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हरियाणाः गैर एचसीएस श्रेणी में अब कॉलेज प्रोफेसर भी बन सकेंगे आईएएस, जल्द बदलेंगे नियम
Thu, 10 Sep 2020 11:37 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 10 Sep 2020 11:37 AM IST
सार
- उच्च शिक्षा विभाग ने नियमों में संशोधन के लिए मुख्यमंत्री को भेजी फाइल
- अधिवक्ता हेमंत कुमार ने पत्र लिखकर उठाए थे प्रोफेसर की योग्यता पर सवाल
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
हरियाणा के कॉलेजों में कार्यरत कॉलेज प्रोफेसर भी योग्यता पूरी करने पर आईएएस बन सकेंगे। गैर एचसीएस श्रेणी में इन्हें आवेदन करना होगा। सरकार ने इनकी योग्यता को लेकर आड़े आ रही अड़चनों को दूर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रोफेसरों के आईएएस बनने की राह में बाधा बन रहे नियमों में संशोधन करने का निर्णय लिया है। इसकी फ़ाइल मंजूरी के लिए सीएम मनोहर लाल को भेज दी गई है।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के वकील हेमंत कुमार ने उच्च शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर कॉलेज प्रोफेसर की आईएएस बनने की योग्यता पर सवाल उठाए थे। हेमंत का तर्क है कि कॉलेज प्रोफेसर हरियाणा सरकार के ग्रुप ए अधिकारी नहीं हैं। क्योंकि, आज तक इन पर लागू होने वाले सेवा नियमों में इनके ग्रुप बी ही होने का उल्लेख है। हेमंत का कहना है कि इनमें से कई प्रोफेसर माह 9 अगस्त 2020 को हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) द्वारा नॉन-एचसीएस से आईएएस चयन प्रक्रिया के तहत स्क्रीनिंग परीक्षा में शामिल हुए हैं।
जब अभी इनके सेवा नियमों में संशोधन ही नहीं हुआ तो फिर प्रोफेसर को स्क्रीनिंग के लिए कैसे बुलाया गया। इस चयन प्रक्रिया में केवल राज्य सरकार के ग्रुप ए अधिकारी ही योग्य हैं, जिनकी न्यूनतम आठ वर्ष की नियमित क्लास वन सेवा हो चुकी हो। हेमंत कुमार ने इस विषय पर बीते माह 10 अगस्त को हरियाणा के उच्च शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव अंकुर गुप्ता और विभाग के महानिदेशक अजीत बाला जोशी को अलग-अलग ईमेल भेजी थीं।
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जिसके जवाब में 4 सितंबर को उन्हें सूचित किया गया है कि उनके द्वारा नॉन-एचसीएस से आईएएस चयन प्रक्रिया में कॉलेज प्रोफेसरों की योग्यता पर जो सवाल उठाए गए हैं, उस संबंध में मुख्यमंत्री को नियम संशोधन के लिए फाइल भेजी गई है। इससे साफ हो गया है कि चयन प्रक्रिया के लिए जिन सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसरों के नाम उच्च शिक्षा विभाग ने एचपीएससी को भेजे गए थे, वे सभी इस परीक्षा एवं चयन प्रक्रिया में शामिल होने योग्य ही नही हैं। इस कारण इस परीक्षा में उनकी उम्मीदवारी रद्द हो सकती है। बहरहाल, उच्च न्यायालय में मामला लंबित होने के कारण फिलहाल चयन प्रक्रिया पर रोक लगी हुई है।
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पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के वकील हेमंत कुमार ने उच्च शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर कॉलेज प्रोफेसर की आईएएस बनने की योग्यता पर सवाल उठाए थे। हेमंत का तर्क है कि कॉलेज प्रोफेसर हरियाणा सरकार के ग्रुप ए अधिकारी नहीं हैं। क्योंकि, आज तक इन पर लागू होने वाले सेवा नियमों में इनके ग्रुप बी ही होने का उल्लेख है। हेमंत का कहना है कि इनमें से कई प्रोफेसर माह 9 अगस्त 2020 को हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) द्वारा नॉन-एचसीएस से आईएएस चयन प्रक्रिया के तहत स्क्रीनिंग परीक्षा में शामिल हुए हैं।
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जब अभी इनके सेवा नियमों में संशोधन ही नहीं हुआ तो फिर प्रोफेसर को स्क्रीनिंग के लिए कैसे बुलाया गया। इस चयन प्रक्रिया में केवल राज्य सरकार के ग्रुप ए अधिकारी ही योग्य हैं, जिनकी न्यूनतम आठ वर्ष की नियमित क्लास वन सेवा हो चुकी हो। हेमंत कुमार ने इस विषय पर बीते माह 10 अगस्त को हरियाणा के उच्च शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव अंकुर गुप्ता और विभाग के महानिदेशक अजीत बाला जोशी को अलग-अलग ईमेल भेजी थीं।
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जिसके जवाब में 4 सितंबर को उन्हें सूचित किया गया है कि उनके द्वारा नॉन-एचसीएस से आईएएस चयन प्रक्रिया में कॉलेज प्रोफेसरों की योग्यता पर जो सवाल उठाए गए हैं, उस संबंध में मुख्यमंत्री को नियम संशोधन के लिए फाइल भेजी गई है। इससे साफ हो गया है कि चयन प्रक्रिया के लिए जिन सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसरों के नाम उच्च शिक्षा विभाग ने एचपीएससी को भेजे गए थे, वे सभी इस परीक्षा एवं चयन प्रक्रिया में शामिल होने योग्य ही नही हैं। इस कारण इस परीक्षा में उनकी उम्मीदवारी रद्द हो सकती है। बहरहाल, उच्च न्यायालय में मामला लंबित होने के कारण फिलहाल चयन प्रक्रिया पर रोक लगी हुई है।