साढ़े नौ लाख मजदूर घरों को लौटने को तैयार, अगर नहीं हुई वापसी तो पंजाब में उद्योग वेंटिलेटर पर होंगे
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पंजाब से करीब साढ़े नौ लाख श्रमिक अपने गृह जिलों में रवाना होने के लिए लगभग तैयार हैं। इसके साथ ही यह निश्चित है कि अगर यह श्रमिक जून जुलाई में न लौटे तो पंजाब के उद्योग वेंटिलेटर पर लग जाएंगे और उनको बचाने का कोई रास्ता पंजाब सरकार के पास नहीं होगा। पंजाब में लगभग 2.5 लाख इंडस्ट्री है, जिसमें करीब 12 लाख लोग काम करते हैं। यह वे श्रमिक हैं, जो पंजीकृत हैं।
मार्च से अभी तक तकरीबन 50 हजार श्रमिक अपने स्तर पर पलायन कर चुके हैं, जबकि 9 लाख 43 हजार 051 जाने के लिए तैयार हैं और उनको वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इनमें से 50 फीसदी श्रमिक उत्तर प्रदेश के हैं। दूसरे नंबर पर बिहार के मजदूर हैं। इनमें अधिकतर सरकारी किताबों में नहीं है। वह या तो ठेकेदारों के पास काम करते हैं या फिर अभी कच्चे हैं। इस आंकड़े ने राज्य सरकार को तो चौंकाया ही साथ ही औद्योगिक जगत की भी नींद उड़ा दी है।
पंजाब में इंडस्ट्री खोलने की सशर्त छूट दी गई है लेकिन इंडस्ट्री के सामने दिक्कत श्रमिकों की है। लॉकडाउन के कारण या तो मजदूर अपने गृह राज्यों को लौट गए हैं या अब लौटने की तैयारी कर रहे हैं। पंजाब से असम, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, भूटान और अन्य नजदीकी देशों को सड़क और रेल मार्ग के जरिए हौजरी, कपड़ा, साइकिल और साइकिल के पुर्जों, मशीनरी टूल्स, नट-बोल्ट, खराद, सिलाई मशीनें व इनके कलपुर्जे तथा विभिन्न अन्य किस्म के उत्पाद भेजे जाते हैं।
उद्योगों को लगातार झटका
उद्योग की बदकिस्मती यह है कि उनको पहले नोटबंदी, जीएसटी और फिर जम्मू-कश्मीर में धारा 370 के निरस्त होने के बाद बंद हुए व्यापार और फिर नागरिकता संशोधन कानून ने बेजार कर दिया था। अभी वह उस झटके से उबर भी नहीं पाए थे कि कोरोना के कारण हुए लॉकडाऊन ने सदमा दे दिया। अभी केंद्र की उद्योगों को खोलने पर सहमति मिली ही थी कि श्रमिकों के घर वापसी अभियान ने फिर जोर का झटका दे दिया।
लुधियाना में सबसे अधिक
लुधियाना से एक लाख 95 हजार 273 श्रमिकों ने वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है, जबकि उनके साथियों सहित मिलाकर संख्या 5 लाख 17 हजार 813 है। इनमें यूपी के 3 लाख 06 हजार 122 लोग हैं। जबकि बिहार के एक लाख 90,599। वहीं जालंधर से 36 हजार 584 श्रमिकों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है, जिनकी साथियों के साथ संख्या एक लाख 3 हजार 606 है। इनमें यूपी के 49 हजार 686 लोग हैं, जबकि बिहार के 40,713।
श्रमिक वापस आएंगे, समय लगेगा तो ही बचेगा उद्योग
हैंड टूल निर्यातक एसोसिएशन के प्रधान गुरशरण सिंह का कहना है कि पंजाब से वापस जाने वाले श्रमिक वापस आएंगे, अभी समय लगेगा। पंजाब में इंडस्ट्री है, यहां के लोग मददगार हैं। जाने वाले श्रमिक परिवार से मिलना चाहते थे। अगर जा रहे हैं तो वापस आने का आश्वासन भी देकर जा रहे हैं। इंडस्ट्री का तो वैसे ही बुरा हाल है और झटके लगातार लग रहे थे। केंद्र सरकार को इंडस्ट्री को राहत पैकेज तो देना चाहिए।
पंजाब में इंडस्ट्री नए रूप में दिखेगी
आयकर विभाग के प्रसिद्ध वकील व इंडस्ट्री फाइनेंस के एक्सपर्ट दिनेश सरना का कहना है कि इंडस्ट्री आने वाले दिनों में नए रूप में दिखेगी तभी बचेगी। लॉकडाऊन कितना समय चलेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। अभी देश में कोरोना का ग्राफ बढ़ रहा है, कम नहीं हो रहा है। ऐसे में अगर श्रमिक जल्दी वापस नहीं आते तो इंडस्ट्री को चलाने के लिए नई मशीनरी लेनी पड़ेगी, ताकि आटोमैटिक काम हो। वैसे आने वाला समय इंडस्ट्री के लिए खतरनाक है।
चार्ट पूरे पंजाब का, कौन से जिले से कितने प्रवासी वापसी के लिए तैयार...
अमृतसर. 54,666
बरनाला 4064
बठिंडा 19,841
फरीदकोट 2371
फतेहगढ़ साहिब 24,982
फाजिल्का 5628
फिरोजपुर 3920
गुरदासपुर 8780
होशियारपुर 18,347
जालंधर 1,03,606
कपूरथला 16,743
लुधियाना 5,17,813
मानसा 3732
मोगा 5646
पठानकोट 9435
पटियाला 32058
रूपनगर 8855
मोहाली 80,315
संगरूर 9146
नवांशहर 5515
श्री मुक्तसर साहब 4135
तरनतारन 3453