फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Corona warrior Rajneesh Sharma played important role during Pandenic

चंडीगढ़: बड़ी बहन ने बढ़ाया हौसला, नौकरी के पांच महीने बाद ही कोरोना से जंग में उतरी वॉरियर

Thu, 23 Jul 2020 03:40 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 23 Jul 2020 03:40 PM IST
सार

  • जीएमएसएच-16 की नर्सिंग ऑफिसर रजनीश शर्मा चार माह से दे रहीं कोविड वार्ड में ड्यूटी
  • नौकरी ज्वाइन करने के पांच महीने बाद ही कोरोना के रूप में सामने आई बड़ी चुनौती
  • बड़ी बहन से मिले प्यार और हिम्मत ने आसान कर दी मुश्किल, चुनौतियों से आगे निकला साहस

विज्ञापन
Corona warrior Rajneesh Sharma played important role during Pandenic
पिता हरकेश चंद और बहन गुरप्रीत के साथ रजनीश शर्मा (बीच में) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीएमएसएच-16 की नर्सिंग ऑफिसर रजनीश शर्मा की जिंदगी पिछले 4 महीनों में पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने नवंबर 2019 में बड़े उत्साह के साथ नर्सिंग की जॉब शुरू की थी लेकिन महज 5 महीने बाद ही सामने कोरोना चुनौती बनकर खड़ा हो गया। 25 साल की रजनीश ने कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी से टक्कर लेने की ठानी। इस जंग में बड़ी बहन गुरप्रीत शर्मा ने हर कदम साथ दिया। 

विज्ञापन


रजनीश ने कहा कि अपनी बड़ी बहन के प्यार और हिम्मत के बल पर कोरोना के सामने लगातार 4 महीने से डटकर खड़ी हैं। पिता हरकेश चंद शर्मा ने भी पूरा साथ दिया। रजनीश 4 महीने से अस्पताल के कोविड-वार्ड में ड्यूटी कर रही हैं। उनके वार्ड में कोरोना के पॉजिटिव मरीजों को भर्ती किया जाता है। रजनीश का कहना है कि अगर बड़ों का प्यार और आशीर्वाद साथ हो तो कोई भी मुश्किल आसान हो जाती है। अस्पताल में नर्सिंग इंचार्ज सिस्टर शोभना हर पल सहयोग करती हैं। संक्रमण से बचाने के लिए हर छोटी से छोटी जानकारी देती हैं। यही वजह है कि ड्यूटी करना आसान हो जाता है।  
विज्ञापन


डरने से जिंदगी नहीं चलती, आगे बढ़ना पड़ता है
रजनीश ने बताया कि बचपन से ही यह सोचा था कि बड़ी होकर दूसरों की मदद करूंगी। इसके लिए नर्सिंग की पढ़ाई की। जब जीएमएसएच 16 में नौकरी लगी तो ऐसा लगा सपना सच हो गया। नौकरी शुरू होते ही कोरोना महामारी सामने खड़ी हो गई। जब कोरोना के मरीजों के बीच ड्यूटी करने की जानकारी मिली तो मैं काफी डर गई थी लेकिन दीदी ने समझाया कि डरने से जिंदगी नहीं चलती, जीने के लिए हिम्मत के साथ आगे बढ़ना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उनकी बातों से मेरे अंदर हिम्मत आई और मैंने ड्यूटी करने की हामी भर दी। शुरुआती दौर में पीपीई किट पहनना, पॉजिटिव मरीजों के पास जाना और खुद की सुरक्षा को लेकर सचेत रहना जैसी तमाम तरह की चीजों से रूबरू होना पड़ा लेकिन धीरे-धीरे इसकी आदत हो गई और मुश्किल आसान हो गई।


सजगता ही बचाव का है तरीका
कोरोना से बचाव को लेकर रजनीश का कहना है कि इस महामारी का इलाज उपलब्ध न होने के कारण सजगता ही इससे बचाव का सबसे आसान तरीका है। इसके लिए जरूरी है कि कोरोना से बचाव के मानकों का बेहद सावधानी के साथ पालन किया जाए। मास्क, सैनिटाइजर और ग्लव्स के प्रयोग के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन कर खुद को इस जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है। रजनीश के अनुसार इन मानकों का पालन करते हुए वह और उनके अन्य सहयोगी महीनों से इस बीमारी के सामने डटकर खड़े हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed