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इन बीमारियों का मुफ्त इलाज कराना है तो यहां आएं
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 09 Jan 2014 12:02 AM IST
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स्थानीय सेक्टर-18 बी स्थित टैगोर थिएटर के पीछे न्यू पब्लिक स्कूल में हर रविवार भोर होने से पहले ही लोगों की लाइनें लग जाती हैं। यहां पर वीरेंद्र शर्मा टच थैरेपी के माध्यम से इलाज करते हैं।
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वीरेंद्र शर्मा का दावा है कि वे प्रार्थना के साथ हीलिंग टच शुरू करते हैं। ‘स्पीरिचुअल हीलिंग’ नामक यह सत्र सुबह ठीक आठ बजे शुरू हो जाता है और जबकि गर्मियों में इसका समय छह बजे रखा है।
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यहां लोग स्पोंडेलाइसेस, माइग्रेन, स्लिप डिस्क, शेटिका, नी जॉइंट पेन, गठिया आदि के इलाज के लिए आते हैं। पर वहां बेहद अनुभवी वीरेंद्र शर्मा के जादुई हाथों की टच थैरेपी की बदौलत उन्हें बड़ा आराम मिलता है।
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शर्मा पेशे से सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं और हर रविवार को वहां अपने हाथों से 100 से भी ज्यादा दुखी लोगों को राहत देते हैं।
इलाज का कोई पैसा नहीं
उनका कहना है कि यदि इस उपचार में रुपए-पैसों का लेनदेन होगा, तो उपचार की शक्ति भी खत्म हो जाएगी। मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि मेरी सेवाओं को भारतीय सेना ने भी सम्मान दिया है।
शर्मा कहते हैं कि वे पूरे देश में मौजूद सैन्य छावनियों में समय-समय पर अपने शिविर लगाते हैं। सेना के अधिकारी सम्मानित भी कर चुके हैं।
सेना के छावनियों में सैनिकों का उपचार
भारतीय सेना अपने छावनी क्षेत्रों में सैनिकों के उपचार के लिए बुलावा भेजती रहती हैं। इनमें से कई बार ऐसे शिविर चंडीमंदिर स्थित पश्चिमी कमान के मुख्यालय, 10 कॉर्प्स के मुख्यालय और जयपुर, कोटा, मथुरा और बठिंडा स्थित इंफेंट्री डिवीजन के मुख्यालयों में लगाए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि वे सेना के बुलावे पर कई मर्तबा दूर-दाराज की यात्राएं भी करते हैं, क्योंकि उनका एकमात्र मकसद सेना के अधिकारियों और जवानों को दुखों से मुक्ति दिलाने का है।
सेना में उनकी टच थैरेपी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह बेहद तेज, बेहतर और विश्वास करने लायक होता है।