पंजाब विधानसभा चुनाव: रूठे प्रवासियों को मनाएंगे सियासतदान, चुनावी घोषणा पत्र में देंगे विशिष्ट स्थान
भारतीय जनता पार्टी भी लगातार एनआरआई को रिझाने के लिए कई चुनावी वादे कर चुकी हैं। सिर्फ कांग्रेस ही है जिसने अभी तक अपने घोषणा पत्र में एनआरआई को विशिष्ट स्थान देने की योजना बनाई है।
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पंजाब की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले रूठे प्रवासियों (एनआरआई) को मनाने में सियासतदान जुट गए हैं। इसके लिए सभी राजनीतिक दल अपने-अपने चुनावी घोषणा पत्र में एनआरआई की समस्याओं को दूर करने के लिए वादे करते नजर आएंगे।
कांग्रेस भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में एनआरआई के कानूनी अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए विशिष्ट स्थान देगी। राज्य में एनआरआई की संपत्ति के लगभग 10 हजार मामले लंबित पड़े हैं। इसके अलावा भी कई अन्य समस्याओं से जूझ रहे एनआरआई 2022 में हो रहे चुनावी रण में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
वैसे तो पंजाब सभी राजनीतिक दलों के लिए खास स्थान रखता है लेकिन कांग्रेस पंजाब को लेकर काफी आशान्वित है। इसका कारण है कि अभी पंजाब में कांग्रेस की सत्ता है। 5 राज्यों में कांग्रेस को सबसे ज्यादा यहीं पर ही सत्ता में वापसी की उम्मीद भी है। यही वजह है कि वह सूबे के चुनावों में अहम भूमिका निभाने वाले एनआरआई को लेकर खास योजना बना रही है। कांग्रेस एनआरआई भारतीयों के लिए विशिष्ट घोषणापत्र तैयार कर रही है।
पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू प्रवासी भारतीय कांग्रेस के मंच पर एनआरआई के साथ बातचीत के दौरान यह कह चुके हैं कि एनआरआई कांग्रेस की प्राथमिकता में है। उनके कानूनी अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए पार्टी घोषणा पत्र में विशिष्ट स्थान देगी। कांग्रेस पार्टी का लक्ष्य एनआरआई की संपत्तियों को हड़पने से जुड़े मामलों को तेजी से ट्रैक करने के लिए एक ट्रिब्यूनल को स्थापित करना है।
घोषणापत्र में खासतौर पर एनआरआई के लिए कानूनी सहायता केंद्र, सातों दिन और 24 घंटे की हेल्पलाइन व्यवस्था और संपत्ति का लेन-देन मुक्त जैसे अहम मुद्दों को शामिल किया जाएगा। सिद्धू कह चुके हैं कि सरकार के पास कोई डेटाबेस नहीं है इसलिए शिकायतों के जल्द से जल्द निवारण के लिए सिंगल विंडो का गठन किया जाएगा।
साथ ही एक एनआरआई आयोग में वित्तीय भेदभाव, वैवाहिक विवाद और शोषण से संबंधित मामले एनआरआई सुलझा पाएंगे। इसके अलावा आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी भी लगातार एनआरआई को रिझाने के लिए कई चुनावी वादे कर चुकी हैं। सिर्फ कांग्रेस ही है जिसने अभी तक अपने घोषणा पत्र में एनआरआई को विशिष्ट स्थान देने की योजना बनाई है।
2019 के चुनाव से दूर होना हुए शुरू
2017 के विधानसभा चुनाव में शामिल होने के लिए पंजाब में एनआरआई अपनी नौकरी और कारोबार तक छोड़ आए थे लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई अमल नहीं होने के कारण 2019 के लोकसभा चुनाव से उन्होंने दूरी बनानी शुरू कर दी थी। 2022 में राजनीतिक दलों को उम्मीद है कि एनआरआई का साथ मिलेगा लेकिन अधिकांश एनआरआई चुनाव से दूर हैं।
एनआरआई का गढ़ दोआबा
पंजाब में एनआरआई का गढ़ दोआबा है। यहां 90 प्रतिशत घरों के लोग विदेश में रहकर कारोबार या शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सूबे की 34 ऐसी विधानसभा सीटों को चिह्नित किया गया है जिन पर एनआरआई का खासा प्रभाव है। 2017 के चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनाने में एनआरआई ने अहम भूमिका निभाई थी।
भगोड़ी दुल्हनों का लोकसभा में उठा था मुद्दा
दूल्हों के बाद अब पंजाब में दुल्हनों द्वारा पतियों के उत्पीड़न का मुद्दा लोकसभा में कांग्रेस उठा चुकी है। पंजाब कांग्रेस सांसद जसबीर सिंह गिल ने लोकसभा में एक नोटिस देकर प्रवासी भारतीय दुल्हनों द्वारा पतियों के कथित उत्पीड़न पर चर्चा की मांग की है।
हमारे पास भगोड़े पतियों को दंडित करने का तो कानून है लेकिन गहरे मानसिक और आर्थिक घाव देने वाली लड़कियों को दंडित करने का कोई कानून नहीं है। इसके लिए हमें कानून लाना चाहिए। जसबीर सिंह गिल, सांसद, कांग्रेस
एनआरआई कई साल से अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं। निदान नहीं होने के कारण 10 हजार से अधिक संपत्ति के मामले लंबित हैं। चुनाव में तो इन मुद्दों पर सियासी दल चर्चा करते हैं लेकिन चुनाव के बाद फिर वही हालात हो जाते हैं। - करन रंधावा, सलाहकार, एनआरआरई विभाग, पंजाब