Haryana News: बाढ़ प्रभावित किसानों के खातों में सात से पहले भेजी जाएगी मुआवजा राशि, डिप्टी CM ने किया एलान
दुष्यंत चौटाला ने बताया कि यमुना नदी में बाढ़ से यमुनानगर, करनाल पानीपत, सोनीपत, पलवल, फरीदाबाद के खेतों में सिल्ट (रेत व मिट्टी) जमा है। कुछ खेतों में सिल्ट ढाई से तीन फुट तक है। ऐसे किसानों के खेतों से सिल्ट निकालने के लिए सरकार नई पॉलिसी बनाने जा रही है।
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बाढ़ से प्रभावित किसानों की फसल का मुआवजा 7 सितंबर से पहले उनके खातों में भेज दिया जाएगा। अभी तक के आकलन के मुताबिक हरियाणा में 4 लाख आठ हजार एकड़ फसल को नुकसान पहुंचा है। डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने बताया कि क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अभी तक सभी किसानों ने अपनी फसलों का ब्योरा जमा नहीं किया है। इसके लिए पोर्टल 18 अगस्त तक खुला रहेगा। सभी उपायुक्तों को फसलों के नुकसान का जल्द आकलन करने का निर्देश दिया है।
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि जिन इलाकों में पटवारियों की कमी है उनकी मदद के लिए क्षतिपूर्ति और गिरदावर सहायक नियुक्त किए जाएंगे। बाढ़ से 47 लोगों की मौत हुई है, जिनमें से 40 मृतकों के परिवारों को 1 करोड़ 60 लाख रुपये मुआवजा दे दिया है। वहीं, बाढ़ से 475 मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनमें से 108 मकानों का मुआवजा प्रभावितों को दे दिया गया है।
खेतों में ढाई से तीन फुट तक भरी है सिल्ट
दुष्यंत चौटाला ने बताया कि यमुना नदी में बाढ़ से यमुनानगर, करनाल पानीपत, सोनीपत, पलवल, फरीदाबाद के खेतों में सिल्ट (रेत व मिट्टी) जमा है। कुछ खेतों में सिल्ट ढाई से तीन फुट तक है। ऐसे किसानों के खेतों से सिल्ट निकालने के लिए सरकार नई पॉलिसी बनाने जा रही है। इसके तहत डिप्टी कमिश्नर के नेतृत्व में कमेटी रेत की नीलामी करेगी। इस नीलामी से मिलने वाली धनराशि का एक तिहाई हिस्सा किसान को जाएगा और दो तिहाई हिस्सा सरकार के खाते में जाएगी। सरकार ने दावा किया है कि ऐसी नीति बनाने वाला हरियाणा देश में पहला राज्य है। सबसे ज्यादा सिल्ट गन्ना के खेतों में जमा है।
सड़कों को नहीं काटना पड़ेगा, नीचे पाइप डाले जाएंगे
इस बार आई बाढ़ से आबादी को डूबने से बचाने के लिए कई सड़कों को बीच से काटना पड़ा था। भविष्य की सुविधा के लिए सरकार ने निर्णय लिया है कि ऐसे कटाव वाले स्थानों पर सड़कों के नीचे पाइप डाले जाएंगे ताकि भविष्य में कभी पानी निकासी की जरूरत पड़े तो सड़कों को काटना नहीं पड़ेगा और यातायात भी बाधित नहीं होगा।
दावा- बाढ़ से पहले 1100 करोड़ रुपये खर्च किए
डिप्टी सीएम ने दावा किया कि बाढ़ और सूखे से बचाव के लिए हरियाणा सरकार ने 1100 करोड़ रुपये खर्च किए थे। उन्होंने कहा कि पहाड़ी इलाकों में ज्यादा बरसात से पहली बार नदियों में इतना तेज बहाव आया था। इस वजह से बाढ़ के हालात बने। साल 2010 में सिरसा के ओटू हेड 24 हजार क्यूसेक का पानी का बहाव आया था। इसकी वजह से 17 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए थे जबकि इस बार ओटू हेड में 50 हजार क्यूसेक का पानी का बहाव था लेकिन आबादी क्षेत्र में कहीं पानी जमा नहीं हुआ, जो कि सरकार की समय से पहले की तैयारियों को दर्शाता है।