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#Ladengecoronase: नर्सिंग इंचार्ज परमिंदरजीत दे रहीं 12 घंटे ड्यूटी, बच्चे कहते- मम्मी मत जाओ
Tue, 31 Mar 2020 11:30 AM IST
खुशबू गोयल
वीणा तिवारी, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 31 Mar 2020 11:30 AM IST
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नर्सिंग इंचार्ज परमिंदरजीत
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना जानलेवा महामारी बनती जा रही है, लेकिन देश के डॉक्टर और नर्स इस मुसीबत के समय में भी अस्पतालों में डटे हैं और अपना फर्ज निभा रहे हैं। मां आप हमारी बात क्यों नहीं मानतीं। आखिर आप ही कोरोना पॉजिटिव मरीजों के वार्ड में ड्यूटी क्यों करेंगी, बाकी नर्सिंग स्टाफ भी तो है।
मेरा जवाब यही होता है कि सीनियर होने के नाते मेरी जिम्मेदारी बाकियों से ज्यादा है। जहां तक कोरोना की बात है तो रब सबकी रक्षा करेगा। यह कहना है सेक्टर 16 स्थित गवर्नमेंट मल्टी स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में कार्यरत परमिंदरजीत का। परमिंदर दो हफ्ते से लगातार अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में 12 घंटे ड्यूटी कर रही हैं। परमिंदरजीत के पति सरकारी नौकरी करते हैं। वो उनका घर संभालने में सहयोग कर रहे हैं।
नर्सिंग के शपथ से मिलती है ताकत
परमिंदरजीत का कहना है कि जब कभी ड्यूटी के दौरान खुद को कमजोर महसूस करती हूं नर्सिंग की पढ़ाई के दौरान ली गई शपथ को याद कर लेती हूं, जिसमें मानव सेवा के लिए खुद को समर्पित करने की सीख दी गई है। मैं खुद के साथ ही अन्य स्टाफ को भी उसके बारे में बताकर उनका मनोबल बढ़ाने का प्रयास करती हूं। इस समय मेरे साथ 7 अन्य नर्सिंग स्टाफ भी आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी कर रहे हैं। फर्क इतना है कि मेरे वार्ड में सिर्फ पॉजिटिव मरीजों को ही रखा जा रहा है जबकि अन्य वार्ड में संदिग्ध मरीज भर्ती किए गए हैं।
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मेरा जवाब यही होता है कि सीनियर होने के नाते मेरी जिम्मेदारी बाकियों से ज्यादा है। जहां तक कोरोना की बात है तो रब सबकी रक्षा करेगा। यह कहना है सेक्टर 16 स्थित गवर्नमेंट मल्टी स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में कार्यरत परमिंदरजीत का। परमिंदर दो हफ्ते से लगातार अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में 12 घंटे ड्यूटी कर रही हैं। परमिंदरजीत के पति सरकारी नौकरी करते हैं। वो उनका घर संभालने में सहयोग कर रहे हैं।
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नर्सिंग के शपथ से मिलती है ताकत
परमिंदरजीत का कहना है कि जब कभी ड्यूटी के दौरान खुद को कमजोर महसूस करती हूं नर्सिंग की पढ़ाई के दौरान ली गई शपथ को याद कर लेती हूं, जिसमें मानव सेवा के लिए खुद को समर्पित करने की सीख दी गई है। मैं खुद के साथ ही अन्य स्टाफ को भी उसके बारे में बताकर उनका मनोबल बढ़ाने का प्रयास करती हूं। इस समय मेरे साथ 7 अन्य नर्सिंग स्टाफ भी आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी कर रहे हैं। फर्क इतना है कि मेरे वार्ड में सिर्फ पॉजिटिव मरीजों को ही रखा जा रहा है जबकि अन्य वार्ड में संदिग्ध मरीज भर्ती किए गए हैं।
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6 के बजाय 12 घंटे ड्यूटी
कोरोना के कारण सबका घर से बाहर आना जाना बंद है। कामवाली को भी छुट्टी दे दी गई है। ऐसे में घर और अस्पताल दोनों जगह अपना फर्ज निभाना पड़ रहा है। परमिंदरजीत ने बताया कि ड्यूटी पर समय से पहुंचने के लिए सुबह 4 बजे उठती हूं। घर का सारा काम पूरा कर हॉस्पिटल पहुंचती हूं। अपने वार्ड में जाने से पहले वहां अन्य नर्सिंग स्टाफ की चेकिंग और उनकी काउंसलिंग करनी होती है।
पहली बार देखी ऐसी महामारी
परमिंदरजीत ने बताया कि 24 साल के नर्सिंग के करिअर में ऐसी महामारी पहली बार फैली है। इसलिए इसमें हर तरह से अपना बेस्ट देने का प्रयास कर रही हूं। मेरी ड्यूटी में मेरे उच्चाधिकारी पूरा सहयोग कर रहे हैं।
पहली बार देखी ऐसी महामारी
परमिंदरजीत ने बताया कि 24 साल के नर्सिंग के करिअर में ऐसी महामारी पहली बार फैली है। इसलिए इसमें हर तरह से अपना बेस्ट देने का प्रयास कर रही हूं। मेरी ड्यूटी में मेरे उच्चाधिकारी पूरा सहयोग कर रहे हैं।