संतों से षड्यंत्र: पहले भी होते रहे हैं संतों पर हमले, हत्याएं, विवाद
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अगले वर्ष पंजाब में विधानसभा चुनाव हैं। राजनीति और धर्म का कोई सीधा संबंध नहीं माना जाता। मगर अनुयायी हैं तो उनके वोट भी हैं। इसलिए राजनीतिक दल अपना स्वार्थ साधने के लिए चारों ओर मंडराते हैं। अपने लाभ के हिसाब से वे संतों से जुड़े मामलों को तूल देने की कोशिश करते हैं या फिर दबाते हैं। यहीं से राजनीति शुरू होती है और कुछ संतों पर ‘सरकारी बाबा’ की तोहमत भी लगने लगती है।
पंजाब में डेरों का इतिहास चार सौ साल से ज्यादा पुराना माना जाता है। माना जाता है कि जिन्हें अपने धर्म में बराबरी का दर्जा नहीं मिल रहा था और जाति के नाम पर रोक-टोक से निराश थे, वे तेजी से डेरों की ओर आकर्षित हुए। मौजूदा अनुसूचित जातियों की सूचि के हिसाब से पंजाब में दलित आबादी करीब 37 फीसदी है। इनमें बड़ी संख्या भूमिहीन मजदूरों की है। सिर्फ पांच फीसदी के पास जमीन है।
यह वोट सभी राजनीतिक दलों को लुभाता है और सभी इस वोट बैंक को अपने तरीके से साधने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि नेताओं के इशारे पर भी मामले दबाए और उछाले जाते हैं। पंजाब में प्रभाव रखने वाले संत और उनसे जुड़े विवाद इस तरह हैं।
डेढ़ महीने से कम समय में पंजाब में संतों पर दो बड़े हमले हो चुके हैं। दोनों ही हमले लुधियाना में हुए हैं। 4 अप्रैल को नामधारी समुदाय की माता चंद कौर की गोली मार कर हत्या कर दी गई और 17 मई को सिख प्रचारक संत रंजीत सिंह ढडरियांवाले के काफिले पर हमला किया गया। इसमें संत के सहयोगी बाबा भूपिंंदर सिंह ढक्की साहिब वाले की गोली लगने से मौत हो गई।
इन हत्याओं ओर हमलों से अनुयायियों में नाराजगी है। ये हमले किसी षड्यंत्र का नतीजा है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। पंजाब पुलिस इसकी छानबीन में लगी है। इतना ही नहीं इस माह 13 मई को कनाडा में हुआ एक हादसा निरंकारी समुदाय के लिए दुखद समाचार लाया। मोंट्रियल शहर में हुए हादसे में बाबा हरदेव सिंह और उनके एक दामाद का निधन हो गया।
कई विवादों में घिरे रहे हैं बाबा ढंडरियां वाले
पटियाला-संगरूर रोड पर गुरुद्वारा परमेश्वर द्वार स्थित संत रणजीत सिंह ढडरियां वाले अब तक कई विवादों में घिरे हैं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी मामले में बाबा की गिरफ्तारी हुई थी। करीब चार साल पहले गुरुद्वारा परमेश्वर द्वार में कीर्तन में ढोलकी बजाने वाले एक व्यक्ति ने बाबा की शह पर प्रचारकों द्वारा उसके बाल काटने व मारपीट करने के आरोप लगाए थे। बाबा ने कहा था कि ढोलकी बजाने वाले को गलत काम करते पकड़ा गया था। इसके बाद उसे निकाल दिया गया था। इस कारण वह अब गलत आरोप लगा रहा है।
इसके अलावा मुक्तसर में भी एक व्यक्ति ने आत्महत्या की कोशिश की थी। उसका आरोप था कि बाबा ढडरियां वाले ने ही उनके संत राम रहीम के खिलाफ गलत बोला है। यही नहीं बाबा पर फर्जी होने के भी आरोप लगते रहे हैं कि वह पैसा इकट्ठा करने के लिए संतगिरी करते हैं।
अक्तूबर 2015 में बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी मामले में सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वालों में संत रणजीत सिंह ढडरियां वाले सबसे आगे रहे थे। इस मामले में कोटकपुरा पुलिस ने बाबा ढडरियां वाले को गिरफ्तार भी किया था। उन पर आरोप थे कि बेअदबी मामले के आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर जब धरना दिया जा रहा था, तो बाबा समेत बाकी आरोपियों ने पुलिस वालों से मारपीट की, उनके वाहन तोड़े, ट्रैफिक जाम करके लोगों को परेशान किया।
कौन कहता है कि हमले सुनियोजित नहीं थे
लुधियाना में संतों पर हुए दोनों हमले सुनियोजित थे। दोनों ही मामलों में हमलावर बच निकलने में भी सफल रहे। पुलिस बाद में लकीर पीटती रही। माता चंद कौर की हत्या करने वाले श्री भैणी साहिब में बिना रोकटोक दाखिल हुए थे। फायरिंग करने के बाद वे आसानी से फरार हो गए और कोई बता नहीं सका कि वे किस रास्ते से गए। हत्यारों ने पूरी रेकी की थी। उन्हें जानकारी थी कि माता चंद कौर कब और कहां के लिए निकली हैं।
हत्या को अंजाम देने के लिए वह जगह चुनी जहां सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था। इसी तरह संत रंजीत सिंह ढडरियांवाले पर भी योजना बनाकर हमला किया गया। हमलावरों ने पंजाब सरकार के सीपीएस दर्शन सिंह शिवालिक के पेट्रोलपंप के सामने छबील लगाकर पांच घंटे तक संत के काफिले का इंतजार किया। हमलावरों ने पहले हाथ छोड़ कर छबील पीने के लिए गाड़ी रुकवाई और पूछा कि संत ढढरियां वाले किस गाड़ी में है। उसके बाद उस गाड़ी पर हमला किया गया।
संत रामानंद को ऑस्ट्रिया में मारी गई थीं गोलियां
शिष्या से दुराचार के आरोप में भगोड़ा बाबा मेजर सिंह
फतेहगढ़ साहिब के बस्सी पठाना के गांव भुच्ची स्थित नथमलपुरा डेरे के संचालक बाबा मेजर सिंह अपनी ही शिष्या से दुराचार के आरोप में भगोड़ा घोषित हैं। बाबा और उसके शिष्य सुखदीप तथा तीन श्रद्धालुओं पर बस्सी पठाना पुलिस ने 13 दिसंबर 2013 को 22 वर्षीय विवाहिता शिष्या की शिकायत पर दुराचार सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। पीड़िता की शिकायत के अनुसार पहले बाबा ने अपने शिष्य सुखदीप से उसकी शादी करवाई और फिर प्लान के मुताबिक पति के सहयोग से उसके साथ दुराचार किया। पति ने भी उससे कहा कि उसने शादी सिर्फ बाबा के लिए की है।
पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला तो दर्ज किया मगर सभी आरोपी फरार हैं। इस मामले में इस साल दो जनवरी को विभिन्न सिख संगठनों ने बाबा के खिलाफ विशाल रोष मार्च निकाला था तथा पुलिस को मांगपत्र सौंपा था। अब सेशन कोर्ट ने आरोपियों को भगोड़ा करार दे दिया है। गत 28 अप्रैल को पीड़िता के पिता से भी मारपीट की गई। इस संबंध में जिले के नए एसएसपी एचएस भुल्लर का कहना है कि उन्होंने अभी तक फाइल नहीं देखी है। उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जा सकती है।
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान से जुड़ा विवाद सुर्खियां बना था
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान से जुड़ा विवाद पिछले लोकसभा चुनाव से पहले सुर्खियां बना था। 29 जनवरी, 2014 को डॉक्टरों की एक टीम ने संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज को क्लीनिकल डेड घोषित कर दिया था मगर अनुयायियों का कहना था कि महाराज गहन समाधि में हैं।
जब तक महाराज स्वयं नहीं उठते यह समाधि जारी रहेगी। उनके शरीर को डीप फ्रीजर में रखा गया है। यह विवाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 1 दिसंबर 2014 को आदेश जारी किए थे कि पंद्रह दिन में आशुतोष महाराज का अंतिम संस्कार किया जाए। अदालत के इस फैसले पर संस्थान के अनुयायी भड़क उठे थे और खुद की सुरक्षा लगाकर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ जाने वाले रास्ते तक को बंद कर दिया गया था। इसके बाद संस्थान की तरफ से डबल बेंच में दायर याचिका के बाद महाराज के संस्कार पर रोक लगा दी गई थी। अब भी यह मामला अदालत में विचारधीन है।
बाबा प्यारा सिंह भनियारावाला रोपड़ के बाबा प्यारा सिंह भनियारावाला करीब डेढ़ दशक पहले विवादों में आए। नूरपुरबेदी के गांव धमाना में उनका डेरा है। बाबा पर दो बार हमले हुए। पुलिस ने उनके खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने के मामले भी दर्ज किए। 24 सितंबर 2003 को गांव धमाना स्थित डेरे पर दो युवकों ने बाबा पर तेजधार हथियार से हमला किया। उनकी गर्दन पर चोट आई और उन्हें पीजीआई रैफर किया गया। इसके बाद जनवरी 2005 में डेरे के गेट पर बम विस्फोट किया गया, जिसमें बब्बर खालसा के आतंकवादी जगतार सिंह हवारा के खिलाफ मामला दर्ज हुआ।
बाबा भनियारा वाले को सुरक्षा मिली हुई है। एक समय बाबा के श्रद्धालुओं की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही थी मगर 17 दिसंबर 2001 मोरिंडा थाने में और 18 अप्रैल 2002 को नूरपुरबेदी में भनियारावाला पर पावन स्वरूप की बेअदबी का मामला दर्ज किया गया। उसके बाद श्रद्धालु कम होते गए। एक मामले में अंबाला की अदालत ने तीन साल की सजा भी सुनाई। बाबा पशु-पक्षी प्रेमी माने जाते हैं। उन्होंने पशु-पक्षियों के लिए जंगल में तलाब बनवाए हैं। बाबा की ओर से पक्षियों के लिए से रोज जंगलों और खुले इलाकों में सतअनाज डलवाया जाता है।
डेरा प्रेमियों को पिलाया था जाम ए इंसा
बठिंडा जिले के गांव सलाबतपुरा में स्थित डेरा सिरसा की ब्रांच साल 2007 के बाद से लगातार चर्चा में रही। यहां पर मई 2007 में डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम सिंह आए थे। समागम के दौरान उन्होंने सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह की तरह पोशाक पहन कर सलाबपुरा नाम चर्चा घर में पहुंचे डेरा प्रेमियों को जाम ए इंसा पिलाया था। यह मामला सामने आने के बाद बठिंडा निवासी रजिंदर सिंह सिद्धू ने डेरा मुखी के खिलाफ पुलिस के पास शिकायत दर्ज भी करवाई थी। उसके बाद लगातार सिखों और डेरा प्रेमियों के बीच पूरे पंजाब भर में झड़पें होती रहीं।
बठिंडा में 14 मई को डेरा प्रेमियों और सिखों के बीच जबरदस्त झड़प हो गई थी। इसके बाद 16 और 17 मई 2007 को दो दिन बठिंडा में पुुलिस प्रशासन की ओर से स्थिति को काबू करने के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया था। इस पूरे प्रकरण के बाद गर्म खयाली सिख जत्थेबंदियों ने सिख संगतों को डेरा प्रेमियों का पूरी तरह से सामाजिक बायकाट का एलान कर दिया था। श्री अकाल तख्त साहिब से भी डेरा प्रेमियों के विरोध में हुक्मनामा जारी कर दिया गया था। डेरा प्रेमियों और सिख संगतों के बीच हुई झड़पों के दौरान काफी लोग गंभीर घायल हो गए थे। इसके अब फिर यह विवाद उस समय भड़क गया था जब बीते साल डेरा मुखी को अकाल तख्त की ओर से माफी दे दी गई थी।
वहीं मामला बढ़ता देख अकाल तख्त ने डेरा मुखी को दी गई माफी को रद्द कर दिया था। डेरा मुखी के खिलाफ सिखों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप में बठिंडा की अदालत में चल रहे केस के दौरान कई बार तनावपूर्ण हालात बने थे। 2015 के आखिर में अदालत ने इस केस को खारिज कर दिया था। वहीं इसके बाद सिख प्रचारक बाबा हरदीप सिंह ने अपने वकील नवकरण सिंह के जरिये सिख भावनाओं को आहत करने के आरोप में डेरा मुखी के खिलाफ याचिका दायर कर दी थी।
जिसकी अगली पेशी अदालत की ओर से 8 अगस्त 2016 तय की गई है। बाबा हरदीप सिंह ने कहा कि जो डेरा मुखी ने किया है उसकी उसे हर हालत में सजा मिलनी चाहिए। इसके बाद ही सिखों को इंसाफ मिल सकेगा और तब तक उनका डेरा मुखी के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा जब तक इस केस में वह उन्हें सजा नही करवा देते।