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नौ दिवसीय श्री राम कथा सम्पन्न
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 18 Nov 2013 01:37 PM IST
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स्वामी रामभद्राचार्य का कहना है कि प्रेम, प्रार्थना और प्रभु भक्ति से ही प्रभु प्रकट होते हैं। प्रभु को प्रकट करने के लिए समय, स्थान, स्थिति नहीं, बल्कि समर्पण होना चाहिए।
वे श्री देवालय पूजक परिषद्, श्री मुक्ति नाथ वेद विद्याश्रम (संस्कृत गुरुकुल) द्वारा नौ दिवसीय श्री राम कथा के अंतिम दिन प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीराम से जो प्यार नहीं करता है वह किसी का नहीं बन सकता।
कथा के अंतिम दिन स्वामी रामभद्राचार्य ने श्रीराम द्वारा लंका पर विजय की कथा, भगवान श्री राम की अयोध्या वापसी का प्रसंग सुनाया।
प्रवचन से पहले श्री राम कथा के अंतिम दिन श्री रामचरित्रमानस का नवाहन परायण और हवन हुआ। प्रवचन के बाद आरती और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
पूर्व सांसद सत्यपाल जैन, पार्षद दिवेश मोदगिल, पंजाब विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शंकर झा, पूर्व प्रधान अयोध्या प्रसाद, श्री देवालय पूजक परिषद के संरक्षक मोहन लाल जोशी, सुभाष ने स्वामी रामभद्राचार्य महाराज की चरण पादुका पूजन किया।
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इस अवसर पर श्री देवालय पूजक परिषद प्रधान ईश्वर शास्त्री, महासचिव ओम प्रकाश शास्त्री, कोषाध्यक्ष लाल बहादुर दुबे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवी प्रसाद पैन्यूली, स्वामी प्रसाद मिश्र, संस्कृत-गुरुकुल के चेयरमैन रामरत्न अग्रवाल, संरक्षक राज कुमार खन्ना आदि मौजूद थे।
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वे श्री देवालय पूजक परिषद्, श्री मुक्ति नाथ वेद विद्याश्रम (संस्कृत गुरुकुल) द्वारा नौ दिवसीय श्री राम कथा के अंतिम दिन प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीराम से जो प्यार नहीं करता है वह किसी का नहीं बन सकता।
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कथा के अंतिम दिन स्वामी रामभद्राचार्य ने श्रीराम द्वारा लंका पर विजय की कथा, भगवान श्री राम की अयोध्या वापसी का प्रसंग सुनाया।
प्रवचन से पहले श्री राम कथा के अंतिम दिन श्री रामचरित्रमानस का नवाहन परायण और हवन हुआ। प्रवचन के बाद आरती और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
पूर्व सांसद सत्यपाल जैन, पार्षद दिवेश मोदगिल, पंजाब विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शंकर झा, पूर्व प्रधान अयोध्या प्रसाद, श्री देवालय पूजक परिषद के संरक्षक मोहन लाल जोशी, सुभाष ने स्वामी रामभद्राचार्य महाराज की चरण पादुका पूजन किया।
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इस अवसर पर श्री देवालय पूजक परिषद प्रधान ईश्वर शास्त्री, महासचिव ओम प्रकाश शास्त्री, कोषाध्यक्ष लाल बहादुर दुबे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवी प्रसाद पैन्यूली, स्वामी प्रसाद मिश्र, संस्कृत-गुरुकुल के चेयरमैन रामरत्न अग्रवाल, संरक्षक राज कुमार खन्ना आदि मौजूद थे।