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कोरोना इफेक्ट: पांच महीने से नहीं हो रहे धार्मिक समागम, सब्जी बेचने को मजबूर हुए भजन गायक
Sat, 18 Jul 2020 03:01 PM IST
खुशबू गोयल
राजीव शर्मा, कोटकपूरा(फरीदकोट)
राजीव शर्मा, कोटकपूरा(फरीदकोट)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 18 Jul 2020 03:01 PM IST
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भजन गायक राकेश सचदेवा
- फोटो : अमर उजाला
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देश में कोरोना महामारी के चलते धार्मिक समागमों पर भी पाबंदी है। लगातार पांच महीने से कोई भी धार्मिक समागम नहीं हुआ। इससे धार्मिक समागमों, भजन संध्या व जागरण आदि में गाने वाले भजन गायकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे ही एक भजन गायक कोटकपूरा निवासी राकेश सचदेवा हैं, जिनकी धार्मिक क्षेत्र में काफी पहचान थी।
फरीदकोट में ही नहीं वह पंजाब समेत पड़ोसी राज्यों हरियाणा, हिमाचल और दिल्ली में भी प्रोग्राम दे चुके हैं। ठप हुए धार्मिक समागमों के कारण इन दिनों वह परिवार पालने के लिए सब्जी बेचने को मजबूर हैं। भजन गायक राकेश सचदेवा ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय श्याम लाल सचदेवा भी भजन मंडली के प्रधान थे जिनके साथ रहकर उन्हें भजन गायकी का शौक हुआ।
11 साल की उम्र से ही गायकी शुरू कर दी। लोगों ने प्यार दिया तो इसे प्रोफेशन ही बना लिया। अब लॉक डाउन के बाद से सरकार द्वारा लगाई गई धार्मिक समागमों पर पाबंदी के बाद उनका काम बिल्कुल बंद है। इसके अलावा वह पार्ट टाइम कोटकपूरा में एक निजी स्कूल के पास फास्टफूड का भी काम करते थे लेकिन स्कूल बंद होने के कारण वह काम भी ठप है।
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भूखे मरने की नौबत आ गई, जिसके बाद मजबूरी में उन्हें सब्जी बेचने का काम करना पड़ा। उन्होंने सरकार से हिदायतों के तहत धार्मिक समागम आयोजित करने की इजाजत देने की मांग की है।
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फरीदकोट में ही नहीं वह पंजाब समेत पड़ोसी राज्यों हरियाणा, हिमाचल और दिल्ली में भी प्रोग्राम दे चुके हैं। ठप हुए धार्मिक समागमों के कारण इन दिनों वह परिवार पालने के लिए सब्जी बेचने को मजबूर हैं। भजन गायक राकेश सचदेवा ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय श्याम लाल सचदेवा भी भजन मंडली के प्रधान थे जिनके साथ रहकर उन्हें भजन गायकी का शौक हुआ।
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11 साल की उम्र से ही गायकी शुरू कर दी। लोगों ने प्यार दिया तो इसे प्रोफेशन ही बना लिया। अब लॉक डाउन के बाद से सरकार द्वारा लगाई गई धार्मिक समागमों पर पाबंदी के बाद उनका काम बिल्कुल बंद है। इसके अलावा वह पार्ट टाइम कोटकपूरा में एक निजी स्कूल के पास फास्टफूड का भी काम करते थे लेकिन स्कूल बंद होने के कारण वह काम भी ठप है।
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भूखे मरने की नौबत आ गई, जिसके बाद मजबूरी में उन्हें सब्जी बेचने का काम करना पड़ा। उन्होंने सरकार से हिदायतों के तहत धार्मिक समागम आयोजित करने की इजाजत देने की मांग की है।