पंजाब: 62 विधायक थे कैप्टन के खिलाफ, पहले ही हो चुका था हटाने का फैसला, भनक लगी तो अमरिंदर ने दिया इस्तीफा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 20 Sep 2021 01:03 AM IST

सार

शनिवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दिया लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने शुक्रवार को ही उन्हें पद से हटाने का फैसला कर लिया था। 62 विधायकों के हस्ताक्षर वाले एक पत्र ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की मुश्किलों को बढ़ाने का काम किया। हाईकमान ने चंडीगढ़ में विधायक दल की बैठक बुलाई। कैप्टन अमरिंदर सिंह को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने अपना इस्तीफा देने का फैसला किया। 
कैप्टन अमरिंदर सिंह। (फाइल फोटो)
कैप्टन अमरिंदर सिंह। (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार

कांग्रेस हाईकमान ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने का फैसला शुक्रवार को ही ले लिया था। इस बात की पुष्टि पार्टी मामलों के प्रभारी हरीश रावत ने रविवार को चंडीगढ़ में की। कैप्टन को हटाने का फैसला नई दिल्ली में उस पत्र के आधार पर लिया गया, जिसे अजय माकन ने राहुल गांधी को सौंपा था। इस पत्र में पंजाब के 62 विधायकों के हस्ताक्षर थे और सबने कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग की थी। इसी आधार पर हाईकमान ने शनिवार को विधायक दल की चंडीगढ़ में बैठक बुलाई, अन्यथा सिद्धू-कैप्टन विवाद सुलझाने के लिए हाईकमान द्वारा हर बार विधायकों को नई दिल्ली बुलाकर बैठक की जाती थी। 
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शुक्रवार को दिल्ली में तय हुई रणनीति की भनक कैप्टन को नहीं लग सकी। उन्हें पूरा मामला शनिवार सुबह समझ में आया जब हरीश रावत द्वारा देर रात किए गए ट्वीट में विधायक दल की चंडीगढ़ में बुलाए जाने वाली बैठक का जिक्र किया गया। साफ हो गया था कि विधायक दल की बैठक में असंतुष्ट विधायकों द्वारा कैप्टन को हटाए जाने की मांग की जाएगी और इसके लिए हाईकमान द्वारा तीन पर्यवेक्षक भी तैनात कर दिए गए थे। कैप्टन ने भी आनन-फानन अपने समर्थकों की जोड़ने की कोशिश के तहत पहले सिसवां में बैठक बुलाने का फैसला किया लेकिन बाद में चंडीगढ़ स्थित अपने सरकारी आवास पर बैठक रखी। 


इस बैठक में ही कैप्टन ने महसूस किया कि उनके पास समर्थकों की कमी है। दरअसल, इस बैठक में पांच मंत्रियों के अलावा एक दर्जन विधायक ही पहुंचे। हालात को भांपते हुए कैप्टन ने विधायक दल की बैठक से पहले ही राज्यपाल से मिलकर अपना इस्तीफा उन्हें सौंप दिया। यह भी पता चला कि शुक्रवार को हाईकमान ने पार्टी के कानूनविद से यह राय भी ली थी कि अगर कैप्टन ने राज्यपाल से मिलकर विधानसभा भंग करने की सिफारिश की तो क्या होगा? इसके साथ ही राहुल गांधी ने हरीश रावत को चंडीगढ़ पहुंचकर नया मुख्यमंत्री चुनने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा था।

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