Haryana: जानें अब किस जोन में मिलेगी कितनी छूट, ऑरेंज और ग्रीन जोन में क्या-क्या खुलेगा
- रेड जोन में अधिकांश बंदिशें बरकरार रहेंगी
- लॉकडाउन के तीसरे चरण में सरकार कारोबारी गतिविधियों में ढील देगी
- सोशल डिस्टेंसिंग प्रोटोकॉल का पालन करवाना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी होगी
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लॉकडाउन के तीसरे चरण में हरियाणा सरकार रेड ऑरेंज और ग्रीन जोन के लिहाज से विभिन्न बंदिशों में कुछ हद तक ढील देगी। इसके लिए सरकार ने तैयारी कर ली है। सभी जिलों के उपायुक्तों पर सरकार द्वारा दी जाने वाली ढील के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि ने कहा कि 17 मई तक चलने वाले लॉकडाउन-3.0 अवधि के दौरान भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए लोग सरकार का सहयोग करेंगे और ऐसी उनको हरियाणा की जनता से उम्मीद भी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बताई गई दो गज दूरी बनाए रखने के बारे में ध्यान रखना है।
उन्होंने कहा कि लॉकडाउन-3.0 के दौरान ग्रीन, ऑरेंज व रेड जोन तीन क्षेत्रों में जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन के सहयोग से व केंद्र सरकार की हिदायतों के अनुसार औद्योगिक व आर्थिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
- ग्रीन जोन में हरियाणा परिवहन की बसों को सवारियों की कुल क्षमता के 50 प्रतिशत के साथ चलाने की अनुमति दी जाएगी। स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर, मॉल, सिनेमा घर, जिम, धार्मिक स्थान बंद रहेंगे। बाकी सब बाजार व दुकानें खोली जाएंगी और इनमें सोशल डिस्टेंसिंग की पालना जरूरी होगी।
- ऑरेंज जोन में केवल बसों को चलाने की अनुमति नहीं होगी। बाकी ग्रीन जोन वाली सभी गतिविधियां संचालित होंगी।
- रेड जोन में नाई, स्पा-सैलून, ऑटो, टैक्सी इत्यादि के संचालन पर प्रतिबंध रहेगा। आवागमन की गतिविधयां प्रतिबंधित रहेंगी। कंटेनमेंट जोन में केवल आवश्यक वस्तुओं व सेवाओं की ही अनुमति होगी।
बच्चे और बुजुर्ग घर से बाहर नहीं निकलेंगे
सभी जोन में 10 वर्ष से कम आयु के बच्चे व 65 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों को घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही, सांय 7 बजे से प्रातः 7 बजे तक भी किसी को भी जरूरी काम के अलावा घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी।
2 महीनों में सरकार को 10 हजार करोड़ से ज्यादा नुकसान
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक गतिविधियां रुकने के कारण पिछले दो महीने से राजस्व प्राप्तियां न के बराबर रही हैं और कर्मचारियों को वेतन, पेंशन व सरकार के अन्य खर्चों के लिए हर माह लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल को मंत्रिमंडल बैठक में हमने आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए कुछ निर्णय लिए है, इससे लगभग 70 से 80 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। उनके अनुसार सरकार के नाते हम तो जनता के ट्रस्टी के रूप में कार्य कर रहे हैं, सरकार के इस निर्णय से जो भी राजस्व संग्रहण होगा वो भी जनता के हित में जनता के लिए ही खर्च किया जाएगा।
सरकार छह महीने तक ऋण के ब्याज पर लाभ देगी
सीएम के अनुसार इसी प्रकार मंत्रिमंडल ने लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योगों के श्रमिकों को वेतन का भुगतान समय पर हो सके, इसके लिए उद्यमियों को बैंक से ऋण की सुविधा दी है और सरकार 6 महीने तक ऋण के ब्याज पर लाभ देगी। इससे लगभग 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार सरकार पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक एवं औद्योगिक बिजली कनेक्शनों पर स्थाई शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट तथा शेष 75 प्रतिशत राशि दिसंबर, 2020 तक भुगतान करने की छूट दी है। इसी प्रकार, जरूरतमंदों को 1000 रुपये प्रत्येक सप्ताह भेजे गए हैं। इस प्रकार लगभग 15 लाख लोगों को यह मदद पहुंची है। इसी प्रकार, जिन जरूरतमंदों के पास राशन कार्ड नहीं है, उनको भी 30 जून तक निःशुल्क डिस्ट्रेस राशन दिया जा रहा है।
अपने घर न जाकर रोजगार पर लौटें मजदूर
मुख्यमंत्री ने प्रवासी मजदूरों से अपील की है कि पिछले दो महीने से भले ही उनको घर की याद सता रही हो, परंतु अब औद्योगिक गतिविधियां शुरू होने से उनके स्थाई रोजगार के साधन पुन: जुट जाएंगे, इसलिए वे अपने प्रदेशों में न जाकर काम पर लौटें। सरकार की ओर से हर प्रकार का सहयोग दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के तीर्थयात्री व पर्यटक जो लॉकडाउन के कारण हरियाणा में फंस गए हैं, उनको उनके मूल राज्य में पहुंचाने के लिए प्रबंध किए जाएंगे। हरियाणा के लोग भी जो बाहर के प्रदेशों में हैं, उन्हें वापस लाने के लिए सरकार प्रबंध कर रही है, इसके लिए जिला प्रशासन को ऐसे सभी लोगों की जानकारियां जुटाने के लिए कहा गया है।
गेहूं के लिए 283 करोड़ का भुगतान
मुख्यमंत्री ने लोगों को अवगत कराया कि 15 अप्रैल से सरसों व 20 अप्रैल से गेहूं की सुचारु खरीद की जा रही है तथा अब तक 4.02 लाख मीट्रिक टन सरसों तथा 44 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई है, जो गेहूं की कुल पैदावार का 60 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने कहा कि किसानों को खरीद के साथ-साथ ही भुगतान किया जा रहा है। अब तक सरसों के लिए 450 करोड़ रुपये और गेहूं के लिए 283 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है।