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इंफेक्शन के डर के बिना होगा डेंटल ट्रीटमेंट, सीएसआईओ ने बनाया डिवाइस, पीजीआई ने दिया साथ
Thu, 30 Apr 2020 01:45 PM IST
खुशबू गोयल
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 30 Apr 2020 01:45 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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सीएसआईआर-सीएसआईओ चंडीगढ़ ने डेंटल क्लीनिक में कोविड-19 और अन्य प्रकार के इंफेक्शन को रोकने के लिए डिवाइस बनाई है। सीएसआईओ ने डिवाइस एरोसोल रिस्ट्रक्टिंग कैनोपाए को पीजीआई के ओरल हेल्थ साइंसेज सेंटर (ओआरएचसी) के साथ मिलकर बनाया है। यह टेक्नोलॉजी बुधवार को चंडीगढ़ के एम/एस निगम साइंटिफिक वर्क्स को ट्रांसफर की गई।
इसके लिए समझौता ज्ञापन पर निगम साइंटिफिक वर्क्स के डायरेक्टर मनीष निगम और सीएसआईआर के बिजनेस इनिशिएटिव के हेड डॉ. सुरिंदर सिंह ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर सीएसआईआर के डायरेक्टर डॉ. संजय कुमार, डॉ. विनोद, डॉ. दिनेश पंकज, डॉ. संजीव वर्मा और डॉ. नीलेश कुमार उपस्थित रहे। मनीष निगम ने बताया कि जल्द ही बड़ी संख्या में डिवाइस का निर्माण कर इसे उपयोग के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा।
सोशल मीडिया के जरिए किया एग्रीमेंट
सीएसआईओ के डॉ. विनोद करर ने बताया कि एरोसोल रिस्ट्रक्टिंग कैनोपाए डॉक्टर और मरीज के बीच शील्ड की तरह काम करेगा। इसमें मरीज का जरूरतनुसार एरिया एआरसी के जरिए ढका रहेगा। इसके साथ ही डॉक्टर भी आसानी से हाथ घुमाकर सर्जरी इत्यादि कर सकेंगे। एग्रीमेंट को सोशल डिस्टेंसिंग बनाते हुए सोशल मीडिया के जरिए ही किया गया है।
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डिस्पोजेबल शीट एक-दूसरे मरीज में इंफेक्शन फैलने को रोकेगी
डायरेक्टर डॉ. संजय ने बताया कि वर्तमान में इलाज के दौरान फेस मास्क और फेस शील्ड का उपयोग किया जा रहा था। उन्होंने बताया सेफ्टी एआरसी को डॉक्टर अपने हिसाब की ऊंचाई और दिशा में फिक्स कर सकता है। इस सिस्टम में स्लाइडिंग विंडो इस्तेमाल की गई है, जिसमें डिस्पोजेबल शीट का उपयोग किया गया है। जिससे संक्रमण एक मरीज से दूसरे मरीज में फैलने से रोका जा सके।
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इसके लिए समझौता ज्ञापन पर निगम साइंटिफिक वर्क्स के डायरेक्टर मनीष निगम और सीएसआईआर के बिजनेस इनिशिएटिव के हेड डॉ. सुरिंदर सिंह ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर सीएसआईआर के डायरेक्टर डॉ. संजय कुमार, डॉ. विनोद, डॉ. दिनेश पंकज, डॉ. संजीव वर्मा और डॉ. नीलेश कुमार उपस्थित रहे। मनीष निगम ने बताया कि जल्द ही बड़ी संख्या में डिवाइस का निर्माण कर इसे उपयोग के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा।
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सोशल मीडिया के जरिए किया एग्रीमेंट
सीएसआईओ के डॉ. विनोद करर ने बताया कि एरोसोल रिस्ट्रक्टिंग कैनोपाए डॉक्टर और मरीज के बीच शील्ड की तरह काम करेगा। इसमें मरीज का जरूरतनुसार एरिया एआरसी के जरिए ढका रहेगा। इसके साथ ही डॉक्टर भी आसानी से हाथ घुमाकर सर्जरी इत्यादि कर सकेंगे। एग्रीमेंट को सोशल डिस्टेंसिंग बनाते हुए सोशल मीडिया के जरिए ही किया गया है।
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डिस्पोजेबल शीट एक-दूसरे मरीज में इंफेक्शन फैलने को रोकेगी
डायरेक्टर डॉ. संजय ने बताया कि वर्तमान में इलाज के दौरान फेस मास्क और फेस शील्ड का उपयोग किया जा रहा था। उन्होंने बताया सेफ्टी एआरसी को डॉक्टर अपने हिसाब की ऊंचाई और दिशा में फिक्स कर सकता है। इस सिस्टम में स्लाइडिंग विंडो इस्तेमाल की गई है, जिसमें डिस्पोजेबल शीट का उपयोग किया गया है। जिससे संक्रमण एक मरीज से दूसरे मरीज में फैलने से रोका जा सके।
ओरल सर्जरी के दौरान क्लिनिक में नहीं फैलेगा इंफेक्शन
सीएसआईओ के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. संजीव वर्मा ने बताया कि पहले पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) का इंफेक्शन से बचाव के लिए उपयोग किया जा रहा था। डेंटल और ओरल सर्जरी प्रक्रिया के दौरान ड्रिल और अल्ट्रासोनिक डिवाइस का उपयोग किया जाता है। इस दौरान एरोसोल रिलीज होता है, जो क्लिनिक में इंफेक्शन फैलने का मुख्य कारण है।
पीपीई के माध्यम से सिर्फ मरीज से डॉक्टर को इंफेक्शन नहीं होने तक ही रोका जा सकता है, लेकिन डेंटल एरोसोल 30 फीट तक फैल सकता है, इसमें दूषित कारक सम्मिलित होते हैं जो क्लिनिक के वातावरण में कोविड-19 के साथ अन्य कई प्रकार के इंफेक्शन को फैलने में सहायक होते हैं।
ये दूषित जीवाणु हवा और सतह पर लंबे समय तक बने रहते हैं, जिनकी सांस और खाने के साथ शरीर में जाने की संभावना बनी रहती है। डेंटल प्रक्रिया में बैक्टरिया 20 गुना अधिक फैल सकते हैं। यह प्रोटोटाइप पीजीआई के ओआरएचसी के साथ मिलकर टेस्ट किया गया है। डॉक्टरों ने इसे कोविड-19 और अन्य इंफेक्शन को रोकने में सफल बताया है।
पीपीई के माध्यम से सिर्फ मरीज से डॉक्टर को इंफेक्शन नहीं होने तक ही रोका जा सकता है, लेकिन डेंटल एरोसोल 30 फीट तक फैल सकता है, इसमें दूषित कारक सम्मिलित होते हैं जो क्लिनिक के वातावरण में कोविड-19 के साथ अन्य कई प्रकार के इंफेक्शन को फैलने में सहायक होते हैं।
ये दूषित जीवाणु हवा और सतह पर लंबे समय तक बने रहते हैं, जिनकी सांस और खाने के साथ शरीर में जाने की संभावना बनी रहती है। डेंटल प्रक्रिया में बैक्टरिया 20 गुना अधिक फैल सकते हैं। यह प्रोटोटाइप पीजीआई के ओआरएचसी के साथ मिलकर टेस्ट किया गया है। डॉक्टरों ने इसे कोविड-19 और अन्य इंफेक्शन को रोकने में सफल बताया है।