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हरियाणा में एमडी-एमएस की काउंसलिंग पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, आरक्षण के खिलाफ थी याचिका
Sat, 02 May 2020 10:39 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 02 May 2020 10:39 AM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
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हरियाणा के मेडिकल कॉलेजों में एमडी और एमएस कोर्स की 156 सीटों पर दाखिले के लिए 4 और 5 मई को होने जा रही काउंसलिंग पर भी रोक लगा दी है। 87 प्रतिशत सीटों को आरक्षित किए जाने के खिलाफ दायर एक याचिका पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को 6 मई के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है। जस्टिस आरके जैन एवं जस्टिस जसवंत सिंह की खंडपीठ ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए हैं।
इस मामले को लेकर डॉ विक्रम पाल सहित अन्य कई डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया है कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों में सत्र 2020 -21 में एमडी और एमएस कोर्स की 156 सीटों पर दाखिले के लिए गत वर्ष नवंबर में प्रक्रिया शुरू की गई थी। जनवरी में नीट की परीक्षा हुई और गत माह 15 अप्रैल को इन सेटों पर दाखिले के लिए आवेदन मांगे गए। आवेदन की अंतिम तिथि 24 अप्रैल थी और उसके बाद 26 अप्रैल को स्क्रूटनी होनी थी और 4 और 5 मई को काउंसलिंग तय की गई है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सरकार ने इस दाखिलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन कर कहीं अधिक सीटों अरक्षित कर दी हैं। इंदिरा साहनी के केस में सुप्रीम कोर्ट तय कर चूका है कि किसी भी सूरत में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं होगा, लेकिन सरकार ने इन 156 सीटों में से 87 प्रतिशत सीटें आरक्षित कर दी हैं और सिर्फ 31 सीटें सामान्य वर्ग के लिए छोड़ी हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग सहित अन्य पिछड़े वर्ग के साथ 25 प्रतिशत सीटें इंस्टिट्यूशनल प्रेफरेंस, 5 प्रतिशत सीट दिव्यांगों और 10 प्रतिशत सीट ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए आरक्षित कर दी हैं।
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इस लिहाज से 87 प्रतिशत सीटें आरक्षित कर दी गई हैं जो सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है और साथ ही 4 और 5 मई को इन सीटों पर होने जा रही काउंसलिंग पर 6 मई को मामले की अगली सुनवाई तक रोक लगाए जाने के आदेश दे दिए हैं।
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इस मामले को लेकर डॉ विक्रम पाल सहित अन्य कई डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया है कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों में सत्र 2020 -21 में एमडी और एमएस कोर्स की 156 सीटों पर दाखिले के लिए गत वर्ष नवंबर में प्रक्रिया शुरू की गई थी। जनवरी में नीट की परीक्षा हुई और गत माह 15 अप्रैल को इन सेटों पर दाखिले के लिए आवेदन मांगे गए। आवेदन की अंतिम तिथि 24 अप्रैल थी और उसके बाद 26 अप्रैल को स्क्रूटनी होनी थी और 4 और 5 मई को काउंसलिंग तय की गई है।
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याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सरकार ने इस दाखिलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन कर कहीं अधिक सीटों अरक्षित कर दी हैं। इंदिरा साहनी के केस में सुप्रीम कोर्ट तय कर चूका है कि किसी भी सूरत में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं होगा, लेकिन सरकार ने इन 156 सीटों में से 87 प्रतिशत सीटें आरक्षित कर दी हैं और सिर्फ 31 सीटें सामान्य वर्ग के लिए छोड़ी हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग सहित अन्य पिछड़े वर्ग के साथ 25 प्रतिशत सीटें इंस्टिट्यूशनल प्रेफरेंस, 5 प्रतिशत सीट दिव्यांगों और 10 प्रतिशत सीट ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए आरक्षित कर दी हैं।
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इस लिहाज से 87 प्रतिशत सीटें आरक्षित कर दी गई हैं जो सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है और साथ ही 4 और 5 मई को इन सीटों पर होने जा रही काउंसलिंग पर 6 मई को मामले की अगली सुनवाई तक रोक लगाए जाने के आदेश दे दिए हैं।