पंजाब: हाईकमान को अमरिंदर सिंह पर भरोसा लेकिन नाराज सिद्धू को मंत्रिमंडल या संगठन में मिल सकती जगह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 05 Jun 2021 12:44 AM IST

सार

शुक्रवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह तीन सदस्यीय कमेटी के सामने पेश होने वाले सबसे अंतिम नेता थे। पता चला है कि कैप्टन ने कमेटी के सामने अपने सभी विधायकों का रिपोर्ट कार्ड पेश करने के साथ-साथ नाराज नेताओं की मंशा पर कई सवाल उठाए हैं। 
कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू।
कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू। - फोटो : फाइल
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विस्तार

पंजाब कांग्रेस के अंतर्कलह के मुद्दे पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह शुक्रवार को उच्च स्तरीय समिति के समक्ष अपनी बात रखी। समिति सदस्य राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, वरिष्ठ नेता जयप्रकाश अग्रवाल और राज्य के प्रभारी महासचिव हरीश रावत के साथ करीब तीन घंटे चली बैठक में कैप्टन ने सभी विधायकों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया और नाराज नेताओं की मंशा पर सवाल उठाए। बाहर आकर कैप्टन ने बैठक के संबंध में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार 
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हाईकमान ने एक तरफ तो कैप्टन के नेतृत्व और क्षमता में पूरा भरोसा जताते हुए साफ कर दिया है कि कैप्टन ही सरकार और पार्टी का चेहरा होंगे, वहीं नवजोत सिद्धू समेत नाराज नेताओं की अनदेखी करने से भी इंकार कर दिया है। यानी कैप्टन के विरोध के बावजूद हाईकमान नाराज नेताओं को भी पंजाब कांग्रेस में पूरी तवज्जो और सम्मान देने की तैयारी में जुट गया है।


जानकारी के अनुसार, हाईकमान ने पंजाब मंत्रिमंडल में फेरबदल और पंजाब कांग्रेस संगठन के पुनर्गठन में नाराज नेताओं को सम्मानजनक स्थान देने का मन बना लिया है। ऐसे में नवजोत सिंह सिद्ध् को कैप्टन मंत्रिमंडल में मंत्री पद की पेशकश हो सकती है। हालांकि सिद्धू ने 2019 में मंत्री पद ठुकराते हुए कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।

इस बार भी सिद्धू अगर नहीं माने तो उन्हें प्रदेश संगठन की कमान सौंपने के कयास लगाए जाने लगे हैं। इसके साथ ही हाईकमान ने पंजाब के सीनियर नेताओं को भी पार्टी में तरजीह देने का मन बना लिया है ताकि चुनाव में सीनियर नेताओं की जनता के बीच बनी साख का फायदा उठाया जा सके। 

वहीं, इन दोनों ही स्थितियों में कैप्टन का नाराज होना तय है लेकिन हाईकमान का मानना है कि फिलहाल विवाद को शांत करना बहुत जरूरी है ताकि 2022 के चुनाव के लिए माहौल में एकजुट कांग्रेस की सक्रियता बढ़ाई जा सके।

इससे पहले बीते तीन दिनों के दौरान कमेटी ने पंजाब के सभी कांग्रेस विधायकों, मंत्रियों, सांसदों, सीनियर नेताओं को बुलाकर प्रदेश कांग्रेस के मौजूदा विवाद और उसे हल करने के उपायों पर उनकी राय ली थी। इस संबंध में पता चला है कि कैप्टन से नाराज नेताओं के अलावा वे नेता जो कैप्टन के पक्षधर हैं, उन्होंने भी बेअदबी और नशे संबंधी वादों के पूरा न होने का कारण जनता के बीच जाने में कठिनाई की बात कमेटी के सामने रखी है। 

इस तरह, एक तरफ तो नाराज नेताओं के तर्कों को हाईकमान के सामने बल मिला है, वहीं कैप्टन के कामकाज के तरीके पर सवालिया निशान भी लग गए हैं। शुक्रवार को तीन घंटे की बैठक के बाद कैप्टन ने इतना ही कहा कि हर बात मीडिया के सामने नहीं हो सकती। वैसे, कैप्टन ने यह भी कहा कि पंजाब में छह महीने में चुनाव होने हैं, उसी सिलसिले में इस बैठक में बातचीत हुई है।
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