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गवर्नर-एडवाइजर का आदेश बेअसर... मरीजों की बिगड़ रही तबीयत, देखने नहीं आ रहे डॉक्टर

Sun, 28 Jun 2020 02:54 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 28 Jun 2020 02:54 PM IST
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Corona patient Suffering from fever, Doctors are giving advice on phone
कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला

कोरोना के मरीजों के साथ अस्पतालों में किस तरह का रवैया अपनाया जा रहा है, इसका उदाहरण धन्वंतरि आयुर्वेदिक कॉलेज में देखने को मिल सकता है। स्थिति यह है कि यहां भर्ती एक कोरोना पॉजिटिव मरीज के इलाज के लिए गवर्नर और एडवाइजर के निर्देश की भी अनदेखी हो रही है। सेक्टर-38 निवासी 59 साल के कोरोना पॉजिटिव मरीज के इलाज में लापरवाही को देखते हुए गवर्नर ने बेहतर इलाज का निर्देश दिया था लेकिन दो दिन गुजरने के बाद भी मरीज बुखार से तप रहा है। मरीज का बेटा और पत्नी भी धन्वंतरि आयुर्वेदिक कॉलेज में ही क्वारंटीन हैं। लगातार तबीयत बिगड़ने के बाद भी उन्हें देखने कोई डॉक्टर नहीं आया है। यहां भर्ती मरीजों के साथ तीमारदार डर रहे हैं कि कहीं ऐसी अनदेखी उनके मरीजों की जान पर न बन आए।

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यह है मामला 
सेक्टर-38 सी निवासी 59 साल के कोरोना पॉजिटिव मरीज को 17 जून को कोरोना पॉजिटिव होने के बाद पीजीआई में भर्ती किया गया था। 22 जून को धन्वंतरि आयुर्वेदिक कॉलेज में क्वारंटीन किए गए हैं। 22 जून से उन्हें लगातार बुखार आ रहा है। उनका बेटा भी उनके साथ भर्ती हैं। बेटे ने बताया कि उनके पिता हाइपरटेंशन के मरीज हैं। कोरोना पॉजिटिव होने के कारण उन्हें लगातार बुखार आ रहा है, लेकिन पीजीआई ने उनकी स्थिति को नजरअंदाज करते हुए धन्वंतरि में शिफ्ट कर दिया। 
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उन्होंने प्रशासन और पीजीआई दोनों से अपने पिता को वहां न भेजने की गुहार लगाई थी लेकिन किसी ने नहीं सुनी। अब उनके पिता की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है। अगर मेरे पिता को कुछ हो गया तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन और पीजीआई पर होगी। बेटे ने बताया कि अब उन्हें परेशान करने के लिए आईडी प्रूफ के नाम पर इलाज रोका जा रहा है। उसकी मां का ब्लड टेस्ट इसलिए नहीं किया जा रहा क्योंकि उनके पास आधार कार्ड की ओरिजिनल कॉपी उपलब्ध नहीं है। 


जीएमसीएच-32 जिम्मेदारियों से झाड़ रहा पल्ला
प्रशासन की ओर से चंडीगढ़ के सभी क्वारंटीन सेंटरों में भर्ती मरीजों की जिम्मेदारी जीएमसीएच-32 को दी गई है लेकिन जीएमसीएच प्रशासन लगातार अनदेखी कर रहा है। आलम यह है कि कोरोना से संबंधित मरीजों से जुड़े किसी भी तरह के मामले पर अस्पताल प्रशासन कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। यहां तक कि जीएमसीएच-32 के कोरोना मामलों के नोडल अधिकारी भी कुछ कहने को तैयार नहीं हैं। 

उनका कहना है कि कोरोना से जुड़े मामलों पर सिर्फ प्रशासन के अधिकारी बयान दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में क्वारंटीन सेंटरों में भर्ती मरीजों के परिजन व मरीज वहां की व्यवस्था को लेकर परेशान हैं। उनका कहना है कि इलाज के नाम पर उन्हें प्रशासन और जीएमसीएच- 32 के बीच फंसा कर रख दिया गया है।

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