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जलियांवाला बाग की गैलरी से हटाई गईं विवादास्पद पेंटिंग, पीएम मोदी तक को लिखा था पत्र
Tue, 21 Jul 2020 11:10 AM IST
खुशबू गोयल
अशोक नीर, अमृतसर
अशोक नीर, अमृतसर
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 21 Jul 2020 11:10 AM IST
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जलियांवाला बाग
- फोटो : अमर उजाला
शहीद स्थली जलियांवाला बाग में बनाई गई नई गैलरी में दो महिलाओं की अर्धनग्न पेंटिंग लगाने के मामले पर पैदा हुए विवाद के बाद दोनों पेंटिंग हटा दी गई हैं। एसडीएम विकास हीरा ने यह दावा किया है कि दोनों पेंटिंग हटा दी गई हैं। अमर उजाला द्वारा इन पेंटिंग के बारे में किए गए खुलासे के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया था।
एसडीएम ने विकास कार्यों का निरीक्षण करने के बहाने जलियांवाला बाग की उस गैलरी का निरीक्षण किया, जहां पेंटिंग लगाई गई थीं। मिली जानकारी के अनुसार, विकास हीरा ने जलियांवाला बाग में विकास कार्य कर रही कंपनी के अधिकारियों द्वारा इन पेंटिंग को लगाने पर गंभीर नोटिस लिया। इसके बाद कंपनी ने गलती मानते हुए इन पेंटिंग को उतार दिया है।
पेंटिंग लगाने को किसने कहा- यह तो कंपनी ही बता सकती है
एसडीएम ने कहा कि जब वह रविवार को विकास कार्यों का निरीक्षण करने के लिए गए थे तो गैलरी में पेंटिंग नहीं थी। कंपनी ने इन्हें हटा दिया है। इन पेंटिंग को गैलरी में लगाने के लिए किसने कहा, कहां से लाई गई, इस बारे में कंपनी ही बता सकती है। जिला प्रशासन के पास इस मामले में कोई भी लिखित शिकायत नहीं आई है।
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जब भी कोई शिकायत मिलेगी, प्रशासन जांच करेगा। उच्च अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए तो वे इस मामले की जांच करेंगे। उन्होंने बताया कि दिल्ली से भी एक टीम विकास कार्यों का निरीक्षण करने के लिए समय-समय पर आती रहती है।
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एसडीएम ने विकास कार्यों का निरीक्षण करने के बहाने जलियांवाला बाग की उस गैलरी का निरीक्षण किया, जहां पेंटिंग लगाई गई थीं। मिली जानकारी के अनुसार, विकास हीरा ने जलियांवाला बाग में विकास कार्य कर रही कंपनी के अधिकारियों द्वारा इन पेंटिंग को लगाने पर गंभीर नोटिस लिया। इसके बाद कंपनी ने गलती मानते हुए इन पेंटिंग को उतार दिया है।
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पेंटिंग लगाने को किसने कहा- यह तो कंपनी ही बता सकती है
एसडीएम ने कहा कि जब वह रविवार को विकास कार्यों का निरीक्षण करने के लिए गए थे तो गैलरी में पेंटिंग नहीं थी। कंपनी ने इन्हें हटा दिया है। इन पेंटिंग को गैलरी में लगाने के लिए किसने कहा, कहां से लाई गई, इस बारे में कंपनी ही बता सकती है। जिला प्रशासन के पास इस मामले में कोई भी लिखित शिकायत नहीं आई है।
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जब भी कोई शिकायत मिलेगी, प्रशासन जांच करेगा। उच्च अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए तो वे इस मामले की जांच करेंगे। उन्होंने बताया कि दिल्ली से भी एक टीम विकास कार्यों का निरीक्षण करने के लिए समय-समय पर आती रहती है।
प्रधानमंत्री तक को लिखा था पत्र
दो दिन पहले जलियांवाला बाग यादगार ट्रस्ट के सदस्य श्वेत मलिक ने चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कंपनी के एक अधिकारी ने उसी गैलरी में स्थापित किए गए अलग-अलग स्टेच्यू के बारे में जानकारी दी थी। गैलरी के जिस स्थान से कंपनी का अधिकारी मलिक को जानकारी दे रहा था, ठीक उसके सामने यह दोनों अर्धनग्न महिलाओं की पेंटिंग दिख रही थी।
इसके बावजूद भी मलिक ने इन पेंटिंग पर कोई आपत्ति नहीं उठाई थी। अंतरराष्ट्रीय कम्बोज समाज के अध्यक्ष हरमीत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिख कर इन पेंटिंग को गैलरी से हटाने की मांग की थी।
विकास के नाम पर धरोहर को बिगाड़ दिया
जलियांवाला बाग की गैलरी में लगाई गईं महिलाओं की अर्धनग्न पेंटिंग के विरोध में सांसद गुरजीत औजला ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि इन तस्वीरों के साथ श्री गुरु नानक देव जी, महाराजा रंजीत सिंह और बाबा बंदा सिंह बहादुर की तस्वीरें लगाई गई हैं।
विकास कार्यों के नाम पर ऐतिहासिक दीवारों पर पलस्तर कर दिया गया है। शहीदी कुएं के नवीनीकरण के नाम पर उसका रूप भी बिगाड़ दिया है। जलियांवाला बाग के इतिहास व धरोहर को बिगाड़ने के मामले की जांच की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री इस मामले पर एक उच्चस्तरीय आयोग का गठन करें।
इसके बावजूद भी मलिक ने इन पेंटिंग पर कोई आपत्ति नहीं उठाई थी। अंतरराष्ट्रीय कम्बोज समाज के अध्यक्ष हरमीत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिख कर इन पेंटिंग को गैलरी से हटाने की मांग की थी।
विकास के नाम पर धरोहर को बिगाड़ दिया
जलियांवाला बाग की गैलरी में लगाई गईं महिलाओं की अर्धनग्न पेंटिंग के विरोध में सांसद गुरजीत औजला ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि इन तस्वीरों के साथ श्री गुरु नानक देव जी, महाराजा रंजीत सिंह और बाबा बंदा सिंह बहादुर की तस्वीरें लगाई गई हैं।
विकास कार्यों के नाम पर ऐतिहासिक दीवारों पर पलस्तर कर दिया गया है। शहीदी कुएं के नवीनीकरण के नाम पर उसका रूप भी बिगाड़ दिया है। जलियांवाला बाग के इतिहास व धरोहर को बिगाड़ने के मामले की जांच की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री इस मामले पर एक उच्चस्तरीय आयोग का गठन करें।