पंजाब में सियासत: कैप्टन का सिरदर्द बने बेअदबी व कोटकपूरा मामले, कांग्रेस विधायक ही उठा रहे सवाल
सिसवां स्थित अपने फार्म हाउस पर मालवा के करीब 30 कांग्रेस विधायकों के साथ वन टू वन मीटिंग में सभी विधायकों ने अपने हलकों के विकास कार्यों और कमियों का ब्योरा मुख्यमंत्री के सामने रखा, वहीं सभी एक सुर में बेअदबी और कोटकपूरा मामले को जल्द उसके अंजाम तक पहुंचाने की मांग की।
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए बेअदबी और कोटकपूरा गोलीकांड के मुद्दे सिरदर्द बन गए हैं। मंगलवार को सिसवां स्थित अपने फार्म हाउस पर मालवा के करीब 30 कांग्रेस विधायकों के साथ वन टू वन मीटिंग में सभी विधायकों ने अपने हलकों के विकास कार्यों और कमियों का ब्योरा मुख्यमंत्री के सामने रखा, वहीं सभी एक सुर में बेअदबी और कोटकपूरा मामले को जल्द उसके अंजाम तक पहुंचाने की मांग की। कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री से साफ कहा कि इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच राज्य सरकार की किरकिरी हो रही है और पार्टी पर आरोप लगने लगे हैं कि कांग्रेस बेअदबी और कोटकपूरा कांड के दोषियों का बचाव कर रही है।
गौरतलब है कि मंगलवार को मुख्यमंत्री के लिए यह पहला मौका रहा, जब पार्टी के विधायकों ने खुलकर इस मुद्दे पर उन्हें सवालों के घेरे में लिया। हालांकि मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों को भरोसा दिया कि इस पूरे मामले को समय रहते हल कर लिया जाएगा, लेकिन विधायकों का कहना था कि राज्य सरकार को जल्द हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ले जाना चाहिए, क्योंकि विपक्ष ने इस मुद्दे को कांग्रेस के खिलाफ बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए जनता में यह प्रचार शुरू कर दिया है कि कांग्रेस सरकार बादल परिवार से मिलीभगत कर मामले को लटकाना चाहती है।
विधायकों ने मुख्यमंत्री से यह भी कहा कि विपक्ष के प्रचार के चलते लोगों में धारणा बनती जा रही है कि प्रदेश सरकार भी इस मामले को केवल जांच कराते रहने तक सीमित रखना चाहती है और दोषियों का बचाव कर रही है। विधायकों ने साफ कहा कि यह मामला सिख समुदाय से जुड़ा है और अगर राज्य सरकार दोषियों को सजा नहीं दिला सकी तो उसे अगले चुनाव में इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
प्रदेश कांग्रेस प्रधान भी दोषियों को सजा दिलाने के पक्ष में
इस वन टू वन मीटिंग के दौरान सिसवां फार्म हाउस में प्रदेश कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ भी मौजूद थे, जिन्होंने विधायकों का पक्ष लेते हुए मुख्यमंत्री को स्पष्ट कर दिया कि आरोपियों को सजा दिलाए बिना मामला समाप्त नहीं होगा और कांग्रेस के लिए आने वाले दिनों में जनता को जवाब देना भारी पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों को जनता के बीच जाना है, इसलिए जितनी जल्दी हो सके, दोषियों को सजा दिलाई जाए।
उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार की छवि तभी सुधर सकेगी अगर दोषियों को सजा दिलाई गई। फिर भले ही दोषी अफसर हों या सियासी नेता। बैठक में मौजूद विधायक अमरिंदर राजा वडिंग ने भी कहा कि सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए, क्योंकि सरकार का कार्यकाल भी समाप्त होता जा रहा है। ऐसे में जल्द कार्रवाई बहुत जरूरी है।
कैप्टन आज मिलेंगे माझा और दोआबा के विधायकों से
मुख्यमंत्री की प्रदेश के कांग्रेसी विधायकों से वन टू वन मुलाकात बुधवार को भी जारी रहेगी। बुधवार को माझा और दोआबा के कांग्रेस विधायकों को सिसवां स्थित फार्म हाउस में बुलाया गया है। हालांकि मुख्यमंत्री इस मुलाकात के जरिये पार्टी विधायकों से उनके हलकों की समस्याओं और आगामी चुनाव को लेकर जरूरी रणनीति पर चर्चा करना चाहते हैं। माना जा रहा है कि मंगलवार की बैठक की तरह ही मुख्यमंत्री को माझा व दोआबा के विधायकों से भी बेअदबी और कोटकपूरा गोलीकांड के मामलों पर तेज कार्यवाही की मांग का ही सामना करना पड़ेगा।
हाईकोर्ट का फैसला न्यायिक नहीं राजनीतिक : सीएम
रंधावा और जाखड़ का इस्तीफा रद्द कर दिया : कैप्टन
कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और सुनील जाखड़ की तरफ से इस्तीफा दिए जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने इसे रद्द कर दिया है। वहीं, बेअदबी मामले में देरी के सवाल पर कैप्टन ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के हाल के फैसले का बेअदबी के मामलों से कोई संबंध नहीं है। यह फैसला कोटकपूरा गोलीकांड से संबंधित है। बेअदबी केस चल रहे हैं और इनमें कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। यह पिछली अकाली सरकार थी, जिसने केस सीबीआई को सौंप दिए थे और मौजूदा कांग्रेस सरकार केस की फाइलें वापस लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची थी।