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Chandigarh: पीजीआई में 150 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण शुरू, आपात स्थिति में होगा उपयोग
Thu, 19 Dec 2024 02:07 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 19 Dec 2024 02:07 AM IST
सार
क्रिटिकल केयर ब्लॉक में आइसीयू, आइसोलेशन वार्ड, ऑक्सीजन स्पोर्ट वाले बेड, सर्जिकल यूनिट, दो लेबर रूम, डिलिवरी और रिकवरी रूम और नवजात बच्चों की देखभाल और उनसे जुड़ी बीमारियों के लिए अलग से विभाग रहेगा।
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पीजीआई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ पीजीआई में 150 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण शुरू हो गया है। नर्सिंग इंस्टीट्यूट के पास खाली पड़े स्थान में कार्यदायी संस्था को निर्माण कार्य पूरा करने के लिए तीन साल का समय दिया गया है।
कोविड के दौरान क्रिटिकल केयर की सुविधा की कमी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने पीजीआई में यह ब्लॉक बनाने का निर्देश दिया था, जिसके बाद पीजीआई द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव को स्वीकृति मिली थी। 208 करोड़ की लागत से यह ब्लॉक तैयार किया जाएगा, जिसमें उच्चस्तरीय चिकित्सा के सुविधा प्राप्त होगी।
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत इस ब्लाॅक का निर्माण किया जाएगा। कोरोना महामारी के सरकार ने देशभर में पीजीआई सहित 14 सरकारी अस्पतालों में इस क्रिटिकल केयर ब्लाक बनाने की स्वीकृति दी थी।
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टेंडर के रिक्वेस्ट फॉर प्रोपोजल की शर्तों में पीजीआइ ने ब्लॉक के निर्माण के लिए एस्टीमेट बजट 208 करोड़ रुपये रखा है। इसमें 26 महीने में निर्माण कार्य को पूरा करना होगा। इसके अलावा बाकी समय लायबिल्टी पीरियड के तौर पर रखा है ताकि अगर किसी कारण कोई रुकावट आती है तो इस निर्माण कार्य को तीन साल के अंदर कर लिया जाए। इस ब्लाॅक के निर्माण पर 208 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें सरकार के साथ ही पीजीआई पैसे खर्च करेगा। इसमें से 120 करोड़ रुपये का बजट केंद्र सरकार देगा जबकि बाकी 88 करोड़ रुपये पीजीआई के बजट से लगाया जाएगा।
इसके साथ ही ब्लॉक में मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम, ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट्स, एयर हैंडलिंग यूनिट्स और इंफेक्शन प्रिवेंशन कंट्रोल सिस्टम इंस्टाल होगा। पीजीआई प्रशासन के अनुसार यह एक मल्टी-स्पेशलिटी सेंटर होगा, जिसमें आइसीयू और स्टेप-डाउन यूनिट्स (एसडीयू) होंगी। यहां भर्ती मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। गौरतलब है कि पीजीआई में 300 बेड के न्यूरो साइंस सेंटर के साथ ही 350 बेड के मदर एंड चाइल्ड विंग का भी निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। ऐसे में यहां इलाज के लिए आने वाले रेफर मरीजों को आने वाले दिनों में और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी।
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कोविड के दौरान क्रिटिकल केयर की सुविधा की कमी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने पीजीआई में यह ब्लॉक बनाने का निर्देश दिया था, जिसके बाद पीजीआई द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव को स्वीकृति मिली थी। 208 करोड़ की लागत से यह ब्लॉक तैयार किया जाएगा, जिसमें उच्चस्तरीय चिकित्सा के सुविधा प्राप्त होगी।
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प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत इस ब्लाॅक का निर्माण किया जाएगा। कोरोना महामारी के सरकार ने देशभर में पीजीआई सहित 14 सरकारी अस्पतालों में इस क्रिटिकल केयर ब्लाक बनाने की स्वीकृति दी थी।
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टेंडर के रिक्वेस्ट फॉर प्रोपोजल की शर्तों में पीजीआइ ने ब्लॉक के निर्माण के लिए एस्टीमेट बजट 208 करोड़ रुपये रखा है। इसमें 26 महीने में निर्माण कार्य को पूरा करना होगा। इसके अलावा बाकी समय लायबिल्टी पीरियड के तौर पर रखा है ताकि अगर किसी कारण कोई रुकावट आती है तो इस निर्माण कार्य को तीन साल के अंदर कर लिया जाए। इस ब्लाॅक के निर्माण पर 208 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें सरकार के साथ ही पीजीआई पैसे खर्च करेगा। इसमें से 120 करोड़ रुपये का बजट केंद्र सरकार देगा जबकि बाकी 88 करोड़ रुपये पीजीआई के बजट से लगाया जाएगा।
आपातकाल से संबंधित सभी सुविधाएं होंगी
क्रिटिकल केयर ब्लॉक में आइसीयू, आइसोलेशन वार्ड, ऑक्सीजन स्पोर्ट वाले बेड, सर्जिकल यूनिट, दो लेबर रूम, डिलिवरी और रिकवरी रूम और नवजात बच्चों की देखभाल और उनसे जुड़ी बीमारियों के लिए अलग से विभाग रहेगा। ऐसा इसलिए ताकि इमरजेंसी की स्थिति मरीजों को जरूरत के अनुसार सभी सुविधाएं तत्काल प्रदान की जा सकें।इसके साथ ही ब्लॉक में मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम, ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट्स, एयर हैंडलिंग यूनिट्स और इंफेक्शन प्रिवेंशन कंट्रोल सिस्टम इंस्टाल होगा। पीजीआई प्रशासन के अनुसार यह एक मल्टी-स्पेशलिटी सेंटर होगा, जिसमें आइसीयू और स्टेप-डाउन यूनिट्स (एसडीयू) होंगी। यहां भर्ती मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। गौरतलब है कि पीजीआई में 300 बेड के न्यूरो साइंस सेंटर के साथ ही 350 बेड के मदर एंड चाइल्ड विंग का भी निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। ऐसे में यहां इलाज के लिए आने वाले रेफर मरीजों को आने वाले दिनों में और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी।