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प्रमोशन का मामलाः PGI कमेटी के फैसले पर उठे सवाल, ये रही वजह
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 13 Jan 2017 12:13 PM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
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डॉक्टरों के प्रमोशन मामले में अब चंडीगढ़ पीजीआई की स्टैडिंग सलेक्शन कमेटी का एक और फैसला सवालों के घेरे में आ गया है। कमेटी ने जिस डाक्टर को प्रमोशन के इंटरव्यू में फेल कर दिया था, बाद में उसे पास कर प्रमोट कर दिया गया है। यह फैसला भी बुधवार को नई दिल्ली में गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में लिया गया है। इस फैसले से एक बात साबित हो गई है कि डा. रवि भेदभाव व भाई-भतीजावाद के शिकार हुए थे।
अमर उजाला इस मुद्दे को पहले भी उठा चुका है कि पीजीआई में किस तरह से डाक्टरों के सलेक्शन और प्रमोशन में भाई-भतीजावाद होता है। डा. रवि कनौजिया पीडियाट्रिक सर्जरी में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात थे। उन्होंने साल 2015 में एडिशनल प्रोफेसर के लिए पीजीआई की स्टैंडिंग सलेक्शन कमेटी के सामने इंटरव्यू दिया था। वे अपनी फील्ड में काफी माहिर थे।
उनके कई पब्लिकेशन नेशनल व इंटरनेशनल जरनल में प्रकाशित हो चुके थे, इसलिए सभी मानकर चल रहे थे कि डा. रवि कनौजिया का प्रमोशन होगा। लेकिन जब रिजल्ट आया तो डा. रवि को प्रमोशन न देकर एक जूनियर को प्रमोट कर दिया गया। इससे हर कोई हैरान हो गया। पीजीआई फैकल्टी के बीच चर्चा का विषय बन गया। सलेक्शन कमेटी पर भेदभाव और भाई भतीजावाद का आरोप लगा।
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अमर उजाला इस मुद्दे को पहले भी उठा चुका है कि पीजीआई में किस तरह से डाक्टरों के सलेक्शन और प्रमोशन में भाई-भतीजावाद होता है। डा. रवि कनौजिया पीडियाट्रिक सर्जरी में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात थे। उन्होंने साल 2015 में एडिशनल प्रोफेसर के लिए पीजीआई की स्टैंडिंग सलेक्शन कमेटी के सामने इंटरव्यू दिया था। वे अपनी फील्ड में काफी माहिर थे।
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उनके कई पब्लिकेशन नेशनल व इंटरनेशनल जरनल में प्रकाशित हो चुके थे, इसलिए सभी मानकर चल रहे थे कि डा. रवि कनौजिया का प्रमोशन होगा। लेकिन जब रिजल्ट आया तो डा. रवि को प्रमोशन न देकर एक जूनियर को प्रमोट कर दिया गया। इससे हर कोई हैरान हो गया। पीजीआई फैकल्टी के बीच चर्चा का विषय बन गया। सलेक्शन कमेटी पर भेदभाव और भाई भतीजावाद का आरोप लगा।
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फैकल्टी एसोसिएशन ने नड्डा के सामने उठाया था मुद्दा
JP Nadda PGI Visit
डा. रवि कनौजिया के प्रमोशन का मुद्दा पीजीआई फैकल्टी एसोसिएशन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के सामने उठाया। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट टीडी यादव ने नड्डा के से कहा कि डा. रवि पीजीआई के जाने-माने युवा सर्जन हैं। वे प्रमोशन के सभी मापदंडों पर खरे उतरते हैं, इसलिए उन्हें आशंका है कि उनके इंटरव्यू के दौरान कुछ गड़बड़ी हुई है।
उनका इंटरव्यू रिव्यू किया जाए। नड्डा ने उनकी बात मान ली और कमेटी के कुछ सदस्य हटाकर उनकी जगह नए सदस्यों को शामिल कर दोबारा से इंटरव्यू हुआ। बुधवार को जब उनका रिजल्ट आउट हुआ तो वे इंटरव्यू में पास हो गए। वीरवार को उन्होंने एडिशनल प्रोफेसर के तौर पर ज्वाइन भी कर लिया।
जन्नत-मन्नत को दिया था नया जीवन
आपस में जुड़ी बहनों को अलग-अलग करने के बाद डा. रवि कनौजिया चर्चा में आ गए थे। साल 2015 में अंबाला की आपस में जुड़ी दो जुड़वा बहनें डा. रवि कनौजिया के पास आई थीं। उन्होंने व उनकी टीम ने दोनों बहनों को बहुत ही सुरक्षित तरीके से अलग कर दिया था। यह पहली बार था, जब पीजीआई ने इस तरह के आपरेशन में सफलता पाई। दोनों बहनों पूरी तरह से ठीक हैं। इस आपरेशन को विदेशी मीडिया ने अपने अखबारों में पब्लिश किया था।
हम किसी पर सवाल नहीं उठाना चाहते। हमारी एक ही मांग है कि प्रमोशन और सलेक्शन के मापदंड तय किए जाएं। अब तक कोई भी मापदंड तय नहीं है। इसी वजह से भेदभाव व भाई भतीजावाद जैसे विवाद सामने आते हैं। हमने पहले भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से इस बारे गुहार लगाई है और अभी भी यही हमारी मांग है।
- टीडी यादव, प्रेसिडेंट, पीजीआई फैकल्टी एसोसिएशन
उनका इंटरव्यू रिव्यू किया जाए। नड्डा ने उनकी बात मान ली और कमेटी के कुछ सदस्य हटाकर उनकी जगह नए सदस्यों को शामिल कर दोबारा से इंटरव्यू हुआ। बुधवार को जब उनका रिजल्ट आउट हुआ तो वे इंटरव्यू में पास हो गए। वीरवार को उन्होंने एडिशनल प्रोफेसर के तौर पर ज्वाइन भी कर लिया।
जन्नत-मन्नत को दिया था नया जीवन
आपस में जुड़ी बहनों को अलग-अलग करने के बाद डा. रवि कनौजिया चर्चा में आ गए थे। साल 2015 में अंबाला की आपस में जुड़ी दो जुड़वा बहनें डा. रवि कनौजिया के पास आई थीं। उन्होंने व उनकी टीम ने दोनों बहनों को बहुत ही सुरक्षित तरीके से अलग कर दिया था। यह पहली बार था, जब पीजीआई ने इस तरह के आपरेशन में सफलता पाई। दोनों बहनों पूरी तरह से ठीक हैं। इस आपरेशन को विदेशी मीडिया ने अपने अखबारों में पब्लिश किया था।
हम किसी पर सवाल नहीं उठाना चाहते। हमारी एक ही मांग है कि प्रमोशन और सलेक्शन के मापदंड तय किए जाएं। अब तक कोई भी मापदंड तय नहीं है। इसी वजह से भेदभाव व भाई भतीजावाद जैसे विवाद सामने आते हैं। हमने पहले भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से इस बारे गुहार लगाई है और अभी भी यही हमारी मांग है।
- टीडी यादव, प्रेसिडेंट, पीजीआई फैकल्टी एसोसिएशन