चार साल बाद शाहपुरकंडी बैराज बांध का निर्माण शुरु, 42 महीने में पूरा होगा काम
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जम्मू कश्मीर सरकार के साथ विवाद खत्म होने के बाद गुरुवार को रणजीत सागर बांध परियोजना की दूसरी इकाई शाहपुरकंडी बैराज बांध के निर्माण कार्य शुरू करवा दिया गया। हालांकि चार साल से बंद पड़े प्रोजेक्ट को गति मिलने में दो महीने का समय लगेगा, वहीं प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 42 महीने का समय निर्धारित किया गया है।
गुरुवार को बांध प्रशासन ने सुखमणि साहिब के पाठ करवाकर कंपनी को काम शुरू करने के आदेश जारी किए। ठेकेदार कंपनी सोमा के जनरल मैनेजर पी वेंकटेश का कहना है कि धान की कटाई चल रही है, चार साल काम बंद रहने से लेबर यहां से शिफ्ट होकर किसी अन्य प्रोजेक्ट में लगी हुई है। इसके अलावा चार साल से खड़ी मशीनरी के सभी रबड़ पार्ट खराब हो गए हैं। उनको ठीक करने, लेबर का इंतजाम करने, प्लांट को दोबारा चालू हालत में लाने के अलावा हैवी मशीनरी को चालू करने में लगभग दो महीने का समय लग सकता है। उन्होंने बताया कि शाहपुरकंडी बांध परियोजना का काम विभिन्न विशेषज्ञ टीमों द्वारा किया जाना है।
दो कंपनियां करेंगी निर्माण
बैराज बांध चीफ इंजीनियर जेएस नागी, एसई हेडक्वार्टर सुधीर कुमार गुप्ता और अन्य अधिकारियों ने बैराज बांध का निरीक्षण करके सोमा बरैया कंपनी को निर्माण कार्य शुरू करने के लिए आदेश जारी कर दिए। इस प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए टेक्निकल मंजूरी के साथ प्रशासनिक मंजूरी भी मिल चुकी है। जेएस नागी और एसके गुप्ता ने बताया कि बांध के लिए केंद्र ने नेशनल प्रोजेक्ट के तहत 2715 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।
इसको नए प्राइस इंडेक्स के अनुसार बढ़ाने के लिए मांग भी की गई है। इस प्रोजेक्ट पर जम्मू-कश्मीर के साथ एग्रीमेंट विवाद होने पर 30 अगस्त 2014 को निर्माण कार्य बंद कर दिया गया था। जम्मू-कश्मीर सरकार इसके ढांचे में कुछ बदलाव करना चाहती थी। इसके चलते नए एग्रीमेंट होने पर यह निर्माण कार्य फिर से शुरू करने के लिए सोमा कंपनी को आदेश दे दिए गए हैं। सोमा कंपनी की ओर से बांध निर्माण और गेट बनाने के लिए 680 करोड़ रुपये का ठेका निर्धारित हुआ है। 500 करोड़ रुपये भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड को पावर हाउस बनाने के लिए अनुबंध किया गया है।
पंजाब की लाखों हेक्टेयर भूमि पर हो सकेगी सिंचाई
बांध का निरीक्षण करने पहुंचे नेगी ने बताया कि नए एग्रीमेंट के अनुसार इस बैराज प्रोजेक्ट से जम्मू-कश्मीर को कुल बिजली उत्पादन का 20 प्रतिशत और 1100 क्यूसिक फ्लो पानी का दिया जाएगा। प्रोजेक्ट से जहां पंजाब की लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा, वहीं जम्मू-कश्मीर राज्य की भी 32 हजार एकड़ भूमि को सिंचाई के लिए पानी दिया जाएगा। इस वर्ष आरएसडी का जल स्तर 527 मीटर पहुंचने पर कोई हानि न होने पर धार्मिक कार्यक्रम रखा गया है।