{"_id":"5ede0713ea99e65048301a65","slug":"corona-commando-gmch-32-chandigarh-staff-nurse-vijay-singh-story","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"विजय सिंह रोलानिया बोले- घरवालों से दूर अकेले रहकर भी नहीं हारी हिम्मत, जीती कोरोना से जंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विजय सिंह रोलानिया बोले- घरवालों से दूर अकेले रहकर भी नहीं हारी हिम्मत, जीती कोरोना से जंग
Mon, 08 Jun 2020 03:08 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 08 Jun 2020 03:08 PM IST
विज्ञापन
विजय सिंह रोलानिया
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ओटी के अंदर ड्यूटी के दौरान मैं कब किस संक्रमित मरीज के संपर्क में आकर कोरोना पॉजिटिव हो गया, कुछ पता ही नहीं चला। 25 अप्रैल को मुझे पता चला कि मेरी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसके बाद मुझे 11 मई तक पीजीआई में भर्ती रखा गया। 12 मई को मैंने कोरोना पर जीत दर्ज की और फिर घर वापसी की।
मैंने अपने आत्मविश्वास और हिम्मत के बल पर अपने तनाव को बढ़ने से रोका और खुद को इतना मजबूत बनाया की कोरोना का डर मुझ पर हावी न होने पाए। मैं घर वालों से दूर चंडीगढ़ में अकेले रहकर नौकरी करता हूं। ऐसी स्थिति में मेरा कोरोना ग्रस्त होना मेरे लिए एक बहुत ही तनाव वाली सूचना थी लेकिन मैंने उस समय खुद को कमजोर नहीं होने दिया।
इसकी सूचना अपने घर वालों को दिए बगैर मैंने अकेले ही कोरोना से जंग जारी रखी और अंत में जीत मेरी हुई। यह कहना है जीएमसीएच 32 के स्टाफ नर्स विजय सिंह रोलानिया का, जो ड्यूटी के दौरान कोरोना की चपेट में आए और उसके बाद कोरोना पर जीत दर्ज करके फिर से अपनी ड्यूटी जॉइन कर ली है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मैंने अपने आत्मविश्वास और हिम्मत के बल पर अपने तनाव को बढ़ने से रोका और खुद को इतना मजबूत बनाया की कोरोना का डर मुझ पर हावी न होने पाए। मैं घर वालों से दूर चंडीगढ़ में अकेले रहकर नौकरी करता हूं। ऐसी स्थिति में मेरा कोरोना ग्रस्त होना मेरे लिए एक बहुत ही तनाव वाली सूचना थी लेकिन मैंने उस समय खुद को कमजोर नहीं होने दिया।
विज्ञापन
इसकी सूचना अपने घर वालों को दिए बगैर मैंने अकेले ही कोरोना से जंग जारी रखी और अंत में जीत मेरी हुई। यह कहना है जीएमसीएच 32 के स्टाफ नर्स विजय सिंह रोलानिया का, जो ड्यूटी के दौरान कोरोना की चपेट में आए और उसके बाद कोरोना पर जीत दर्ज करके फिर से अपनी ड्यूटी जॉइन कर ली है।
विज्ञापन
पिता से विरासत में मिली है हिम्मत और धैर्य
विजय ने बताया कि उनके पिता राजस्थान पुलिस में हेड कांस्टेबल थे। बचपन से ही उन्हें घर पर अनुशासन, हिम्मत और धैर्य का वातावरण मिला। संस्कारों में उन्हें आत्मविश्वास, दूसरों की मदद करने और मजबूत बनने की शिक्षा मिली। विजय के पिता ही उनके आदर्श हैं। विजय ने बताया कि कोरोना संक्रमित होने के बाद परिवार वालों से दूर रहकर बिना उनको इसकी सूचना दिए अकेले महामारी से लड़ना आसान नहीं था।
लेकिन उन्हें अपने पिता से मिली शिक्षा हर पल याद रही। विजय ने बताया कि पापा बचपन से ही मुझे हमेशा एक ही बात समझाते थे कि धैर्य, साहस और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी जंग को आसानी से जीता जा सकता है। कोरोना से जंग में भी मैंने पिताजी के फार्मूले को अपनाया और वाकई में जीत मिली।
लेकिन उन्हें अपने पिता से मिली शिक्षा हर पल याद रही। विजय ने बताया कि पापा बचपन से ही मुझे हमेशा एक ही बात समझाते थे कि धैर्य, साहस और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी जंग को आसानी से जीता जा सकता है। कोरोना से जंग में भी मैंने पिताजी के फार्मूले को अपनाया और वाकई में जीत मिली।
ठीक होकर अब कोविड ओटी में कर रहे ड्यूटी
12 मई को पीजीआई से डिस्चार्ज होने के बाद विजय को 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया गया। उस समय सीमा को पूरा करने के बाद विजय ने फिर से जीएमसीएच-32 में नौकरी ज्वाइन कर ली है। विजय ने बताया कि पहले वह सर्जरी इमरजेंसी में तैनात थे लेकिन अब कोरोना को हराने के बाद 26 मई से उन्होंने अपनी ड्यूटी कोविड-ओटी में लगवाई है।
विजय का कहना है शुरुआती दौर में कोरोना संबंधित खबरों को सुनकर मन में थोड़ा डर लगा था लेकिन कोरोना पॉजिटिव होने और उसे हराने के बाद दोगुनी ताकत आ गई है। एक पैरामेडिकल स्टाफ होने के कारण मुझे खुद के बचाव के साथ ही खुद को मजबूती देने के सारे तरीके पता है इसलिए अब कोरोना को लेकर कोई भी शक और डर मन में नहीं है।
विजय का कहना है कि जो भी कोरोना पॉजिटिव मरीज हैं उन्हें एक बात ठीक तरह से समझनी होगी कि अगर इस दौरान उन पर तनाव हावी हो गया तो फिर कोरोना को हराना मुश्किल हो जाएगा।
विजय का कहना है शुरुआती दौर में कोरोना संबंधित खबरों को सुनकर मन में थोड़ा डर लगा था लेकिन कोरोना पॉजिटिव होने और उसे हराने के बाद दोगुनी ताकत आ गई है। एक पैरामेडिकल स्टाफ होने के कारण मुझे खुद के बचाव के साथ ही खुद को मजबूती देने के सारे तरीके पता है इसलिए अब कोरोना को लेकर कोई भी शक और डर मन में नहीं है।
विजय का कहना है कि जो भी कोरोना पॉजिटिव मरीज हैं उन्हें एक बात ठीक तरह से समझनी होगी कि अगर इस दौरान उन पर तनाव हावी हो गया तो फिर कोरोना को हराना मुश्किल हो जाएगा।