पटियाला में मनीष तिवारी बोले- धर्म निरपेक्षता और संविधान के सिद्धांतों पर बड़ी चुनौती पैदा हुई
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श्री आनंदपुर साहिब से सांसद मनीष तिवारी ने सोमवार को कहा कि वर्तमान में भारत के धर्म निरपेक्षता के बुनियादी विचार और संविधान के सिद्धांतों को बड़ी चुनौती पैदा हो गई है जो गंभीर चिंता का विषय है। वह सोमवार को पटियाला के सरकारी महिंदरा कॉलेज में भारत में राजनीति व शासन के सम्मुख समकालीन मुद्दे व चुनौतियां-उभरती तब्दीलियां और भविष्यी एजेंडा विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कॉलेज प्रिंसिपल डा. सिमरत कौर, पंजाब गौ सेवा आयोग के चेयरमैन सचिन शर्मा और पंजाब लारज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन पवन दीवान की मौजूदगी में कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। कॉन्फ्रेंस में पैनल चर्चा हुई और पांच तकनीकी सैशन के दौरान 120 शोध पत्र पढ़े गए। तिवारी ने कहा कि इस कॉलेज साथ उनकी भावुक सांझ है, क्योंकि उनके माता-पिता दोनों इसी कॉलेज के स्टूडेंट्स रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद यह सबसे बड़ा संवेदनशील मौका बना है, जब देश के बुनियादी सिद्धांत को चुनौतियां पेश हैं। साथ ही कहा कि भारत की नागरिकता का आधार धर्म नहीं हो सकता, क्योंकि 1947 के बंटवारे समय इस्लामिक पाकिस्तान और धर्म निरपेक्ष भारत का सृजन हुआ था, जबकि सीएए देश के संविधान के सिद्धांतों को ही रद्द करता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने अनुच्छेद 370 खत्म करने समेत नागरिकता संशोधन एक्ट, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर जरिये देश के नागरिकों के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी की हैं। साथ ही कहा कि कुदरती साधनों के साथ हो रहा खिलवाड़ भी बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, इस पर भी गंभीर चिंतन की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सरकारों को देश के प्रशासकीय ढांचे में बड़े बदलाव की भी जरूरत है। उन्होंने देश में बढ़ती बेरोजगारी की समस्या पर भी चिंता जताई। आगे कहा कि मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद कर दी है। सीएए, एनआरसी भी नोटबंदी की तरह ही लोगों को लाइनों में खड़ा करने की कार्रवाई है, ताकि लोग सरकार की नाकामियों की तरफ उंगली न करें और आपस में ही उलझे रहें।
‘दिल्ली में लगातार तीसरी हार पर विचार की जरूरत’
सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि दिल्ली के विधानसभा चुनावों में लगातार तीसरी बार कांग्रेस की हार चिंताजनक विषय है और इस पर पार्टी को गंभीर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की कद्दावर नेता स्वर्गीय शीला दीक्षित ने जो दिल्ली को विकास का मॉडल दिया था, उसे आज तक कोई नहीं छू पाया।