वेंटिलेटर ‘जीवन’
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना आपदा के दौरान आपात स्थिति में मेडिकल फील्ड में खुद को साबित करने की संभावनाएं तलाशने में आरसीएफ प्रबंधन पूरी तरह से खरा उतरा है। आरसीएफ के महाप्रबंधक रवींद्र गुप्ता ने अपनी टीम के साथ सात दिन में एक प्रोटोटाइप वेंटिलेटर ‘जीवन’ बनाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह एक नियमित वेंटिलेटर की लागत की तुलना में बहुत कम खर्च का होगा। इसे अपनी सुविधा अनुसार सूटकेस में पैक करके कहीं भी ले जाया जा सकेगा। इसके विस्तृत निर्माण से पहले इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) में अंतिम परीक्षण के लिए इसे भेजा जा रहा है।
जीएम रवींद्र गुप्ता ने कहा कि यह एक आपातकालीन वेंटिलेटर है, जो कोविड 19 के संकट से उभरने के लिए बनाया गया है। इसे परीक्षण और सत्यापन के लिए आईसीएमआर के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। उम्मीद है कि कठिन दौर में यह जीवन रक्षक साबित होगा। इस यंत्र की लागत कंप्रेसर के बिना 10 हजार रुपये से भी कम होगी। इसका उत्पादन आसान है और इसे स्थानीय स्तर पर किसी अन्य स्रोत के साथ मिलकर बनाया जा सकता है। यह वेंटिलेटर बहुत सहजता से काम करता है और यह रिवर्स इंजीनियरिंग का नमूना नहीं है।
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जीएम रवींद्र गुप्ता ने कहा कि यह एक आपातकालीन वेंटिलेटर है, जो कोविड 19 के संकट से उभरने के लिए बनाया गया है। इसे परीक्षण और सत्यापन के लिए आईसीएमआर के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। उम्मीद है कि कठिन दौर में यह जीवन रक्षक साबित होगा। इस यंत्र की लागत कंप्रेसर के बिना 10 हजार रुपये से भी कम होगी। इसका उत्पादन आसान है और इसे स्थानीय स्तर पर किसी अन्य स्रोत के साथ मिलकर बनाया जा सकता है। यह वेंटिलेटर बहुत सहजता से काम करता है और यह रिवर्स इंजीनियरिंग का नमूना नहीं है।
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ऐसे काम करता है वेंटिलेटर
डिवाइस का मुख्य भाग संपीड़ित वायु कंटेनर (कंप्रेस्ड एयर कंटेनर) है, जो मोटर या पिस्टन या लिंक तंत्र के बिना हवा के साथ अंबु बैग की तरह काम करता है। इसमें माइक्रो प्रोसेस आधारित नियंत्रक है और इसके सर्किट को आरसीएफ टीम की ओर से डिजाइन किया गया है। मरीज की श्वसन प्रक्रिया को नियमित करने के लिए एक वॉल्व इसमें स्थापित किया गया है।
इस वेंटिलेटर को और भी छोटे आकार के उपकरणों का उपयोग करके अधिक कॉम्पेक्ट किया जा सकता है। आरसीएफ टीम ने इसका निर्माण करने के लिए इन हाउस कैपेसिटी का इस्तेमाल किया है। वेंटिलेटर की बॉडी को कोच के उपकरणों से बनाया गया है। ऑर्गन फ्लोमीटर लेजर वेल्डिंग मशीन से लिया गया है। कंप्रेसर को एयर कूलर से लिया गया है।
नियामक वॉल्व तथा एक माइक्रो प्रोसेसर दिल्ली और नोएडा के विक्रेताओं से खरीदा गया। आरसीएफ टीम अब आईसीएमआर के लिए तकनीकी दस्तावेज तैयार कर रही है। अगले सप्ताह तक रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार, प्रोटोटाइप को वहां परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
इस वेंटिलेटर को और भी छोटे आकार के उपकरणों का उपयोग करके अधिक कॉम्पेक्ट किया जा सकता है। आरसीएफ टीम ने इसका निर्माण करने के लिए इन हाउस कैपेसिटी का इस्तेमाल किया है। वेंटिलेटर की बॉडी को कोच के उपकरणों से बनाया गया है। ऑर्गन फ्लोमीटर लेजर वेल्डिंग मशीन से लिया गया है। कंप्रेसर को एयर कूलर से लिया गया है।
नियामक वॉल्व तथा एक माइक्रो प्रोसेसर दिल्ली और नोएडा के विक्रेताओं से खरीदा गया। आरसीएफ टीम अब आईसीएमआर के लिए तकनीकी दस्तावेज तैयार कर रही है। अगले सप्ताह तक रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार, प्रोटोटाइप को वहां परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।