सीएम मनोहर लाल ने नगर निकाय की बैठक बुलाई, गृह मंत्री अनिल विज के पहुंचने पर संशय
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हरियाणा में सीआईडी प्रकरण को लेकर चल रहा विवाद अभी थमता नहीं दिख रहा है। दिल्ली चुनाव के बाद ही इस विवाद के निपटने के आसार है। इसी बीच एक नया विवाद और खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज सुबह शहरी स्थानीय निकाय विभाग की बैठक बुलाई है। इस बैठक में विभाग के मंत्री अनिल विज के पहंचने पर संशय है।
आज शनिवार सुबह 10 बजे सीएम आवास पर हरियाणा के मेयर और निगम आयुक्त बुलाए गए हैं। इस बैठक में निगमों को स्वायत्तता देने पर चर्चा की जाएगी। शहरी स्थानीय निकाय भी वर्तमान सरकार में अनिल विज के पास है, लेकिन विज ने इनकार किया है कि उन्हें बैठक का एजेंडा पता नहीं है। ऐसे में उनके पहुंचने पर भी संशय है।
उधर, गृह मंत्री अनिल विज ने इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला के बयान पर एक और बयान दिया है। अभय सिंह चौटाला ने सीआईडी मामले में विभाग को अनिल विज के पास रहने का समर्थन किया है। जिसके बाद गृहमंत्री अनिल विज ने कहा कि इसमें किसी के समर्थन या विरोध की कोई कीमत नहीं है।
विज ने कहा कि होगा वही जो किताब में लिखा है। कुछ नेता पहले दूसरी भाषा बोल रहे थे, क्योंकि उन्होंने कभी किताबों से शासन नहीं किया, उन्होंने तानाशाही से शासन किया। उनकी राजनीति भी यही थी कि किताब में जो भी लिखा हो लेकिन जो हम कहें वही सही है।
हरियाणा में 11 पुलिस अधीक्षकों की कार्य प्रणाली से नाखुश होते हुए गृहमंत्री अनिल ने अपने तेवर सख्त कर दिए हैं। विज ने कहा कि जिन अधिकारियों के पास केस पेंडिंग हैं और उन्होंने इसका स्पष्टीकरण नहीं दिया या केसों को निपटाने में रुचि नहीं ले रहे हैं।
उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी। इसके अलावा उन्होंने हरियाणा के डीजीपी को आदेश दिए हैं कि उनके कार्यालय से भेजी गई कोई भी शिकायत डीएसपी स्तर के अधिकारी के पास जाएगी। जिन शिकायतों पर पहले से जांच चल रही है। उनकी जांच बदल कर दूसरे अधिकारी को दी जाए।
सीएम बढ़ा सकते हैं निगम मेयरों की ‘पॉवर’
हरियाणा में सभी नगर निगमों के मेयरों की ‘पॉवर’ बढ़ सकती है। उनकी वित्तीय शक्तियों को और अधिक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा निगमों से जुड़े अन्य मसलों पर भी मंथन होगा। इसके लिए मुख्यमंत्री हरियाणा ने शनिवार को सभी निगमों के मेयरों व आयुक्तों की बैठक अपने आवास पर बुलाई है। बताते चलें कि सभी निगमों के मेयर इस समय भाजपा समर्थित हैं।
मगर निगम मेयरों की वित्तीय शक्तियां यदि देखें तो इस वक्त बहुत ज्यादा नहीं है। मेयर खुद अपनी फाइनेंशियल पॉवर को बहुत नाकाफी बताते हैं। इसी वजह से कई बार विकास कार्यों को लेकर मेयरों व निगम अफसरों में कई बार टकराव भी बना रहता है। मेयरों की मांग भी है कि प्रदेश सरकार उनकी वित्तीय शक्तियां बढ़ाएं।
इसके अलावा सीएम इस बैठक के दौरान निगमों से जुड़े अन्य मामलों और निगमों के माध्यम से होने वाले विकास कार्यों पर भी चर्चा कर सकते हैं। इतना ही नहीं पिछले दिनों शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज ने निकायों में होने वाली वित्तीय अनियमितताओं का कैग से स्पेशल ऑडिट करवाने के निर्देश दिए थे। इस बैठक में सीएम, मेयर व अफसर इस मसले पर भी चर्चा कर सकते हैं।