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उपभोक्ताओं ने किए सवाल, फोरम ने दिए जवाब

Tue, 25 Mar 2014 12:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 25 Mar 2014 12:47 PM IST
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Consumer Column, Consumer Court, Public Issues
प्रश्न- कुछ दिन पहले मैं और मेरी पत्नी एक ट्रेन से ट्रेवल कर रहे थे। रात के समय मेरी पत्नी का मोबाइल फोन चोरी हो गया। जिस इंश्योरेंस कंपनी के माध्यम से मोबाइल का बीमा करवाया गया था, उसने क्लेम देने से इंकार कर दिया। इंश्योरेंस कंपनी ने कहा कि यह फोन लापरवाही की वजह से चोरी हुआ। ऐसे में कंपनी क्या कर सकती है? अब मैं क्या करूं?
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जगतार सिंह, चंडीगढ़
उत्तर- इंश्योरेंस का कोई भी मामला हो, इसको सबसे पहले इंश्योरेंस लोकपाल के पास लेकर जाना चाहिए। यह इंश्योरेंस काउंसिल की गवर्निंग बॉडी है जो कि पब्लिक ग्रीवांस के निपटारे के लिए बनाई गई है। यदि इंश्योरेंस लोकपाल के निर्णय से आप संतुष्ट नहीं हैं तो आप कंज्यूमर फोरम जा सकते हैं। क्याोंकि कोई भी कंज्यूमर जिसने इंश्योरेंस पालिसी ली है, वह एक कंज्यूमर माना जाता है।
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प्रश्न- मैंने एक सैलून से अपने बालों की रिबाउंडिंग के लिए सेवाएं लीं। लेकिन मेरे बालों की स्ट्रेटनिंग करने की बजाय सैलून में मेरे बाल जला दिए गए। मेरी बहन की शादी भी इसी दिन थी, इस वजह से मुझे काफी परेशानी हुई। सैलून का मालिक यह गलती मानने को तैयार नहीं है। क्या मैं उसके खिलाफ कंज्यूमर फोरम में जा सकती हूं?
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प्रीती, चंडीगढ़
उत्तर- प्रीती, गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के अंतर्गत सेक्शन 14 (आई) (डी) में कंपनसेशन वर्ल्ड को डिफाइन किया है। इसमें बताया गया है कि कंपनसेशन का अर्थ बड़ा विस्तृत है। इसमें फिजिकल, मेंटल, इमोशनल परेशानी के संग नुकसान और बेइज्जती तक शामिल किए गए हैं। आप इस मामले में जिला कंज्यूमर फोरम में कंपनसेशन की मांग कर सकती हैं।


प्रश्न-
मैं एक केस जिला कंज्यूमर फोरम में फाइल करना चाहती हूं। लेकिन मैं इसमें कोई वकील नहीं करना चाहती। क्या मै अपना मामला खुद लड़ सकती हूं।
मनन, मोहाली
उत्तर- प्रिय मनन, कंज्यूमर कोर्ट में जरूरी नहीं है कि आप किसी वकील की सेवाएं लें। कंज्यूमर फोरम क्वासी ज्यूडीशियल बॉडी है जिसमें कंज्यूमर सीधे अपना मामला लड़ सकते हैं। आपको किसी वकील की सेवाएं लेने की आवश्यकता नहीं है। स्टेट ऑफ कर्नाटक और विश्वाहाराठी हाउस बिल्डिंग कारपोरेशन के बीच मामले में सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया ने निर्णय दिया कि एक कंज्यूमर यदि वकील की सेवाएं नहीं लेना चाहता है तो वह खुद भी मामले को अदालत के सामने रख सकता है।
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