सिद्धू का आक्रामक अंदाज खुद पर भारी: आलाकमान की नसीहत- बयानबाजी से पहले पार्टी के हित में सोचें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 29 Jul 2021 11:08 PM IST

सार

बुधवार को नवजोत सिंह सिद्धू पार्टी हाईकमान से मिलने दिल्ली पहुंचे। यहां हाईकमान ने नवजोत सिंह सिद्धू को नसीहत दे डाली और उनसे पार्टी के अन्य नेताओं के साथ तालमेल बनाकर चलने को कहा गया है। आलाकमान का मानना है कि सिद्धू के तौर-तरीके से पंजाब कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। 
नवजोत सिंह सिद्धू। (फाइल फोटो)
नवजोत सिंह सिद्धू। (फाइल फोटो) - फोटो : twitter
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विस्तार

पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू का आक्रामक अंदाज उन्हीं पर भारी पड़ रहा है। उन्हें आलाकमान ने साफ तौर पर कह दिया कि बयानबाजी से पहले पार्टी के हित में सोचें और पार्टी के मुद्दों पर सार्वजनिक बयानबाजी बंद करें। साथ ही सिद्धू को पार्टी के अन्य नेताओं से तालमेल कर मुद्दों को सुलझाने का निर्देश दिया गया है। सिद्धू की बुधवार देर शाम आलाकमान से मुलाकात हुई। सिद्धू प्रदेश कांग्रेस के लिए अगली रणनीति पर विचार-विमर्श करना चाहते थे लेकिन आलाकमान ने उलटे उनकी क्लास लगाकर पाठ पढ़ा दिया है कि  प्रदेश इकाई के प्रधान को किस तरह से कामकाज करना चाहिए।
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पार्टी सूत्रों ने बताया कि आलाकमान ने सिद्धू द्वारा कैप्टन को पांच मुद्दों का पत्र सौंपने और फिर उसे सार्वजनिक करने के मामले को भी गंभीरता से लिया है। आलाकमान का मानना है कि सिद्धू के तौर-तरीके से पंजाब कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। इसीलिए सिद्धू को नसीहत दी है कि वे मुख्यमंत्री और विधायक दल के नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ मिलकर काम करें और किसी भी मामले में यह न लगे कि दोनों के बीच मतभेद हैं।


राजनेता के बजाय एक आंदोलनकारी नेता के रूप में दिखाई दिए
सिद्धू ने आक्रामक अंदाज में प्रधान का पद संभाला और पद संभालते ही अपने पहले भाषण में क्रांतिकारी ढंग से सब कुछ बदल डालने के इरादे स्पष्ट किए, उससे सिद्धू एक सुलझे हुए राजनेता के बजाय एक आंदोलनकारी नेता के रूप में दिखाई दिए। उन्होंने कैप्टन की अनदेखी करते हुए पार्टी अध्यक्ष के रूप में खुद ही पंजाब कांग्रेस में धड़ेबंदी को मजबूत होने का मौका भी दे दिया।

सिद्धू ने कैप्टन से अपनी पहली मुलाकात के दौरान भी जिन पांच मुद्दों को उठाया, ये वही मुद्दे हैं, जिन्हें लेकर वे लंबे समय तक अपने ट्वीट के जरिए कैप्टन पर हमलावर रहे थे। इन मुद्दों को कांग्रेस ने पिछले चुनाव में अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था। सिद्धू इन मुद्दों को बार-बार सार्वजनिक कर कांग्रेस की छवि को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं।

सिद्धू को ही मिला आलाकमान से मिलने का मौका
आलाकमान से मिलने पहुंचे नवजोत सिद्धू के साथ पंजाब के दो कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा भी थे लेकिन आलाकमान दोनों मंत्रियों से मुलाकात नहीं की और केवल सिद्धू को ही मिलने का मौका दिया गया। सुखजिंदर रंधावा उस समय से ही सिद्धू के साथ हैं, जब से सिद्धू ने पंजाब में कैप्टन के खिलाफ मोर्चा खोला था। 

रंधावा ने ही बीते सप्ताह पंजाब कांग्रेस भवन में सिद्धू की प्रधान पद पर ताजपोशी के कार्यक्रम का संचालन भी किया था। लेकिन बुधवार को नए प्रधान के साथ नई दिल्ली पहुंचे रंधावा को आलाकमान ने कोई तरजीह नहीं दी। तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा भी कैप्टन को सिद्धू के सुलह का सलाह देकर इस मामले में बीच का रास्ता अपनाकर चलते रहे। सिद्धू को प्रधान घोषित किए जाने के बाद वे भी खुलकर सिद्धू के पक्ष में आ गए। चंडीगढ़ में सिद्धू ने शक्ति प्रदर्शन तृप्त बाजवा के आवास पर ही किया था, जहां कुछ मंत्रियों के अलावा 34 से अधिक कांग्रेस विधायक भी जुटे थे।
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