कोरोना वायरस का असर: खर्चों में 20 फीसदी की कौटाती करेंगे यूटी के सभी विभाग
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कोरोना का प्रभाव हर तरफ नजर आ रहा है। कंपनियों से लेकर फैक्ट्रियां तक बंद हैं। सरकारी खजाना भी खाली हो रहा है। हालात को देखते हुए अब यूटी प्रशासन भी सजग हो गया है। प्रशासन ने यूटी के सभी विभागों के प्रमुखों को खर्चों में 20 फीसदी की कटौती करने को कहा है। प्रशासन की ओर से विभागों को पहली तिमाही के लिए यह दिशा निर्देश दिए गए हैं। केंद्र की तरफ से आए निर्देशों के बाद यूटी प्रशासन खर्चों को लेकर सजग हो गया है।
प्रशासन के विशेष सचिव वित्त हरीश नायर ने बताया कि उन्होंने सभी विभागों को निर्देश जारी किए हैं कि पहली तिमाही के बजट में 20 प्रतिशत खर्चों में कटौती करें। हालांकि की यह भी निर्देश दिए हैं कि तय बजट के अंदर प्रशासन को सभी जरूरी काम पूरे करने होंगे, ताकि ऐसी कोई भी सर्विस प्रभावित न हो जो इस समय आवश्यक है।
प्रशासन ने इसके साथ ही कुछ गाइडलाइंस भी जारी की हैं, जिनका सभी विभागों को पालन करना होगा। इसके अतिरिक्त ये भी कहा गया है कि इन दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ये भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी हाल में तय बजट से अधिक खर्च न हो।
इन निर्देशों का भी करना होगा पालन
विभागों को कहा गया है कि किसी भी हाल में वह पहली तिमाही की जिम्मेदारियों को अगली तिमाही में नहीं डालेंगे। इसके साथ ही यह निर्देश भी दिए गए हैं कि विभागों में कार्यरत डेलीवेज, वर्कचार्ज, अनुबंध, आउटसोर्स समेत सभी कर्मचारियों का वेतन समय पर जारी किया जाए। अप्रैल, मई व जून माह की सैलरी सिर्फ क्वार्टर में ही जारी की जाएगी और किसी भी हाल में इसकी लायबिलिटी अगले क्वार्टर में नहीं डाली जानी चाहिए।
ट्रेजरी में पेश नहीं होंगे कोई बिल
इन निर्देशों के अतिरिक्त तनख्वाह के एरियर, ग्रांट इन एड (सैलरी) को लेकर कोई भी बिल केंद्रीय ट्रेजरी के सामने पेश नहीं किया जाएगा। ऑफिस एक्सपेंसेज व अन्य चार्जेज हेड का इस्तेमाल वेजेस व पेट्रोल ऑयल के इलावा अन्य किसी के लिए नहीं किया जा सकेगा।
वहीं एलटीसी की पेमेंट पर पूर्ण रूप से बैन होगा। हालांकि टीए, डीए की सिर्फ जरूरी ऑफिसियल टूर के लिए अनुमति होगी, जो प्रशासक के सलाहकार द्वारा अप्रूव होना जरूरी होगा।
सख्ती से पालन करने होंगे निर्देश
यूटी प्रशासन ने गाइड लाइन में साफ किया है कि वर्ष की पहली तिमाही को लेकर दिए गए निर्देश सख्ती से पालन करने होंगे। 20 फीसदी से अधिक खर्च करने के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी लेनी आवश्यक होगी। वित्त विभाग द्वारा नियमित खर्च की समीक्षा की जाएगी। यदि किसी डिपार्टमेंट को जरूरी खर्च की जरूरत पड़ेगी तो उस पर पहले से काम किया जाएगा।