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पंजाब: तब्लीग जमात में गए थे 432 लोग और 422 की हुई शिनाख्त, सरकार के लिए दो बड़े फैसले
Mon, 06 Apr 2020 01:54 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 06 Apr 2020 01:54 PM IST
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निजामुद्दीन मरकज में लोग
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दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज में तब्लीग जमात में हिस्सा लेने गए पंजाब के 432 लोगों की सूची राज्य सरकार को हासिल हुई है। इनमें से राज्य सरकार ने 422 लोगों की सूबे में शिनाख्त कर ली है। हालांकि इन 432 लोगों में से अब तक केवल 350 लोग ही पंजाब लौटे हैं।
सेहत विभाग ने रविवार को दावा किया कि पंजाब लौटे सभी 350 जमातियों के सैंपल ले लिए गए हैं और इनमें से 117 लोगों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है जबकि 227 लोगों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। इन जमातियों में से अब तक छह लोगों की मौत भी हो चुकी है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली से लौट रहे सभी जमातियों को 14 दिन तक घर में क्वारेंटीन करने की हिदायत जारी की हुई है। दिल्ली में मरकज को खाली कराए जाने के बाद पंजाब के नागरिकों का सही पता नहीं चल रहा था। दिल्ली सरकार द्वारा उनकी शिनाख्त कर राज्य सरकार को लगातार सूचना दी जा रही है।
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इधर, पंजाब सरकार सभी जमातियों के कोरोना संबंधी जांच को गंभीरता से पूरा कर रही है।
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सेहत विभाग ने रविवार को दावा किया कि पंजाब लौटे सभी 350 जमातियों के सैंपल ले लिए गए हैं और इनमें से 117 लोगों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है जबकि 227 लोगों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। इन जमातियों में से अब तक छह लोगों की मौत भी हो चुकी है।
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उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली से लौट रहे सभी जमातियों को 14 दिन तक घर में क्वारेंटीन करने की हिदायत जारी की हुई है। दिल्ली में मरकज को खाली कराए जाने के बाद पंजाब के नागरिकों का सही पता नहीं चल रहा था। दिल्ली सरकार द्वारा उनकी शिनाख्त कर राज्य सरकार को लगातार सूचना दी जा रही है।
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इधर, पंजाब सरकार सभी जमातियों के कोरोना संबंधी जांच को गंभीरता से पूरा कर रही है।
अफवाहें रोकने को सरपंचों का बनाया व्हाट्सएप ग्रुप
निजामुद्दीन मरकज में लोग
कोरोना वायरस के कारण पैदा हुई स्थिति के कारण मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गांवों के लिए ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी हैं। पंजाब के 12,584 गांवों में 3,07,096 लीटर सोडियम हाईपोक्लोराइट का छिड़काव किया गया है। यह कीटाणुनाशक दवा पंजाब एलकलीज एंड कैमिकल्ज लिमिटेड द्वारा खरीदी गई है। अब तक ज्यादातर ग्राम पंचायतों में तीन बार छिड़काव किया जा चुका है।
विभाग के मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने रविवार को बयान में बताया कि गांवों में अफवाहें रोकने और कोविड-19 संबंधी जागरूकता मुहिम चलाने के लिए सभी सरपंचों के व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं। कोरोना वायरस की रोकथाम और ग्राम पंचायतों की कोरोना वायरस को रोकने में निभाई गई भूमिका और गांवों में पहुंचने वाले प्रवासी मजदूरों के प्रबंधन संबंधी निर्देश नियमित तौर पर साझे किए जा रहे हैं। जागरूकता वीडियो और प्रेस न्यूज विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विट्टर द्वारा साझे किए जा रहे हैं।
फेक न्यूज और अफवाहों को रोकने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीणों में किसी भी तरह की घबराहट पैदा न हो। पंचायत मंत्री ने बताया कि विभाग ने गांव स्तर पर वित्तीय सहायता को यकीनी बनाया है। इस संबंध में ग्राम पंचायतों को एक महीने में अधिक से अधिक 50,000 रुपये खर्च करने के अधिकार दिए हैं और ग्राम पंचायतों को गरीब लोगों और खास कर दिहाड़ीदारों को रोजी-रोटी मुहैया करवाने के लिए 5000 रुपये प्रति दिन खर्च करने का अधिकार दिया गया है।
अब तक 1752 ग्राम पंचायतों की ओर से जरूरतमंदों को राशन और दवाएं मुहैया करवाने के लिए कुल 3,16,552 रुपये खर्च किए गए हैं। सरपंचों को इमरजेंसी स्थितियों में कर्फ्यू पास जारी करने के लिए अधिकार दिए गए हैं। किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में सरपंचों को रात के समय (शाम 7 बजे से 6 बजे) के दौरान कर्फ्यू पास जारी करने का अधिकार दिया गया है। मरीज के संपर्क में आने वाले एक सहायक को अलग पास दिया जा रहा है। अब तक ग्राम पंचायतों द्वारा 3910 पास जारी किए जा चुके हैं।
विभाग के मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने रविवार को बयान में बताया कि गांवों में अफवाहें रोकने और कोविड-19 संबंधी जागरूकता मुहिम चलाने के लिए सभी सरपंचों के व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं। कोरोना वायरस की रोकथाम और ग्राम पंचायतों की कोरोना वायरस को रोकने में निभाई गई भूमिका और गांवों में पहुंचने वाले प्रवासी मजदूरों के प्रबंधन संबंधी निर्देश नियमित तौर पर साझे किए जा रहे हैं। जागरूकता वीडियो और प्रेस न्यूज विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विट्टर द्वारा साझे किए जा रहे हैं।
फेक न्यूज और अफवाहों को रोकने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीणों में किसी भी तरह की घबराहट पैदा न हो। पंचायत मंत्री ने बताया कि विभाग ने गांव स्तर पर वित्तीय सहायता को यकीनी बनाया है। इस संबंध में ग्राम पंचायतों को एक महीने में अधिक से अधिक 50,000 रुपये खर्च करने के अधिकार दिए हैं और ग्राम पंचायतों को गरीब लोगों और खास कर दिहाड़ीदारों को रोजी-रोटी मुहैया करवाने के लिए 5000 रुपये प्रति दिन खर्च करने का अधिकार दिया गया है।
अब तक 1752 ग्राम पंचायतों की ओर से जरूरतमंदों को राशन और दवाएं मुहैया करवाने के लिए कुल 3,16,552 रुपये खर्च किए गए हैं। सरपंचों को इमरजेंसी स्थितियों में कर्फ्यू पास जारी करने के लिए अधिकार दिए गए हैं। किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में सरपंचों को रात के समय (शाम 7 बजे से 6 बजे) के दौरान कर्फ्यू पास जारी करने का अधिकार दिया गया है। मरीज के संपर्क में आने वाले एक सहायक को अलग पास दिया जा रहा है। अब तक ग्राम पंचायतों द्वारा 3910 पास जारी किए जा चुके हैं।
कोरोना से लड़ रहे पुलिस जवानों के लिए विशेष अवार्ड शुरू
कोविड-19 के विरुद्ध जंग में अगली कतार में लड़ रहे पुलिस मुलाजिमों को सम्मानित करने और उनका उत्साह बढ़ाने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने डीजीपी को मौजूदा संकट में विलक्षण काम करने वाले पुलिस जवानों के लिए नया अवॉर्ड शुरू करने के लिए अधिकृत किया है।
डीजीपी दिनकर गुप्ता ने बताया कि समाज के प्रति ‘शानदार सेवा निभाने के लिए डीजीपी के मान और सम्मान’ के लिए पहले दो मुलाजिमों में मोगा के एएसआई (एलआर) बिकर सिंह और कांस्टेबल सुखजिंदर पाल सिंह को चुना गया है।
इन दोनों पुलिस जवानों ने दो दिन पहले धर्मकोट की एक गर्भवती महिला को देर रात बहुत से अस्पतालों द्वारा दाखिल करने से इंकार कर देने पर बच्चे को जन्म देने में उसकी मदद की थी। इसके अलावा डीजीपी ने अमृतसर के कोट खालसा के इंस्पेक्टर एसएचओ संजीव कुमार को तीसरे अवॉर्ड के लिए चुना, जो सेवा की भावना से गरीब और भूखे लोगों को भोजन खिला रहे हैं।
डीजीपी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने मौजूदा लॉकडाउन के दौरान राज्य में लोगों की सहायता के लिए पंजाब पुलिस द्वारा किये जा रहे कामों को लेकर यह अवॉर्ड शुरू करने का फैसला किया गया है। पंजाब में रविवार को कर्फ्यू का 14वां दिन था। लगभग 50,000 पुलिस जवान गरीब, बेसहारों, बेरोजगारों और बेघरों की सहायता के लिए मैदान में उतरे हुए हैं और कई जगह तो वह अपनी जेब से भी खर्चा कर रहे हैं।
इस कठिन समय में पुलिस मुलाजिमों द्वारा साझे और व्यक्तिगत रूप में दिहाड़ीदारों और प्रवासी मजदूरों, जिनके पास भोजन या रहने के लिए कोई पैसा भी नहीं है, के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं।
डीजीपी दिनकर गुप्ता ने बताया कि समाज के प्रति ‘शानदार सेवा निभाने के लिए डीजीपी के मान और सम्मान’ के लिए पहले दो मुलाजिमों में मोगा के एएसआई (एलआर) बिकर सिंह और कांस्टेबल सुखजिंदर पाल सिंह को चुना गया है।
इन दोनों पुलिस जवानों ने दो दिन पहले धर्मकोट की एक गर्भवती महिला को देर रात बहुत से अस्पतालों द्वारा दाखिल करने से इंकार कर देने पर बच्चे को जन्म देने में उसकी मदद की थी। इसके अलावा डीजीपी ने अमृतसर के कोट खालसा के इंस्पेक्टर एसएचओ संजीव कुमार को तीसरे अवॉर्ड के लिए चुना, जो सेवा की भावना से गरीब और भूखे लोगों को भोजन खिला रहे हैं।
डीजीपी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने मौजूदा लॉकडाउन के दौरान राज्य में लोगों की सहायता के लिए पंजाब पुलिस द्वारा किये जा रहे कामों को लेकर यह अवॉर्ड शुरू करने का फैसला किया गया है। पंजाब में रविवार को कर्फ्यू का 14वां दिन था। लगभग 50,000 पुलिस जवान गरीब, बेसहारों, बेरोजगारों और बेघरों की सहायता के लिए मैदान में उतरे हुए हैं और कई जगह तो वह अपनी जेब से भी खर्चा कर रहे हैं।
इस कठिन समय में पुलिस मुलाजिमों द्वारा साझे और व्यक्तिगत रूप में दिहाड़ीदारों और प्रवासी मजदूरों, जिनके पास भोजन या रहने के लिए कोई पैसा भी नहीं है, के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं।