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जानिए, 10 साल की बच्ची के रेपिस्ट मामाओं को सजा सुनाते हुए क्या बोली जज?

Sun, 19 Nov 2017 04:53 PM IST
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 19 Nov 2017 04:53 PM IST
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comment of female judge during decision of 10 years old girl rape case
10 साल की बच्ची के रेपिस्ट मामा
10 साल की बच्ची से रेप और उसके बाद मां बनने के मामले में दोषी पीड़िता के अपने दोनों सगे मामाओं को सजा सुनाते समय जज ने कई मार्मिक और सख्त टिप्पणियां भी कीं।
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महिला अपराध के मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष कोर्ट की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) पूनम आर जोशी ने कहा कि देश में दुराचार के अधिकतर मामले या तो किन्हीं कारणों से दर्ज ही नहीं हो पाते हैं या अपने निर्णय तक नहीं पहुंच पाते हैं। इस कारण अपराधी आजाद घूमते रहते हैं और अगले शिकार के लिए निकल पड़ते हैं।
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नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार देश में एक साल में दुराचार के मामले 2011 में 16 हजार से बढ़कर अब 24 हजार हो गए हैं। इनमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे हालात में ऐसे अपराधियों को ऐसी सख्त से सख्त सजा सुनाई जानी चाहिए। ताकि ऐसे जघन्य अपराध करने वालों से समाज को सुरक्षित रखा जाए और यह समाज के लिए एक संदेश के तौर पर जाए।’
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बच्ची संग जो हुआ, उसका दाग वो ताउम्र ढोएगी

comment of female judge during decision of 10 years old girl rape case
बच्ची के साथ दुराचार करने वाले
अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रतिक्रिया दी कि बच्ची के साथ जो कुछ हुआ उसका दाग उसे जीवनभर ढोना पड़ेगा। यह ऐसा दाग है जो उसे जीवनभर हर पड़ाव पर डराएगा। दोषियों ने बहुत ही जघन्य, पाप और अनैतिक कार्य किया है।

दोषियों की उम्र उसके पिता की उम्र के समान है। ऐसी उम्र में जब उसके खेलने-कूदने और बचपन जीने का वक्त है, दोषियों ने उसके साथ घिनौनी हरकत कर उस पर गर्भवती होने का बोझ डाल दिया। ऐसे अपराधी माफी या किसी तरह की उदारता के लायक नहीं हैं। इनकी सजा समाज के लिए संदेश के तौर पर जानी चाहिए।

थोड़ी सी भी उदारता नहीं दिखाई जा सकती
जज ने सजा सुनाते समय कहा कि एक छोटी बच्ची के साथ केवल रेप ही नहीं हुआ, बल्कि इसके बाद उसने एक नवजात को भी जन्म दिया जिसे इस क्रूर दुनिया में अकेला छोड़ दिया गया। दोषियों द्वारा किया गया अपराध थोड़ी सी भी उदारता के लायक नहीं है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों को ऐसी सजा सुनाई जानी चाहिए, कि वह समाज में ऐसी हरकतें और सोच रखने वाले लोगों को हतोत्साहित करे।’
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