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Punjab election 2022: इन दो नेताओं के बीच सीएम चेहरे की दौड़, पार्टी ने सर्वे में दिग्गजों को किनारे किया, मगर चुनना आसान नहीं

Fri, 04 Feb 2022 02:10 AM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 04 Feb 2022 02:10 AM IST
सार

पंजाब कांग्रेस को छह फरवरी को अपना सीएम चेहरा मिल जाएगा। पार्टी में सीएम चेहरे की दौड़ सिर्फ दो नेताओं के बीच है। कांग्रेस ने तमाम दिग्गजों को अपने सर्वे से अलग कर दिया है। अब इन्हीं में से एक को छह फरवरी को पार्टी आधिकारिक तौर पर अपना सीएम चेहरा घोषित करेगी। मगर ये सब इतना आसान नहीं होगा।  

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CM face race between two Congress leaders in Punjab
राहुल गांधी, चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मुख्यमंत्री चेहरे की दौड़ में केवल दो नेताओं को ही पार्टी हाईकमान ने प्राथमिकता दी है। हाईकमान ने इस मामले में प्रदेश के सभी दिग्गज कांग्रेसियों को साइडलाइन कर दिया है। यहां तक कि जिन नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया था, उन्हें भी अनदेखा कर दिया है। इसके चलते प्रदेश कांग्रेस में अंदरखाते गुस्सा बढ़ने लगा है। 

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सियासी गलियारों में अभी से यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि हाईकमान ने अगर मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को ही अपना मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया तो एक तरफ तो प्रदेश प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू मोर्चा खोलेंगे वहीं पार्टी के सीनियर नेता भी चन्नी की राह आसान नहीं रहने देंगे, क्योंकि ज्यादातर सीनियर नेता मानकर चल रहे हैं कि अगर चन्नी के हाथ में कमान आ गई तो अगले पांच साल के लिए बाकी सभी नेता पार्टी में हाशिए पर चले जाएंगे, भले ही उन्हें चुनाव जीतने के बाद मंत्री पद ही क्यों न मिल जाए।
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राहुल गांधी द्वारा बीते सप्ताह की गई घोषणा के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को 20 फरवरी को मतदान से पहले मुख्यमंत्री चेहरे के लिए अपनी पसंद बताने को कहा गया है। इसके बाद से प्रदेश कांग्रेस में सिद्धू और चन्नी के बीच दावेदारी के लिए संघर्ष तेज होने लगा है। फिलहाल, आम लोगों को भी इस मामले में अपनी राय देने के लिए टेली-कॉल मिल रहे हैं, जिसमें पूछा जा रहा है कि कांग्रेस को अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में किसे नामित करना चाहिए। कॉल रिसीव करने वालों से यह भी पूछा जा रहा है कि कांग्रेस को नाम बताना चाहिए या नहीं।

कांग्रेस हाईकमान भले ही नवजोत सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी में से किसी एक को अगला मुख्यमंत्री घोषित करना चाह रही है लेकिन इस पद की दौड़ में अब तक तीन अन्य नेता भी खुलकर सामने आ चुके हैं। इनमें सबसे पहले सुखजिंदर सिंह रंधावा हैं, जिनका कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद जाट सिख नेता के रूप में उनका चुनाव हो गया था, जिसे अंतिम समय में बदल दिया गया। 

दूसरे नेता, प्रताप सिंह बाजवा हैं, जो पूर्व प्रदेश प्रधान भी हैं। चन्नी को सीएम बनाए जाने की चर्चाओं के जवाब में उनका कहना है कि अगर चन्नी सीएम बन सकते हैं तो वह (प्रताप बाजवा) क्यों नहीं। मुख्यमंत्री पद के तीसरे दावेदार पूर्व प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ भी खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने इस पद अपनी दावेदारी को बहुमत के साथ सार्वजनिक किया है कि कैप्टन के बाद नया सीएम चुनते समय 42 विधायकों का उन्हें समर्थन हासिल था, जबकि नवजोत सिद्धू को 6 और चन्नी के केवल 2 का समर्थन था। इस तरह जाखड़ ने सीधे तौर पर यह भी साबित करने का प्रयास किया है कि प्रदेश कांग्रेस में चन्नी और सिद्धू के समर्थन में कोई हवा नहीं है।

सिद्धू या चन्नी, फैसला लेना आसान नहीं
कांग्रेस हाईकमान ने फोन कॉल के जरिये नवजोत सिद्धू और चरणजीत चन्नी के समर्थन में सर्वे तो शुरू कर दिया है। फिर भी माना जा रहा है कि अनुसूचित जाति के सिख चन्नी और जाट सिख सिद्धू में से किसी एक का अगले मुख्यमंत्री के तौर पर चुनाव आसान नहीं है। चुनाव के समय हाईकमान का फैसला प्रदेश में वोटों के जातिगत समीकरण को भी गड़बड़ा सकता है। 

राज्य में 32 फीसदी जनता अनुसूचित जाति वर्ग और 30 फीसदी जाट सिख से है। बाकी समुदाय करीब 40 फीसदी हैं। पार्टी के भीतर इस समय कांग्रेस नेताओं का चन्नी को इसलिए समर्थन मिल रहा है क्योंकि वह पार्टी के हर व्यक्ति को आसानी से उपलब्ध रहे हैं। सौ दिन के कार्यकाल में वह कांग्रेस के सभी छोटे और बड़े नेताओं व कार्यकर्ताओं की पहुंच में थे। हालांकि चन्नी को सीएम फेस घोषित करने पर जाट सिख वर्ग और उच्च वर्ग को कठिनाई होगी। वहीं चन्नी की जगह सिद्धू को सीएम घोषित करने पर अनुसूचित जाति वर्ग की नाराजगी कांग्रेस को महंगी पड़ सकती है। 

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