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हरियाणा सरकार का फरमान- अभिभावकों के संपर्क में रहेंगे मेंटर्स और फोन करके लेगें प्रतिक्रियाएं
Fri, 01 May 2020 12:17 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 01 May 2020 12:17 PM IST
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फाइल फोटो
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हरियाणा शिक्षा विभाग घर से पढ़ाओ अभियान को और प्रभावशाली बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। कई जिलों में तो शिक्षा अधिकारियों ने इसके लिए अपने स्तर पर भी बेहतर प्रयास किए हैं। इतना ही नहीं इस अभियान का फीडबैक लेने के लिए शिक्षा विभाग के मेंटर्स भी अभिभावकों से संपर्क कर रहे हैं। बताते चलें कि हरियाणा में लॉकडाउन की वजह से सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद पड़े हैं। लिहाजा छात्रों को व्हाट्सएप के जरिए ही पढ़ाई करवाई जा रही है।
निजी स्कूलों द्वारा अपनाई गई इस व्यवस्था के बाद सरकारी स्कूलों में भी इस व्यवस्था को एक अभियान के जरिए लागू कर दिया गया है। अब इस व्यवस्था को और कैसे बेहतर बनाया जाए। ताकि घरों में बैठे छात्रों में शिक्षा का माहौल बना रहे और वे दिन के कुछ घंटे पढ़ाई में व्यस्त रहें इसके लिए शिक्षा विभाग विभिन्न प्रयोगों में भी जुटा हुआ है।
प्राथमिक शिक्षा के निदेशक प्रदीप डागर ने ‘घर से पढ़ाओ’ अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि यदि लॉकडाउन अवधि के दौरान शिक्षक नियमित रूप से विद्यार्थियों के संपर्क में रहेंगे तो यह उन्हें नियमित रूप से अध्ययन करने के लिए प्रेरित करेगा। उनके अनुसार शिक्षक वॉट्सएप के माध्यम से 6.7 लाख से अधिक विद्यार्थियों से सम्पर्क में हैं और 50 हजार से अधिक शिक्षक इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। जबकि 80 प्रतिशत शिक्षकों ने व्हाट्सएप पर सामग्री भेजी है।
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प्रतिक्रियाएं प्राप्त करने के लिए 1,800 मेंटर्स हर हफ्ते औसतन 15 अभिभावकों से फोन पर सम्पर्क कर रहे हैं। ‘घर से पढ़ाओ’ अभियान के तहत, सिरसा और जींद में शिक्षकों ने अच्छे प्रदर्शन के लिए विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को प्रशंसा प्रमाण पत्र जारी करना शुरू कर दिया है। जबकि कैथल में व्हाट्सएप ग्रुप पर कड़ी मेहनत को बढ़ावा देने और प्रेरित करने के लिए प्रत्येक दिन ‘स्टार स्टूडेंटस’ के बारे बताया जाता है। झज्जर में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए जांच करने के उपरांत प्रत्येक विद्यार्थी के होमवर्क को सार्वजनिक रूप से सांझा किया जाता है।
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निजी स्कूलों द्वारा अपनाई गई इस व्यवस्था के बाद सरकारी स्कूलों में भी इस व्यवस्था को एक अभियान के जरिए लागू कर दिया गया है। अब इस व्यवस्था को और कैसे बेहतर बनाया जाए। ताकि घरों में बैठे छात्रों में शिक्षा का माहौल बना रहे और वे दिन के कुछ घंटे पढ़ाई में व्यस्त रहें इसके लिए शिक्षा विभाग विभिन्न प्रयोगों में भी जुटा हुआ है।
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प्राथमिक शिक्षा के निदेशक प्रदीप डागर ने ‘घर से पढ़ाओ’ अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि यदि लॉकडाउन अवधि के दौरान शिक्षक नियमित रूप से विद्यार्थियों के संपर्क में रहेंगे तो यह उन्हें नियमित रूप से अध्ययन करने के लिए प्रेरित करेगा। उनके अनुसार शिक्षक वॉट्सएप के माध्यम से 6.7 लाख से अधिक विद्यार्थियों से सम्पर्क में हैं और 50 हजार से अधिक शिक्षक इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। जबकि 80 प्रतिशत शिक्षकों ने व्हाट्सएप पर सामग्री भेजी है।
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प्रतिक्रियाएं प्राप्त करने के लिए 1,800 मेंटर्स हर हफ्ते औसतन 15 अभिभावकों से फोन पर सम्पर्क कर रहे हैं। ‘घर से पढ़ाओ’ अभियान के तहत, सिरसा और जींद में शिक्षकों ने अच्छे प्रदर्शन के लिए विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को प्रशंसा प्रमाण पत्र जारी करना शुरू कर दिया है। जबकि कैथल में व्हाट्सएप ग्रुप पर कड़ी मेहनत को बढ़ावा देने और प्रेरित करने के लिए प्रत्येक दिन ‘स्टार स्टूडेंटस’ के बारे बताया जाता है। झज्जर में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए जांच करने के उपरांत प्रत्येक विद्यार्थी के होमवर्क को सार्वजनिक रूप से सांझा किया जाता है।