{"_id":"6069b7964398fe68376e4d5d","slug":"congress-mla-navjot-singh-sidhu-opposes-direct-payment-system-of-crop-procurement-to-farmers","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोदी सरकार पर सिद्धू का हमला : किसानों को सीधे भुगतान का किया विरोध, बोले- यह फैसला एक बड़ा षड्यंत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोदी सरकार पर सिद्धू का हमला : किसानों को सीधे भुगतान का किया विरोध, बोले- यह फैसला एक बड़ा षड्यंत्र
Sun, 04 Apr 2021 06:32 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Sun, 04 Apr 2021 06:32 PM IST
सार
- पंजाब के हालात खराब करना व लोगों को में बांटना चाहता है केंद्र : नवजोत
- सहकारी संघवाद एक लॉलीपाप है, जिसे पंजाब के किसान भलीभांति समझते हैं
- पटियाला में अपने आवास पर मीडिया से मुखातिब हुए विधायक नवजोत सिद्धू
विज्ञापन
नवजोत सिंह सिद्धू।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री व कांग्रेस विधायक नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि सहकारी संघवाद एक लालीपॉप है। दरअसल, केंद्र सरकार का निशाना पंजाब के हालात को खराब करना और शांति को भंग करना है। अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर लोगों को बांटना है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को किसान संगठनों व अन्य वर्गों से मिलकर एक ऐसा आर्थिक मॉडल खड़ा करना चाहिए, जिससे पंजाब तरक्की की राह पर चल सके। साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि अगर केंद्र ने सीधा भुगतान किया तो 30 फीसदी किसानों को एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) नहीं मिल सकेगा। सिद्धू रविवार दोपहर को पटियाला स्थित अपने आवास पर मीडिया से मुखातिब हो रहे थे।
विज्ञापन
सिद्धू ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को लिखे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के पत्र को झूठा करार दिया और कहा कि इसका एकमात्र मंसूबा दशकों पुरानी मंडी व्यवस्था को खत्म कर प्रदेश के किसानों व आढ़तियों में फूट डालना है। सिद्धू ने कहा कि केंद्र का किसानों को सीधे भुगतान का फैसला एक षड्यंत्र है। इससे पंजाब के 30 फीसदी किसानों को एमएसपी का भुगतान नहीं हो सकेगा, क्योंकि वह ठेके पर खेती कर रहे हैं और खास बात यह है कि इनमें से ज्यादातर ठेके मौखिक आधार पर हैं।
विज्ञापन
सिद्धू ने कहा कि केंद्र सरकार जिन किसानों की भलाई के लिए इन कृषि कानूनों को लाने का दावा कर रही है, उनसे इसके बारे में पहले बात क्यों नहीं की गई। इससे साफ है कि केंद्र इन कानूनों के जरिये अपने मित्र कारपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाना चाहता है। उनकी साजिश मंडियों के निजीकरण और मंडी व्यवस्था को तबाह करने की है। लेकिन पंजाब का किसान इसके खिलाफ जब एकजुट हो गया है तो केंद्र उन्हें ही बदनाम करने और उनके आंदोलन को खत्म करने की साजिशें रच रहा है। सिद्धू ने सवाल किया कि क्या मोदी सरकार में शांतिपूर्ण आंदोलन करना गुनाह है।
विज्ञापन
लॉकडाउन में मोदी सरकार की इंसानियत कहां थी
प्रवासी मजदूरों को नशा देकर काम करने के आरोपों पर सिद्धू ने कहा कि लॉकडाउन में जब मोदी सरकार ने हजारों मजदूरों को नंगे पांव भूखे प्यासे सड़कों पर चलाया और इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई तो क्या वह मानवाधिकारों का हनन नहीं था। उस समय मोदी सरकार की इंसानियत कहां थी। बता दें कि गृह मंत्रालय ने पंजाब के सीमावर्ती जिलों के किसानों पर मजदूरों से बंधुआ मजदूरी कराने के संगीन आरोप लगाए थे।