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Chandigarh News: हीटवेव से निपटने के लिए कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी
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चंडीगढ़। बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ रहे हीटवेव के खतरे को देखते हुए विशेषज्ञों ने शहरों और गांवों में कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि हीटवेव अब केवल मौसम से जुड़ी समस्या नहीं रह गई बल्कि यह जनस्वास्थ्य, कृषि और आजीविका के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है।
ये बातें पंजाब में हीटवेव : विज्ञान, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता विषय पर आयोजित मल्टी स्टेकहोल्डर्स वर्कशॉप में कही गईं। कार्यक्रम का आयोजन चंडीगढ़ प्रेस क्लब में क्लीन एयर पंजाब, चंडीगढ़ प्रेस क्लब और भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से किया गया।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की डॉ. प्रभज्योत कौर और केवीके मोहाली के उपनिदेशक डॉ. बलबीर सिंह खड्डा ने कहा कि बढ़ती गर्मी का असर फसलों, मिट्टी की गुणवत्ता और किसानों की आजीविका पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि हीटवेव से प्रभावित लोगों के लिए कूलिंग स्पेस और शेल्टर बेहद जरूरी हो गए हैं। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि अत्यधिक गर्मी के दौरान सामुदायिक केंद्रों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक भवनों को अस्थायी कूलिंग शेल्टर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। क्लीन एयर पंजाब के निदेशक सनम सुतीरथ वजीर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की योजनाओं में सबसे ज्यादा प्रभावित और कमजोर वर्गों को केंद्र में रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हीटवेव अब किसानों से लेकर ऐप आधारित डिलीवरी कर्मियों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक के लिए रोजमर्रा की सच्चाई बन चुकी है। वर्कशॉप में गिग वर्कर्स की समस्याओं पर भी चर्चा हुई। चंडीगढ़ के गिग वर्कर टेक चंद ने बताया कि लंबे समय तक खुले में काम करने वाले श्रमिकों के पास न तो पर्याप्त छाया होती है और न ही पानी और आराम जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
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ये बातें पंजाब में हीटवेव : विज्ञान, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता विषय पर आयोजित मल्टी स्टेकहोल्डर्स वर्कशॉप में कही गईं। कार्यक्रम का आयोजन चंडीगढ़ प्रेस क्लब में क्लीन एयर पंजाब, चंडीगढ़ प्रेस क्लब और भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से किया गया।
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पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की डॉ. प्रभज्योत कौर और केवीके मोहाली के उपनिदेशक डॉ. बलबीर सिंह खड्डा ने कहा कि बढ़ती गर्मी का असर फसलों, मिट्टी की गुणवत्ता और किसानों की आजीविका पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि हीटवेव से प्रभावित लोगों के लिए कूलिंग स्पेस और शेल्टर बेहद जरूरी हो गए हैं। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि अत्यधिक गर्मी के दौरान सामुदायिक केंद्रों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक भवनों को अस्थायी कूलिंग शेल्टर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। क्लीन एयर पंजाब के निदेशक सनम सुतीरथ वजीर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की योजनाओं में सबसे ज्यादा प्रभावित और कमजोर वर्गों को केंद्र में रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हीटवेव अब किसानों से लेकर ऐप आधारित डिलीवरी कर्मियों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक के लिए रोजमर्रा की सच्चाई बन चुकी है। वर्कशॉप में गिग वर्कर्स की समस्याओं पर भी चर्चा हुई। चंडीगढ़ के गिग वर्कर टेक चंद ने बताया कि लंबे समय तक खुले में काम करने वाले श्रमिकों के पास न तो पर्याप्त छाया होती है और न ही पानी और आराम जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
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