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कोरोना: दिखने लगा असर, बढ़ सकते हैं पैरासिटामॉल, एंटीबायोटिक व एंटी एलर्जी दवाओं के दाम
Fri, 14 Feb 2020 10:11 AM IST
खुशबू गोयल
आशीष वर्मा, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 14 Feb 2020 10:11 AM IST
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चीन में फैले कोरोना वायरस का असर अब भारत की दवा कंपनियों में दिखने लगा है। माल की सप्लाई पर अभी फिलहाल कोई खास असर नहीं पड़ा है, लेकिन चीन से आने वाले कच्चे माल की कीमतों पर इजाफा होना शुरू हो गया है। हिमाचल की बद्दी स्थित कंपनियों के मुताबिक, कच्चे माल की कीमत में करीब 20-25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है।
यदि ऐसे हालात एक महीने तक बने रहे तो कंपनियों को अपना कारोबार बंद करना पड़ सकता है। क्योंकि 70-75 फीसदी दवाओं के लिए एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) चीन से ही आते हैं। बाकी माल भारत से ही सप्लाई होता है। टैबलेट, कैप्सूल और सिरम जैसे फार्मा फार्म्युलेशंस बनाने के लिए एपीआई प्रमुख कच्चा माल होता है।
जिन दवाओं के एपीआई में बढ़ोतरी हुई है, उनमें पैरासिटामाल, एंटीबायोटिक व एंटी एलर्जी की दवाएं शामिल हैं। बद्दी स्थित बीआरडी फार्मा के मालिक राजेश बंसल ने बताया कि पैरासिटामाल के एपीआई की कीमत एक महीने पहले 270-275 किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर 400 रुपये किलोग्राम हो गई है। एंटीबायोटिक एजिथ्रोमायसिन कई मर्ज में काम आती है।
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इसके कच्चे माल की कीमत पहले 7500 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर 10500 रुपये किलोग्राम हो गई है। इसी तरह से एंटी एलर्जी के साल्ट के कच्चे माल की कीमत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले इसकी कीमत 35 हजार किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर 50 हजार हो गई है।
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यदि ऐसे हालात एक महीने तक बने रहे तो कंपनियों को अपना कारोबार बंद करना पड़ सकता है। क्योंकि 70-75 फीसदी दवाओं के लिए एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) चीन से ही आते हैं। बाकी माल भारत से ही सप्लाई होता है। टैबलेट, कैप्सूल और सिरम जैसे फार्मा फार्म्युलेशंस बनाने के लिए एपीआई प्रमुख कच्चा माल होता है।
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जिन दवाओं के एपीआई में बढ़ोतरी हुई है, उनमें पैरासिटामाल, एंटीबायोटिक व एंटी एलर्जी की दवाएं शामिल हैं। बद्दी स्थित बीआरडी फार्मा के मालिक राजेश बंसल ने बताया कि पैरासिटामाल के एपीआई की कीमत एक महीने पहले 270-275 किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर 400 रुपये किलोग्राम हो गई है। एंटीबायोटिक एजिथ्रोमायसिन कई मर्ज में काम आती है।
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इसके कच्चे माल की कीमत पहले 7500 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर 10500 रुपये किलोग्राम हो गई है। इसी तरह से एंटी एलर्जी के साल्ट के कच्चे माल की कीमत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले इसकी कीमत 35 हजार किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर 50 हजार हो गई है।
उत्तर भारत में बद्दी दवा कंपनियों का एक बड़ा क्षेत्र
दवा कंपनियों का कहना है कि अधिकतर दवाओं का एपीआई चीन से सप्लाई होता है, क्योंकि सस्ता है और उसकी सप्लाई भी तेज है। भारत में भी इसका उत्पादन है, लेकिन वे कंपनियों की डिमांड पूरी नहीं कर सकते। कंपनियों का कहना कि सब कुछ चीन के हालात पर निर्भर करता है। किसी के पास 15 दिन का स्टॉक है तो किसी के पास एक महीने का स्टॉक।
बड़ा बाजार होने के कारण यहां पर स्टॉक भी ज्यादा होता है। कुछ का कहना है कि भारत से भी माल बाहर जाता है। सरकार को ऐसी स्थिति पर उन पर रोक लगानी चाहिए, ताकि वे भारत में ही सप्लाई कर सकें। उत्तर भारत में बद्दी दवा कंपनियों का एक बड़ा क्षेत्र है। यदि यहां पर असर पड़ेगा तो निश्चित दवाओं के रेट बढ़ सकते हैं।
अभी फिलहाल ज्यादा असर नहीं है, लेकिन ऐसे हालात एक महीने तक बने रहे तो कई कंपनियों को कारोबार बंद करना पड़ सकता है, क्योंकि 70-75 फीसदी दवाओं का कच्चा माल चीन से आता है। कोरोना वायरस के बाद वहां के हालात खराब बने हुए हैं।
- राजेश बंसल, बीआरडी फार्मा बद्दी
दवाओं के कच्चे माल के अतिरिक्त चीन से शीशियां, पैकिंग के अलावा कई अन्य मैटीरियल भी आता है। इनकी कीमतों भी उछाल देखने को मिल रहा है। अभी फिलहाल इतना फर्क नहीं है, लेकिन आने वाले कुछ समय में दाम बढ़ सकते हैं।
- डॉ. उमाशंकर, मालिक श्री धनवंतरि हर्बल बद्दी
बड़ा बाजार होने के कारण यहां पर स्टॉक भी ज्यादा होता है। कुछ का कहना है कि भारत से भी माल बाहर जाता है। सरकार को ऐसी स्थिति पर उन पर रोक लगानी चाहिए, ताकि वे भारत में ही सप्लाई कर सकें। उत्तर भारत में बद्दी दवा कंपनियों का एक बड़ा क्षेत्र है। यदि यहां पर असर पड़ेगा तो निश्चित दवाओं के रेट बढ़ सकते हैं।
अभी फिलहाल ज्यादा असर नहीं है, लेकिन ऐसे हालात एक महीने तक बने रहे तो कई कंपनियों को कारोबार बंद करना पड़ सकता है, क्योंकि 70-75 फीसदी दवाओं का कच्चा माल चीन से आता है। कोरोना वायरस के बाद वहां के हालात खराब बने हुए हैं।
- राजेश बंसल, बीआरडी फार्मा बद्दी
दवाओं के कच्चे माल के अतिरिक्त चीन से शीशियां, पैकिंग के अलावा कई अन्य मैटीरियल भी आता है। इनकी कीमतों भी उछाल देखने को मिल रहा है। अभी फिलहाल इतना फर्क नहीं है, लेकिन आने वाले कुछ समय में दाम बढ़ सकते हैं।
- डॉ. उमाशंकर, मालिक श्री धनवंतरि हर्बल बद्दी