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Chandigarh News: गुरुग्राम-फरीदाबाद में घर-घर कचरा उठाने वाली कंपनी का ठेका रद्द, सरकार के निशाने पर और भी कंपनियां
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-करनाल, पानीपत, सोनीपत और रोहतक से मिल रहीं लगातार शिकायतें
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। गुरुग्राम और फरीदाबाद में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली ईको ग्रीन कंपनी का ठेका प्रदेश सरकार ने रद्द कर दिया है। नियमों पर खरा न उतरने के चलते सरकार ने यह फैसला लिया है। इसके अलावा, अन्य निकाय संस्थाओं में भी इसी प्रकार की शिकायतें और भ्रष्टाचार के आरोप हैं। खासकर इनमें करनाल, पानीपत, सोनीपत और रोहतक नगर निगम शामिल हैं। यहां पर भी ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप हैं। यहां भी कूड़ा उठान और सफाई तरीके से नहीं हो रही है। इसलिए निकाय विभाग ने ऐसे मामलों की जांच कराने का फैसला लिया है।
ईको ग्रीन कंपनी के खिलाफ फरीदाबाद और गुरुग्राम नगर निगम दोनों ही सरकार को पत्र लिखकर ठेका रद्द करने की मांग कर चुके हैं। कंपनी को 2017 से गुरुग्राम और फरीदाबाद में घर-घर कूड़ा उठाने का काम दिया गया था, लेकिन कंपनी सरकार के नियमों पर खरी नहीं उतरी। इससे शहरवासियों ने नाराजगी जाहिर की थी। पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती और उपकरणों को लेकर कई बार नोटिस भी दिए गए, लेकिन कंपनी ने न तो वेस्ट से बिजली पैदा करने वाला प्लांट लगाया और न ही कार्यप्रणाली में सुधार किया। नवनियुक्त शहरी स्थानीय निकाय मंत्री सुभाष सुधा ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कंपनी का करार रद्द करने को मंजूरी दी। मंत्री का कहना है कि सरकार ने कंपनी का ठेका रद्द कर दिया है, दोनों शहरों में नए सिरे से इस पर काम शुरू किया जाएगा।
सफाई कार्य में बड़े भ्रष्टाचार की बू, जांच की तैयारी में सरकार
शहरी स्थानीय निकायों में सफाई कार्य में बड़े भ्रष्टाचार की बू आ रही है। इस संबंध में मंत्री के पास कई निकाय संस्थाओं से खुद चेयरमैन और वाइस चेयरमैन ने शिकायतें दर्ज कराई हैं। आशंका जताई जा रही है कि चंद लोगों ने ही पूरे प्रदेश में डोर-टू-डोर कचरा उठाने के काम पर कब्जा जमा लिया है। अलग-अलग शहरों में नेताओं, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से अलग-अलग कंपनी को काम दिलाया गया है। शहरों में सफाई केवल कागजों में दिखाई जाती है और निकाय संस्थाओं में करोड़ों रुपये सालाना इस पर खर्च दिखाया जा रहा है। सरकार इस भ्रष्टाचार को रोकने की तैयारी में है। जल्द ही इस मामले में मंत्री अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेंगे और इसके बाद जांच का फैसला लिया जाएगा।
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याशी कंपनी का मामला कोर्ट में विचाराधीन
प्रॉपर्टी आईडी के मामले में हरियाणा सरकार द्वारा ब्लैकलिस्टेड की गई याशी कंपनी को लेकर मंत्री सुभाष सुधा का कहना है कि कंपनी की पेमेंट भी रोकी गई है और उस पर कार्रवाई भी की गई है, लेकिन कंपनी कोर्ट में चली गई है। इसलिए इस मामले में अभी कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है। प्रॉपर्टी आईडी में खामियों को ठीक करने के लिए विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। गुरुग्राम और फरीदाबाद में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली ईको ग्रीन कंपनी का ठेका प्रदेश सरकार ने रद्द कर दिया है। नियमों पर खरा न उतरने के चलते सरकार ने यह फैसला लिया है। इसके अलावा, अन्य निकाय संस्थाओं में भी इसी प्रकार की शिकायतें और भ्रष्टाचार के आरोप हैं। खासकर इनमें करनाल, पानीपत, सोनीपत और रोहतक नगर निगम शामिल हैं। यहां पर भी ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप हैं। यहां भी कूड़ा उठान और सफाई तरीके से नहीं हो रही है। इसलिए निकाय विभाग ने ऐसे मामलों की जांच कराने का फैसला लिया है।
ईको ग्रीन कंपनी के खिलाफ फरीदाबाद और गुरुग्राम नगर निगम दोनों ही सरकार को पत्र लिखकर ठेका रद्द करने की मांग कर चुके हैं। कंपनी को 2017 से गुरुग्राम और फरीदाबाद में घर-घर कूड़ा उठाने का काम दिया गया था, लेकिन कंपनी सरकार के नियमों पर खरी नहीं उतरी। इससे शहरवासियों ने नाराजगी जाहिर की थी। पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती और उपकरणों को लेकर कई बार नोटिस भी दिए गए, लेकिन कंपनी ने न तो वेस्ट से बिजली पैदा करने वाला प्लांट लगाया और न ही कार्यप्रणाली में सुधार किया। नवनियुक्त शहरी स्थानीय निकाय मंत्री सुभाष सुधा ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कंपनी का करार रद्द करने को मंजूरी दी। मंत्री का कहना है कि सरकार ने कंपनी का ठेका रद्द कर दिया है, दोनों शहरों में नए सिरे से इस पर काम शुरू किया जाएगा।
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सफाई कार्य में बड़े भ्रष्टाचार की बू, जांच की तैयारी में सरकार
शहरी स्थानीय निकायों में सफाई कार्य में बड़े भ्रष्टाचार की बू आ रही है। इस संबंध में मंत्री के पास कई निकाय संस्थाओं से खुद चेयरमैन और वाइस चेयरमैन ने शिकायतें दर्ज कराई हैं। आशंका जताई जा रही है कि चंद लोगों ने ही पूरे प्रदेश में डोर-टू-डोर कचरा उठाने के काम पर कब्जा जमा लिया है। अलग-अलग शहरों में नेताओं, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से अलग-अलग कंपनी को काम दिलाया गया है। शहरों में सफाई केवल कागजों में दिखाई जाती है और निकाय संस्थाओं में करोड़ों रुपये सालाना इस पर खर्च दिखाया जा रहा है। सरकार इस भ्रष्टाचार को रोकने की तैयारी में है। जल्द ही इस मामले में मंत्री अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेंगे और इसके बाद जांच का फैसला लिया जाएगा।
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याशी कंपनी का मामला कोर्ट में विचाराधीन
प्रॉपर्टी आईडी के मामले में हरियाणा सरकार द्वारा ब्लैकलिस्टेड की गई याशी कंपनी को लेकर मंत्री सुभाष सुधा का कहना है कि कंपनी की पेमेंट भी रोकी गई है और उस पर कार्रवाई भी की गई है, लेकिन कंपनी कोर्ट में चली गई है। इसलिए इस मामले में अभी कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है। प्रॉपर्टी आईडी में खामियों को ठीक करने के लिए विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं।