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सिख कैदियों की रिहाई के मुद्दे से गठबंधन में तनाव

Thu, 08 Jan 2015 05:42 PM IST
अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़
अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 08 Jan 2015 05:42 PM IST
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Controversy in BJP-SAD Coailition in Punjab due to Releasing of Sikh Prisoners

देशभर की जेलों में कई वर्षों से टाडा एक्ट के अधीन उम्रभर के लिए नजरबंद सिख कैदियों की रिहाई का मुद्दा उठने से पंजाब की राजनीति गर्मा गई है। इसके चलते अकाली-भाजपा संबंधों में भी तनाव बढ़ता दिखाई पड़ रहा है। यह शिअद के फिर से पंथक एजेंडे की तरफ बढ़ने का संकेत है।

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शिअद कोर कमेटी की बैठक में बीते मंगलवार को इस संबंध में लिया गया फैसला खींचतान को और बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में पहले लिखे पत्र और कोर कमेटी के फैसले के बाद बुधवार को कहा है कि सिख कैदियों की रिहाई के लिए पार्टी का एक शिष्टमंडल जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करेगा।
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मुख्यमंत्री बादल ने 24 दिसंबर 2014 को विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को देश की विभिन्न जेलों में बंद 13 सिख उम्र कैदियों की रिहाई के लिए पत्र लिखा था। शिअद की यह गतिविधियां प्रदेश के बदलते राजनीतिक परिदृश्य और नया रूप लेते अकाली-भाजपा संबंधों को और साफ कर रही हैं।
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ऐसा माना जा रहा है कि शिअद ने यह रुख भाजपा के बदलते तेवर और उसके सदस्यता अभियान व नशों के मुद्दे पर बढ़ती गतिविधियों को काउंटर करने के लिए अख्तियार किया है, ताकि पंथक वोटों को एकजुट किया जा सके।

यह है कोर कमेटी का फैसला

Controversy in BJP-SAD Coailition in Punjab due to Releasing of Sikh Prisoners

शिअद कोर कमेटी ने फैसला लिया है कि अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में पार्टी का एक शिष्टमंडल शीघ्र ही देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह को मिलकर सिख कैदियों की रिहाई की मांग करेगा। इसमें शिअद के महासचिव सुखदेव सिंह ढींडसा और एसजीपीसी अध्यक्ष जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ भी शामिल होंगे।

यह था बादल के पत्र में
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने 24 दिसंबर पत्र उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और गुजरात के मुख्यमंत्रियों सहित नई दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक को पत्र लिखा था। उसमें टाडा के अधीन नजरबंद कैदियों की रिहाई सहानुभूति के आधार पर करने की बात कही गई थी।

इन पत्रों में उत्तर प्रदेश से वरियाम सिंह, राजस्थान से गुरमीत सिंह फौजी, पश्चिम बंगाल से दया सिंह लाहौरिया, गुजरात से लाल सिंह, कर्नाटक से गुरदीप सिंह खैहरा, दिल्ली से दविंदर पाल सिंह भुल्लर, परमजीत सिंह भयौरा व जगतार सिंह हवारा, यूटी चंडीगढ़ से गुरमीत सिंह, शमशेर सिंह, लखविंदर सिंह, सुबेग सिंह और नंद सिंह की रिहाई का मामला उठाया था।

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