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मुआवजा लिया और बेच दी सरकारी जमीन
अमर उजाला ब्यूरो, पंचकूला
Updated Tue, 18 Mar 2014 05:14 PM IST
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पर्यटन विभाग ने जमीन एक्वायर करके मुआवजा दे दिया, लेकिन जिनकी जमीन एक्वायर हुई, उनमें एक परिवार को ऐसी खुरापात सूझी कि एक हिस्से में एक्वायर जगह में से 10 बिसवा जमीन ही बेच दी।
यह जमीन बिकी 2007 में, लेकिन पर्यटन विभाग को वर्षों बाद अब इस जालसाजी का पता चला। जांच के बाद पिंजौर थाना पुलिस ने एक महिला व उसके दो बेटों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक, पिंजौर क्षेत्र के तहत आने वाले कजियाना गांव की 46 बीघा 5 बिसवा जमीन हरियाणा पर्यटन विभाग ने एक्वायर की थी और लोगों को मुआवजा भी दे दिया गया था।
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वर्ष 1995-96 में एक्वायर हुई इस जमीन पर रेस्ट हाउस बनाने की योजना बनाई जा रही थी, लेकिन एक हिस्से की म्यूटेशन बाद में हुई, जिसमें चार बीघा 11 बिसवा जमीन थी।
उस वक्त एक्वायर हुई जमीन का इंतकाल विभाग ने अपने नाम नहीं कराया और सरकारी रिकॉर्ड में जमीन लोगों के नाम ही दर्ज रही। विभाग की तरफ से हुई ऐसी लापरवाही का एक परिवार ने फायदा उठाया और जमीन बेच डाली।
2013 में कराया इंतकाल
पर्यटन विभाग ने जमीन लेने के वर्षों बाद वर्ष 2013 के अंत में जब जमीन का इंतकाल अपने नाम कराया तो कुल जमीन में से 10 बिसवा कम पाए गए।
यह बात जब आला अधिकारियों तक पहुंची तो जांच के आदेश हुए। फिर पता चला कि खसरा नंबर 306/154 में से 10 बिसवा बेचे गए हैं।
ये हैं आरोपी
जो 10 बिसवा जमीन बिकी, वह कजियाना गांव की महिला कृष्णा देवी व उसके बेटे मुकेश व सुखदेव के नाम थी।
उन्होंने मौका पाकर यह जमीन 2007 में ही बेच दी, क्योंकि इंतकाल में जमीन उन्हीं के नाम थी, जबकि असल में यह जमीन पर्यटन विभाग एक्वायर कर चुका था।
अब विभाग की अपनी जांच पूरी होने के बाद पिछले दिनों पिंजौर थाने में तीनों के खिलाफ शिकायत दी गई और जांच के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।
फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस ने पर्यटन विभाग से रिकॉर्ड तलब कर लिया है।
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यह जमीन बिकी 2007 में, लेकिन पर्यटन विभाग को वर्षों बाद अब इस जालसाजी का पता चला। जांच के बाद पिंजौर थाना पुलिस ने एक महिला व उसके दो बेटों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।
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पुलिस के मुताबिक, पिंजौर क्षेत्र के तहत आने वाले कजियाना गांव की 46 बीघा 5 बिसवा जमीन हरियाणा पर्यटन विभाग ने एक्वायर की थी और लोगों को मुआवजा भी दे दिया गया था।
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वर्ष 1995-96 में एक्वायर हुई इस जमीन पर रेस्ट हाउस बनाने की योजना बनाई जा रही थी, लेकिन एक हिस्से की म्यूटेशन बाद में हुई, जिसमें चार बीघा 11 बिसवा जमीन थी।
उस वक्त एक्वायर हुई जमीन का इंतकाल विभाग ने अपने नाम नहीं कराया और सरकारी रिकॉर्ड में जमीन लोगों के नाम ही दर्ज रही। विभाग की तरफ से हुई ऐसी लापरवाही का एक परिवार ने फायदा उठाया और जमीन बेच डाली।
2013 में कराया इंतकाल
पर्यटन विभाग ने जमीन लेने के वर्षों बाद वर्ष 2013 के अंत में जब जमीन का इंतकाल अपने नाम कराया तो कुल जमीन में से 10 बिसवा कम पाए गए।
यह बात जब आला अधिकारियों तक पहुंची तो जांच के आदेश हुए। फिर पता चला कि खसरा नंबर 306/154 में से 10 बिसवा बेचे गए हैं।
ये हैं आरोपी
जो 10 बिसवा जमीन बिकी, वह कजियाना गांव की महिला कृष्णा देवी व उसके बेटे मुकेश व सुखदेव के नाम थी।
उन्होंने मौका पाकर यह जमीन 2007 में ही बेच दी, क्योंकि इंतकाल में जमीन उन्हीं के नाम थी, जबकि असल में यह जमीन पर्यटन विभाग एक्वायर कर चुका था।
अब विभाग की अपनी जांच पूरी होने के बाद पिछले दिनों पिंजौर थाने में तीनों के खिलाफ शिकायत दी गई और जांच के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।
फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस ने पर्यटन विभाग से रिकॉर्ड तलब कर लिया है।