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बचपन के हेडमास्टर संभालेंगे सीएम की कुर्सी!

Tue, 21 Oct 2014 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/चंडीगढ़।
अमर उजाला ब्यूरो/चंडीगढ़। Updated Tue, 21 Oct 2014 12:29 AM IST
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CM's chair will take headmaster of childhood!
एक समय था जब मनोहर लाल खट्टर पर परिजनों का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रचारक परंपरा को छोड़ घर संभालने का जबरदस्त दबाव था। इस पर उन्होंने परिजनों ने कहा था कि उनके चार भाइयों में से किसी एक को देशसेवा के लिए भेज दो तो वे घर वापस आ जाएंगे, लेकिन बात नहीं बनी और मनोहर लाल ने आजीवन अविवाहित रहते हुए समाजसेवा का संकल्प ले लिया।
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महम खंड (रोहतक जिला) के  निदाना गांव में 1954 में जन्मे मनोहर लाल की स्कूली शिक्षा कलानौर खंड के गांव बनियानी में हुई। इनके पिता की बनियानी गांव में एक दुकान की थी, जिसके बाद इनका परिवार इसी गांव में रहने लगा। छात्र जीवन में वे काफ गंभीर प्रवृति के थे, जिसके कारण कक्षा के दूसरे विद्यार्थी उन्हें हेडमास्टर कहकर पुकारते थे।
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प्रैप मेडिकल (ग्यारहवीं)और प्री मेडिकल (बारहवीं)की पढ़ाई उन्होंने 1972 में रोहतक के सरकारी कॉलेज से की। इसके बाद उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के साथ दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में कपड़े का कारोबार किया। इस दौरान उन्होंने अपनी अपनी पढ़ाई प्राइवेट जारी रखी। 1975 में देश में लगे आपातकाल के दौरान उनकी रुचि देशहित कार्र्यों के लिए बनी और 1977 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने।
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चौदह साल रहे संघ के दायित्वों पर
1980 में वे अपना कारोबार और घर छोड़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक के प्रचारक निकले। चौदह साल तक संघ में विभिन्न दायित्वों पर रहे। संघ का अंतिम दायित्व उनके पास हिसार और भिवानी विभागों के प्रचारक का रहा। इन विभागों में सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ जिले आते हैं।

बंसीलाल की सरकार से आए थे सुर्खियों में
1994 में उन्हें हरियाणा भाजपा में प्रदेश संगठन मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। 1996 का विधानसभा चुनाव भाजपा ने बंसीलाल की पार्टी हरियाणा विकास पार्टी के साथ मिलकर लड़ा। इस चुनाव की रणनीति बनाने में खट्टर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके बाद बंसीलाल की सरकार गिरने के बाद वे पहली बार सुर्खियों में आए।

जम्मू-कश्मीर से बढ़ा राष्ट्रीय राजनीति में कद
2002 में पार्टी ने उन्हें जम्मू-कश्मीर का प्रभारी बनाया। इसके बाद हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में उन्हें एक बार फिर हरियाणा में जिम्मेदारी सौंपी गई और उन्हें चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया। इस चुनाव में पुराने कार्यकर्ताओं को काम में लगाने और रूठों को मनाने में उनकी खास भूमिका रही।


रूठों को मनाने की कला के माहिर
उनके साथ काम करने वाले संघ के एक प्रचारक कहते हैं कि जहां मनोहर लाल का व्यवस्था कौशल जबरदस्त है, वहीं वे अनुशासन के भी पक्के हैं। वे संपर्क संबंध बनाने के माहिर भी माने जाते हैं। स्कूल समय से उनके सहपाठी रहे नरेंद्र खट्टर कहते हैं कि मनोहर लाल काफी गंभीर प्रवृति के छात्र रहे थे। इसके चलते कक्षा में दूसरे विद्यार्थी उन्हें हेडमास्टर कहकर पुकारते थे।
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